इंफाल/थौबल, 23 अगस्त 2026: मणिपुर में सुरक्षा बलों पर हुए एक चर्चित हमले के लगभग पांच साल बाद असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने 13 नवंबर 2021 की घातक घातक कार्रवाई के एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस हमले में कर्नल विप्लव त्रिपाठी, 46 असम राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर, उनकी पत्नी, उनके छोटे बेटे और चार अन्य कर्मियों की मौत हो गई थी।
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान थियम बायचा सिंह उर्फ बालिन के रूप में हुई है, जिसे एसएस कैप्ट बालिन भी कहा गया है। 28 वर्षीय यह व्यक्ति प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का स्वयंभू कैप्टन बताया गया है। उसे शनिवार रात 22 अगस्त को थौबल जिले के लिलोंग उशोइपोकपी से एक लक्षित, खुफिया-आधारित अभियान के दौरान पकड़ा गया।
गिरफ्तारी का विवरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह अभियान पूर्वी कमान के अधीन, स्पीयर कोर के तहत असम राइफल्स की एक टुकड़ी ने मणिपुर पुलिस के साथ घनिष्ठ समन्वय में चलाया। असम राइफल्स से मिले सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर क्षेत्र में उग्रवादी की मौजूदगी की पुष्टि हुई, हालांकि कुछ रिपोर्टों में शुरुआती निगरानी का संबंध बिश्नुपुर जिले से बताया गया था।
मौके पर पूछताछ में उसकी पहचान की पुष्टि हो गई। उसके सिर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा घोषित 4 लाख रुपये का इनाम था और वह इस हमले से जुड़े राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मामले में तीसरे आरोपी के रूप में सूचीबद्ध था। उसे फरार घोषित किया गया था। बाद में आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए थौबल जिले के लिलोंग पुलिस थाने को सौंप दिया गया।
पुलिस और सुरक्षा बलों के अनुसार आगे की पूछताछ में यह सामने आया कि वह 13 नवंबर 2021 को चुराचांदपुर के बेहियांग में 46 असम राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर और छह अन्य पर हुए हमले में शामिल टीम का हिस्सा था। प्रारंभिक पूछताछ से पीएलए गतिविधियों में उसकी गहरी संलिप्तता भी सामने आई, जिसमें प्रशिक्षण, म्यांमार के एक उग्रवादी शिविर में लंबे समय तक रहना, युद्ध-समान सामग्री की खरीद और हस्तांतरण, तथा अन्य उग्रवादी समूहों से संपर्क बनाए रखना शामिल था।
सेना की पूर्वी कमान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उसे कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनके परिवार के सदस्यों और सुरक्षा बलों पर 2021 के चुराचांदपुर हमले का एक प्रमुख आरोपी बताया। कमान ने कहा कि यह सफल अभियान सुरक्षा बलों के इस संकल्प को दोहराता है कि वे उग्रवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने और मणिपुर में शांति तथा स्थिरता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह गिरफ्तारी पिछले 24 घंटे में थौबल, काकचिंग, तेंगनौपाल, इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम जिलों में हुई व्यापक समन्वित कार्रवाइयों का हिस्सा थी। इनमें मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और अन्य केंद्रीय बलों ने पीएलए/रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट, प्रीपैक, क्युकल और केसीपी जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े आठ उग्रवादियों को पकड़ा। गिरफ्तार लोगों से हथियार, गोला-बारूद, आपत्तिजनक दस्तावेज, चंदा रसीदें, नकदी, मुहरें और प्रतिबंधित समूहों के लेटरहेड बरामद किए गए।
2021 के हमले की पृष्ठभूमि
13 नवंबर 2021 की सुबह 46 असम राइफल्स के काफिले पर चुराचांदपुर जिले में बेहियांग पुलिस थाने के अंतर्गत एस सेखेन गांव के पास घात लगाकर हमला किया गया था। यह स्थान भारत-म्यांमार सीमा के पास टेडिम रोड पर स्थित है।
