नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय सेना के इस एथलीट ने रजत पदक अपने नाम किया।
28 वर्षीय गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर बेहद प्रतिस्पर्धी मुकाबले में दूसरा स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया के काइ रॉबिनसन ने 27:44.07 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि गुलवीर का ऐतिहासिक रजत भारत के लिए पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में पहला राष्ट्रमंडल खेल पदक बना।
यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के सबसे सफल लंबी दूरी के धावकों में जगह बनाने तक के गुलवीर सिंह के प्रेरणादायक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी सफलता इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारतीय सेना ने अपने व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विश्वस्तरीय खेल ढांचे के जरिए खेल प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई है।
गुलवीर सिंह का जन्म 1 जून 1998 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के अतरौली में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। ग्रामीण भारत में बड़े होने के कारण उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों या एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की बहुत कम जानकारी थी। बचपन में उनके गांव में ऐसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, जिससे वैश्विक एथलेटिक्स मंच तक उनकी पहुंच और भी असाधारण बन गई।
उनके जीवन में निर्णायक मोड़ 2018 में आया, जब वे खेल कोटे के माध्यम से भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्हें पैंथर डिवीजन के तहत भारतीय सेना की द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल किया गया, जहां उनकी प्राकृतिक सहनशक्ति और खेल प्रतिभा को व्यवस्थित सैन्य प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय खेल ढांचे के जरिए निखारा गया।
एथलेटिक्स के शुरुआती वर्षों के बारे में गुलवीर ने स्वीकार किया है कि असली प्रतिस्पर्धी लंबी दूरी की दौड़ को उन्होंने सेना में शामिल होने के बाद ही समझा। उन्होंने आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट में विशेष प्रशिक्षण लिया और बाद में भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय शिविर में गए, जहां उन्हें उन्नत कोचिंग और शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता का अनुभव मिला।
भारतीय सेना के अनुशासित वातावरण ने गुलवीर को अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। सैन्य जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे धीरे-धीरे भारत के प्रमुख लंबी दूरी के धावकों में शामिल हुए और उनके उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन तथा समर्पित सेवा के लिए उन्हें नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नत किया गया।
वरिष्ठ स्तर पर उनकी बड़ी सफलता 2022 में कलिकट में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान आई, जहां उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। यह प्रदर्शन उनके तेज उभार की शुरुआत बना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया।
2023 में उन्होंने बैंकॉक में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उसी वर्ष उन्होंने हांगझोउ एशियाई खेलों में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किया और भारत के अग्रणी दूरी धावक के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया।
विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्होंने 2024 में अपना प्रशिक्षण आधार संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रसिद्ध अमेरिकी कोच स्कॉट सिमंस के मार्गदर्शन में स्थानांतरित किया। इस कदम से उनके खेल में तकनीकी और शारीरिक दोनों स्तरों पर बड़ा सुधार हुआ और वे लगातार शीर्ष अंतरराष्ट्रीय एथलीटों के साथ मुकाबला करते रहे।
इसके बाद उनके प्रदर्शन ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास को नया रूप देना शुरू किया। मार्च 2024 में कैलिफोर्निया में द टेन मीट में उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ का 16 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और 27:41.81 का समय निकालकर पूर्व राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी सुरेंद्र सिंह के मानक को पीछे छोड़ा।
उसी वर्ष जापान में उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर करते हुए 27:14.88 का शानदार समय दर्ज किया। इस प्रदर्शन ने उन्हें एशिया के सर्वकालिक शीर्ष दूरी धावकों में स्थान दिलाया।
2025 का सत्र उनके करियर का सबसे बेहतरीन दौर साबित हुआ। दक्षिण कोरिया के गुमी में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पुरुषों की 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर यादगार दूरी डबल पूरा किया। 5,000 मीटर में उनकी जीत चैंपियनशिप रिकॉर्ड के साथ आई, जिसने एशियाई एथलेटिक्स में उनकी बढ़ती बादशाहत को और स्पष्ट किया।
उन्होंने 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में टोक्यो में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। 5,000 मीटर फाइनल के लिए क्वालीफाई करने से वे केवल 0.19 सेकंड से चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह दिखाया कि वे विश्व के शीर्ष धावकों के साथ बराबरी से मुकाबला कर सकते हैं।
2026 में गुलवीर ने अपने प्रदर्शन की गति जारी रखते हुए एक घंटे से कम समय में हाफ-मैराथन पूरा करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में 59 मिनट 42 सेकंड के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया, जिससे उन्हें वैश्विक पहचान मिली और वे विश्व एथलेटिक्स पुरुषों की 10,000 मीटर रैंकिंग में शीर्ष दस में पहुंच गए।
ग्लासगो में मिला उनका ऐतिहासिक राष्ट्रमंडल खेल रजत पदक वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासित सैन्य जीवन और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है। पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेल पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए नया अध्याय खोला है।
यह उपलब्धि भारतीय सेना और पैंथर डिवीजन की द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जिनकी सैनिकों और खिलाड़ियों को तैयार करने की लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में एक युवा भर्ती से राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता तक का उनका सफर सेना की खेल उत्कृष्टता और सैन्य पेशेवराना अनुशासन को साथ-साथ आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैश्विक एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती मौजूदगी के बीच नायब सूबेदार गुलवीर सिंह की यह उल्लेखनीय उन्नति दृढ़ता, अनुशासित प्रशिक्षण और अटूट संकल्प का प्रमाण है। उनका ऐतिहासिक रजत पदक केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स की एक बड़ी उपलब्धि भी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने वाले अनेक युवा धावकों और सैनिक बनने की आकांक्षा रखने वालों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।