छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के प्रशिक्षु भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी राहुल बंसल, दो स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ, एक शिकायत में नामजद किए गए हैं। आरोप है कि साइबर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच को प्रभावित करने के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई और ली गई। यह मामला इस समय दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत में विचाराधीन है, जिसने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और सीबीआई निदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और न्यायिक जांच के अधीन हैं।
अधिकारी का पृष्ठभूमि विवरण
राहुल बंसल का जन्म 26 जून 1994 को हुआ था और वे मूल रूप से राजस्थान के बताए गए हैं, जिनकी जड़ें करौली क्षेत्र से जुड़ी बताई गई हैं। वे छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनके पास आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी से विद्युत अभियांत्रिकी में बी.टेक और राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री है।
भारतीय पुलिस सेवा में आने से पहले वे कर्मचारी चयन आयोग के जरिए चयन के बाद आयकर निरीक्षक के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने सहायक लेखा अधिकारी के रूप में भी अर्हता प्राप्त की थी। उन्होंने पांचवें प्रयास में गणित वैकल्पिक विषय के साथ सिविल सेवा परीक्षा 2021 में अखिल भारतीय रैंक 377 हासिल की और सरकारी सेवा में रहते हुए यह सफलता पाई। उन्होंने भारतीय वन सेवा परीक्षा भी 251वीं रैंक के साथ पास की। वे 29 अगस्त 2022 को औपचारिक रूप से आईपीएस में शामिल हुए।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली क्षेत्रीय तैनाती छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर में नगर पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई। बताया गया है कि यह तैनाती लगभग अगस्त 2025 से प्रभावी थी। इसी दौरान आरोप सामने आए।
शिकायत और आरोप
हरियाणा निवासी आकाश कुमार की शिकायत के अनुसार, बंसल के साथ सहायक उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने, जो दोनों अंबिकापुर क्षेत्र में साइबर प्रकोष्ठ/रेंज में तैनात थे, साइबर रेंज थाने में दर्ज एक साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपियों के पक्ष में कार्रवाई करने या मामला निपटाने के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की और उसे प्राप्त भी किया।
शिकायत में कहा गया है कि यह रकम एक बार में नहीं दी गई, बल्कि मई 2026 में हवाला के माध्यम से 50-50 लाख रुपये की दो किश्तों में स्थानांतरित की गई। आरोप है कि सहायक उपनिरीक्षक और आरक्षक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
मूल साइबर धोखाधड़ी मामला एक कथित निवेश ठगी से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित को ‘मनी ट्रेड 365’ और ‘स्काई ट्रेड’ नामक अनुप्रयोग डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया गया और शेयर बाजार में कारोबार के जरिए अधिक लाभ के वादे पर 17-18 अलग-अलग बैंक खातों में लगभग 20.15 लाख रुपये 84 किश्तों में जमा कराए गए। आरोप है कि इसी मामले की जांच के दौरान रिश्वत की मांग उठी, ताकि शामिल लोगों को बचाया जा सके या जांच को प्रभावित किया जा सके।
डिजिटल साक्ष्य और अदालत की कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने कथित लेन-देन से संबंधित व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल रिकॉर्डिंग सहित डिजिटल साक्ष्य, सहायक दस्तावेज और एक शपथपत्र भी प्रस्तुत किए हैं।
आकाश कुमार ने पहले 8 जून 2026 को सीबीआई निदेशक को लिखित शिकायत देकर जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। प्राथमिकी दर्ज न होने पर उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू की विशेष सीबीआई अदालत का रुख किया। शिकायत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7ए तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।
इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सुधांशु कौशिक कर रहे हैं। अदालत ने नोटिस जारी कर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और सीबीआई निदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के लिए नोटिस जारी किया गया था, पहले समयसीमा भी तय की गई थी और मामला आगे की सुनवाई के लिए अगस्त 2026 के मध्य के आसपास सूचीबद्ध है। कुछ मामलों में वकीलों के माध्यम से जवाब भी दाखिल किए गए हैं।
सरगुजा में स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामला रेंज कार्यालय स्तर से जुड़ा है और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक टिप्पणी सीमित है। मीडिया संस्थानों द्वारा बंसल या संबंधित पुलिस महानिरीक्षक से प्रतिक्रिया लेने के प्रयासों में अब तक विस्तृत जवाब नहीं मिल पाया है।
पुराना वीडियो फिर चर्चा में
आरोपों के बाद बंसल का सिविल सेवा तैयारी के दिनों का एक पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो भी काफी चर्चा में आ गया है। इस क्लिप में तत्कालीन अभ्यर्थी ने अपने भाई के जन्म प्रमाण पत्र को जल्दी बनवाने के लिए एक पंचायत अधिकारी को कथित रूप से 500 रुपये की रिश्वत देने के बाद बहुत बुरा महसूस करने की बात कही थी। उन्होंने व्यवस्था में कुछ भ्रष्ट तत्वों की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सामान्यीकरण से बचने की भी बात कही थी। मौजूदा 1 करोड़ रुपये के आरोप के साथ इस पुराने बयान के विरोधाभास ने सोशल मीडिया पर खास ध्यान खींचा है।
वर्तमान स्थिति
राहुल बंसल, सहायक उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायत और अदालत के समक्ष रखे गए सहायक सामग्री पर आधारित हैं। किसी भी प्रकार का दोष सिद्ध नहीं हुआ है। विशेष सीबीआई अदालत मामले की जांच कर रही है, जिसमें राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी से मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट भी शामिल है। यह मामला एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी की पहली स्वतंत्र क्षेत्रीय तैनाती और नए आपराधिक प्रक्रिया कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्य तथा निजी शिकायत तंत्र के इस्तेमाल के जरिए साइबर अपराध जांच से जुड़े भ्रष्टाचार आरोपों की पड़ताल को रेखांकित करता है।
आगे की कार्रवाई अदालत में जमा होने वाली रिपोर्टों और उसके बाद दिए जाने वाले किसी भी जांच आदेश पर निर्भर करेगी।