कर्नल विप्लव त्रिपाठी, जो उस समय कमांडिंग ऑफिसर थे, बेहियांग कंपनी पोस्ट से बटालियन मुख्यालय लौट रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी अनुजा त्रिपाठी और छोटा बेटा था। काफिले में कई वाहन थे, जिनमें अधिकारी और उनके परिवार को ले जा रही एक काली बोलेरो भी शामिल थी।
उग्रवादियों ने पहले एक विस्फोटक उपकरण का उपयोग किया, जिसने अग्रिम वाहन को निशाना बनाया और काफिला रुक गया। इसके बाद पेड़ों की झाड़ियों से घिरे संकरे, करीब 10 फुट चौड़े घुमावदार रास्ते पर भारी स्वचालित फायरिंग की गई, जिसे जांचकर्ताओं और बाद में स्थल का दौरा करने वाले पत्रकारों ने घात लगाकर हमला करने के लिए एक आदर्श स्थान बताया।
इस हमले में सात लोग मारे गए थे। इनमें कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनकी पत्नी, उनका बेटा और चार असम राइफल्स कर्मी शामिल थे—राइफलमैन सुमन स्वर्गियारी, राइफलमैन खतनई कोनाक, राइफलमैन आर.पी. मीणा और राइफलमैन श्यामल दास। कई अन्य लोग, जिनमें त्वरित प्रतिक्रिया दल के सदस्य भी शामिल थे, घायल हुए और खराब मौसम के बीच कठिन परिस्थितियों में उन्हें बाहर निकाला गया।
मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और मणिपुर नगा पीपुल्स फ्रंट ने संयुक्त रूप से इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उनके कार्यकर्ताओं को यह जानकारी नहीं थी कि कमांडिंग ऑफिसर का परिवार काफिले में साथ था और उन्होंने अशांत क्षेत्र में परिवारों की मौजूदगी की आलोचना की थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए इसे भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज किया था। जनवरी 2022 में एजेंसी ने हमले में शामिल पीएलए और एमएनपीएफ के दस आरोपियों पर 4 लाख से 8 लाख रुपये तक के नकद इनाम घोषित किए थे। बालिन भी उनमें शामिल था और उस पर 4 लाख रुपये का इनाम था।
वर्षों के दौरान इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मई 2025 में थौबल जिले से सगोलशेम सनातोम्बा सिंह, जो एक सक्रिय पीएलए कार्यकर्ता और राष्ट्रीय जांच एजेंसी की वांछित सूची में प्रमुख आरोपियों में से एक था, तथा पहले पकड़े गए एमएनपीएफ कार्यकर्ता मचुकिंग जामशिम शिमराय और सोलोमन जमिर शामिल हैं। बालिन की ताजा गिरफ्तारी उस विशेष रूप से क्रूर हमले के दोषियों तक पहुंचने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें जानबूझकर न केवल सुरक्षा कर्मियों बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी निशाना बनाया गया था।
व्यापक संदर्भ और असर
2021 की यह घातक कार्रवाई हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर में असम राइफल्स और सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बनी हुई है। इसमें एक सेवारत कमांडिंग ऑफिसर के साथ उनकी पत्नी और बच्चे की भी जान गई थी। इसने म्यांमार में सीमा पार संपर्क रखने वाले घाटी-आधारित उग्रवादी समूहों से बने लगातार खतरे को उजागर किया, जबकि 2023 के बाद से जातीय तनाव और अन्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच मणिपुर में हिंसा के स्तर में उतार-चढ़ाव बना रहा है।
सुरक्षा बल पीएलए, प्रीपैक, क्युकल और अन्य समूहों के खिलाफ भर्ती, वसूली, हथियार जुटाने और हमलों में उनकी भूमिका को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं। इस मामले में असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के बीच सफल संयुक्त कार्रवाई यह दर्शाती है कि जटिल परिचालन वातावरण में खुफिया-आधारित और समन्वित प्रयास कितने महत्वपूर्ण हैं।
आरोपी की म्यांमार में कथित प्रशिक्षण और रसद संबंधी भूमिका सीमा पार उग्रवादी ढांचे से जुड़ी निरंतर चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है। जांच जारी है और बालिन से पूछताछ में 2021 के हमले तथा वर्तमान पीएलए गतिविधियों से जुड़े शेष फरार आरोपियों और व्यापक नेटवर्क के बारे में और सुराग मिलने की उम्मीद है।
यह गिरफ्तारी इस संदेश को और मजबूत करती है कि सुरक्षा बलों और उनके परिवारों पर हमले में शामिल लोगों का पीछा समय बीत जाने के बावजूद लगातार किया जाएगा।