गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेन्स कॉलेज ने 21 जुलाई 2026 को एंटी-रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (त्रि-सेवा) पाठ्यक्रम का सफल समापन किया। यह आयोजन भारत की उन क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो मानव रहित हवाई प्रणालियों से उत्पन्न बढ़ते खतरे का सामना करने के लिए जरूरी हैं।
इस विशेष पाठ्यक्रम में भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के अधिकारियों के साथ इथियोपिया, कजाखस्तान, आर्मेनिया, मंगोलिया, किर्गिस्तान और आइवरी कोस्ट की सशस्त्र सेनाओं के अधिकारी शामिल हुए। विदेशी सैन्य अधिकारियों की भागीदारी ने कॉलेज की उस भूमिका को भी रेखांकित किया, जिसके तहत यह एक प्रमुख पेशेवर सैन्य शिक्षण संस्थान के रूप में काम करता है।
यह पाठ्यक्रम तेजी से बदलते ड्रोन युद्ध के परिदृश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसमें काउंटर-अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और संचालन अवधारणाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को पहचान, पता लगाने, निगरानी रखने और निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया, जिनका उपयोग दूर से संचालित विमानों के विरुद्ध किया जाता है।
पाठ्यक्रम में ड्रोन-रोधी अभियानों की उभरती वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की गई। इससे प्रतिभागियों को सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा के लिए विकसित हो रही रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला। विशेषज्ञ व्याख्यान, परिचालन चर्चाओं और व्यावहारिक सीखने के माध्यम से अधिकारियों को आधुनिक युद्धक्षेत्र में उन्नत काउंटर-ड्रोन क्षमताओं के एकीकरण की जानकारी दी गई।
त्रि-सेवा पाठ्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य विभिन्न सैन्य सेवाओं के बीच तालमेल बढ़ाकर संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत करना था। ड्रोन खतरों के जटिल और व्यापक होते जाने के साथ सेना, नौसेना, वायु सेना और साझेदार देशों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया को और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशिक्षण में सहयोगी योजना, सूचना साझा करने और एकीकृत परिचालन प्रतिक्रिया पर बल दिया गया।
इस पाठ्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। मित्र देशों के अधिकारियों को भारतीय कर्मियों के साथ प्रशिक्षित कर आर्मी एयर डिफेन्स कॉलेज ने आपसी समझ, पेशेवर आदान-प्रदान और दीर्घकालिक सैन्य साझेदारी को प्रोत्साहित किया। ऐसे प्रयास क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में योगदान देते हैं और तेजी से विकसित होती मानव रहित हवाई प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं।
एंटी-रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (त्रि-सेवा) पाठ्यक्रम का सफल समापन सशस्त्र बलों के उस निरंतर फोकस को दर्शाता है, जिसके तहत वे युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए तैयारी कर रहे हैं। ड्रोन और अन्य मानव रहित मंचों के आधुनिक युद्धक्षेत्र में बढ़ते महत्व को देखते हुए, आर्मी एयर डिफेन्स कॉलेज जैसी संस्थाएँ भविष्य के हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और परस्पर संचालन क्षमता विकसित करने में अग्रणी बनी हुई हैं।