आर्मी सर्विस कॉर्प्स (एएससी) केंद्र एवं कॉलेज ने 29 जुलाई 2026 को टैंक ट्रांसपोर्टर प्रबंधन पाठ्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया। यह एक उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य आर्मी सर्विस कॉर्प्स के अधिकारियों की टैंक ट्रांसपोर्टर इकाइयों के कमान, प्रबंधन और परिचालन उपयोग से जुड़ी पेशेवर क्षमता को बढ़ाना था।
यह पाठ्यक्रम अधिकारियों को भारी सैन्य परिवहन संसाधनों की प्रभावी योजना, तैनाती और प्रबंधन के लिए आवश्यक उन्नत ज्ञान तथा व्यावहारिक कौशल देने पर केंद्रित था। टैंक ट्रांसपोर्टर इकाइयाँ बख़्तरबंद संरचनाओं की तीव्र आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे टैंकों और अन्य भारी युद्धक वाहनों को लंबी दूरी तक सुरक्षित रूप से ले जाया जा सके।
पूरे पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागी अधिकारियों को टैंक ट्रांसपोर्टर इकाइयों के कमान और नियंत्रण, विशेष उपकरणों के तकनीकी प्रबंधन, रसद योजना, परिचालन उपयोग और भारी सैन्य परिवहन से जुड़े प्रशासनिक पक्षों पर व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। पाठ्यक्रम में नेतृत्व क्षमता, निर्णय-निर्माण और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने पर भी जोर रहा, ताकि अधिकारी यंत्रीकृत अभियानों की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
कार्यक्रम में तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ कमान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ जोड़ने के महत्व को रेखांकित किया गया। अधिकारियों को कार्मिक प्रबंधन, विशेष परिवहन मंचों के रखरखाव और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में टैंक ट्रांसपोर्टर बेड़े की परिचालन तत्परता बनाए रखने का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल जेके गेरा, कमांडेंट, एएससी केंद्र एवं कॉलेज ने की। उन्होंने स्नातक अधिकारियों को संबोधित करते हुए पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी और आधुनिक सैन्य अभियानों में रसद तथा गतिशीलता के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे कार्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान और पेशेवर कौशल को अपनी आगामी नियुक्तियों में लागू करें। लेफ्टिनेंट जनरल जेके गेरा ने कहा कि तकनीकी दक्षता, प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन और निरंतर परिचालन तत्परता में उत्कृष्टता भारतीय सेना की युद्ध सहयोग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
कमांडेंट ने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध को ऐसी अत्यधिक उत्तरदायी रसद प्रणालियों की आवश्यकता होती है, जो तेज गति वाले और प्रौद्योगिकी-प्रधान अभियानों का समर्थन कर सकें। उन्होंने जोर दिया कि पेशेवर रूप से प्रशिक्षित रसद अधिकारी युद्धक संरचनाओं को समय पर गतिशीलता सहायता, उपकरण संधारण और परिचालन सहयोग उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल गेरा ने अधिकारियों को निरंतर सीखने और नवाचार की संस्कृति बनाए रखने तथा सैन्य रसद में तकनीकी प्रगति को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की युद्धभूमि की आवश्यकताएँ कुशल परिवहन नेटवर्क, प्रभावी उपकरण प्रबंधन और गतिशील परिचालन वातावरण में काम करने में सक्षम प्रशिक्षित रसद पेशेवरों पर और अधिक निर्भर होंगी।
आर्मी सर्विस कॉर्प्स लंबे समय से भारतीय सेना की रसद रीढ़ के रूप में कार्य कर रहा है। यह परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, ईंधन वितरण, भंडारण तथा विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और परिचालन क्षेत्रों में कर्मियों और उपकरणों की आवाजाही में आवश्यक सहयोग प्रदान करता है।
समापन समारोह के दौरान मेजर निशांत सिंह को पाठ्यक्रम का सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी घोषित किया गया। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन, पेशेवर दक्षता और पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में समग्र श्रेष्ठता के आधार पर दिया गया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को मान्यता मिलना आर्मी सर्विस कॉर्प्स के भीतर पेशेवर उत्कृष्टता, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देता है। ऐसी उपलब्धियाँ ऐसे सक्षम सैन्य नेतृत्व के विकास में योगदान करती हैं, जो बढ़ती परिचालन जिम्मेदारियों को निभाने के लिए तैयार हो।
टैंक ट्रांसपोर्टर प्रबंधन पाठ्यक्रम का सफल समापन इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना विशेष प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य शिक्षा के माध्यम से अपनी रसद क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है।
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और परिवर्तन की प्रक्रिया के साथ, एएससी केंद्र एवं कॉलेज जैसी संस्थाएँ अत्यंत कुशल रसद पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी, जो एकीकृत सैन्य अभियानों को समर्थन दे सकें।