भारत की प्रमुख आतंकवाद निरोधक बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), ने आज अपने 41वें स्थापना दिवस का आयोजन मनसेर स्थित अपने गार्जियन में विभिन्न ऑपरेशनल प्रदर्शनों के साथ मनाया। इस कार्यक्रम ने इस विशेष इकाई की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसमें उच्च स्तरीय dignitaries भी शामिल हुए और प्रशिक्षण एवं अवसंरचना में प्रगति को उजागर किया गया।
1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दुखद हत्या और उसके बाद गोल्डन टेम्पल में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के मद्देनजर NSG की स्थापना की गई थी। इसे आतंकवादी गतिविधियों को सटीकता और दक्षता के साथ समाप्त करने के लिए एक संघीय आपातकालीन बल के रूप में स्थापित किया गया। पिछले चार दशकों में, यह बल सामरिक उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है, जिसमें भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस संगठनों से कर्मियों को शामिल किया जाता है। इसका कार्यक्षेत्र आतंकवाद निरोध, अपहरण निरोध, बंधक मुक्ति और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के तहत आता है, और यह अक्सर सबसे कठिन परिस्थितियों में काम करता है।
स्थापना दिवस समारोह एक औपचारिक परेड के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद NSG कमांडो की विशेष क्षमताओं के लाइव प्रदर्शन किए गए। दर्शकों ने निकटता से युद्ध, बम निष्क्रियकरण और तेजी से हस्तक्षेप की रणनीतियों से संबंधित परिदृश्यों का अनुभव किया, जो बल की उन्नत हथियार, निगरानी तकनीक और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हैं। ये प्रदर्शनों ने कमांडो के कठोर प्रशिक्षण की प्रक्रियाओं को उजागर किया, और आधुनिक विषम युद्ध चुनौतियों के प्रति उनकी अनुकूलता को भी दर्शाया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जिन्होंने NSG के योगदान को समर्पित एक संबोधन दिया। शाह ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड पिछले चार दशकों से आतंकवाद के खिलाफ एक कठोर लड़ाई लड़ रहा है,” उन्होंने प्रदर्शनों को देश की मजबूस रक्षा तंत्र का भरोसा देने वाला बताया। उन्होंने आगे आतंकवाद के प्रति सरकार की शून्य सहिष्णुता नीति पर प्रकाश डाला, जिसमें अवैध गतिविधियों (निवारण) अधिनियम (UAPA) में हालिया संशोधनों का उल्लेख किया गया, जिसने जांच शक्तियों को मजबूत किया और आतंक वित्तपोषण नेटवर्क को सीमित किया।
एक महत्वपूर्ण विकास में, शाह ने मनसेर में विशेष संचालन प्रशिक्षण केंद्र (SOTC) का उद्घाटन किया, जिसकी लागत 141 करोड़ रुपये है। यह केन्द्र न केवल NSG के कर्मियों के लिए बल्कि राज्य पुलिस बलों के कमांडो के लिए भी होगा, जो शहरी युद्ध, विस्फोटक ऑर्डनेंस निष्क्रियकरण और साइबर खतरों को कम करने में सहयोगी प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यह पहल कानून प्रवर्तन में विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति के साथ मेल खाती है।
बल की परिचालन क्षमता को बढ़ाते हुए, शाह ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक नए NSG हब की स्थापना की घोषणा की, जो देश भर में सातवां क्षेत्रीय केंद्र है। इस विस्तार का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ करना है, ताकि संभावित खतरों के खिलाफ फुर्ती से तैनाती सुनिश्चित की जा सके। ये हब मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे रणनीतिक रूप से स्थित शहरों में स्थापित हैं, जिन्होंने 2008 के मुंबई हमलों जैसे अतीत के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां NSG कमांडो ने 60 घंटे की कठिन घेराबंदी में अपराधियों को निष्क्रिय किया।
कार्यक्रम में NSG के परिवारों और पूर्व सैनिकों के साथ भी बातचीत शामिल थी, जिसमें गुमनाम रूप से सेवा करने वालों के बलिदानों को मान्यता दी गई। वर्षों में, इस बल ने 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले से लेकर सीमा पार से आतंकवाद के खिलाफ निरंतर निगरानी तक कई उच्च-दांव वाले मिशन आयोजित किए हैं। अपनी सफलताओं के बावजूद, NSG आधुनिकता में निवेश करता रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित एनालिटिक्स और ड्रोन निगरानी शामिल की जा रही है, ताकि विरोधियों से आगे रह सके।
जैसे-जैसे राष्ट्र NSG की सेवा के 41 वर्षों पर विचार करता है, स्थापना दिवस सतत सुरक्षा चुनौतियों के युग में सतर्कता की आवश्यकता की भावुक याद दिलाता है। इसके मूल मंत्र “सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा” के साथ, यह बल भारत की आंतरिक रक्षा व्यवस्था का एक मूलभूत हिस्सा बना हुआ है, जो गणराज्य की संप्रभुता की रक्षा के लिए दशकों तक तत्पर है।