राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में बड़ी सादड़ी पुलिस ने रविवार को एक व्यक्ति को कथित रूप से भारतीय सेना की प्रतिष्ठित राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट का सैनिक बनकर सोशल मीडिया मंचों पर वर्दी में अपनी तस्वीरें, वीडियो और रीलें प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान खारदेवला निवासी भारत सिंह, पुत्र रामसिंह राजपूत, के रूप में हुई है। चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुणे की सैन्य खुफिया इकाई ने 21 अगस्त को बड़ी सादड़ी पुलिस को उसकी कथित गतिविधियों के बारे में सूचना दी थी।
सूचना के अनुसार भारत सिंह ने राजपूताना राइफल्स का सदस्य बताने के लिए फर्जी सोशल मीडिया खाते बनाए थे और वर्दी पहनकर बल से संबंधित सामग्री लगातार पोस्ट कर रहा था। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह की निगरानी में और बड़ी सादड़ी थानाधिकारी भगवानलाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस ने भारत सिंह को हिरासत में लेकर उसके पास से दो एंड्रॉइड फोन जब्त किए। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर सक्रिय खाते मिले। इनमें उसकी भारतीय सेना की वर्दी में तस्वीर को प्रोफाइल फोटो के रूप में लगाया गया था, साथ ही वर्दी में वीडियो और रीलें भी मौजूद थीं।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारत सिंह भारतीय सेना का न तो सदस्य है और न ही कभी रहा है। आरोप है कि वह केवल सोशल मीडिया पर प्रसार के लिए वर्दी में सामग्री बना और फैला रहा था। चित्तौड़गढ़ पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स खाते पर भी इस गिरफ्तारी की जानकारी साझा की और बताया कि आरोपी खुद को राजपूताना राइफल्स का जवान बताकर खाते चला रहा था।
उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 168 भी शामिल हो सकती है, जिसके तहत कोई भी ऐसा व्यक्ति जो सेना, नौसेना या वायु सेना का सैनिक, नाविक या वायुसैनिक नहीं है, लेकिन यह दिखाने के इरादे से उनके जैसी वेशभूषा या चिह्न धारण करता है कि वह सशस्त्र बलों का सदस्य है, दंडनीय माना जाता है। इस प्रावधान के तहत तीन महीने तक का कारावास, दो हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
पुलिस ने यह भी बताया कि भारत सिंह के खिलाफ पहले से एक अन्य आपराधिक मामला दर्ज है, जिसमें अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। अब उसके सोशल मीडिया गतिविधियों के पूरे दायरे, वर्दी की प्राप्ति के स्रोत, संभावित वित्तीय उद्देश्य और यह सामग्री केवल ऑनलाइन ध्यान पाने के लिए थी या किसी अन्य मकसद से, इसकी जांच की जा रही है।
राजपूताना राइफल्स का परिचय
जिस रेजिमेंट से आरोपी ने कथित रूप से जुड़ाव जताया, वह भारतीय सेना की सबसे पुरानी पैदल सेना संरचनाओं में शामिल है। राजपूताना राइफल्स की शुरुआत 1775 में ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत उठाई गई इकाइयों से मानी जाती है।
यह रेजिमेंट बाद में 1920 के दशक की शुरुआत में 6वीं राजपूताना राइफल्स के रूप में पुनर्गठित की गई थी, जबकि बाद में इसका संख्यात्मक नाम हट गया। इसमें मुख्य रूप से राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों से भर्ती होती है और इसका युद्ध घोष “राजा रामचंद्र की जय” है।
इस रेजिमेंट का शौर्य रिकॉर्ड भी व्यापक रहा है। इसके युद्ध सम्मान कई युद्धों और अभियानों में फैले हुए हैं, जिनमें विश्व युद्ध, 1947-48 जम्मू-कश्मीर अभियान, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा कारगिल संघर्ष शामिल हैं। इसके सैनिकों को परम वीर चक्र, कई महा वीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र और अन्य कई पुरस्कार मिले हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ता चलन
यह घटना देश में हाल के वर्षों में देखे जा रहे उस व्यापक चलन का हिस्सा है, जिसमें कुछ लोग इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और इसी तरह के मंचों के लिए सैन्य या पुलिस वर्दी पहनकर सामग्री बनाते हैं। कुछ मामलों में यह केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने की कोशिश होती है, जबकि कुछ मामलों में यह धोखाधड़ी, प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश या सुरक्षा से जुड़ी चिंता तक पहुंच जाता है।
अधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि सेना की वर्दी कोई पोशाक नहीं है। बिना अनुमति के इसका उपयोग या प्रदर्शन, विशेषकर सेवा का दावा जोड़कर, कानूनी कार्रवाई को आकर्षित करता है। इस मामले में सैन्य खुफिया इकाई की समय रहते मिली सूचना और स्थानीय पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने सशस्त्र बलों की पहचान की गरिमा की रक्षा में समन्वय को भी दिखाया है।
ताजा जानकारी के अनुसार भारत सिंह अभी हिरासत में है और उसे स्थानीय अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। जांचकर्ता उसके खातों के डिजिटल रिकॉर्ड, रीलों में इस्तेमाल की गई वर्दी के स्रोत और उससे जुड़ी अन्य गतिविधियों की जांच कर रहे हैं। यह मामला यह भी दिखाता है कि सैन्य वर्दी से जुड़ी सोशल मीडिया प्रवृत्तियां, जब जानबूझकर सेवारत या पूर्व सैनिकों की नकल में बदल जाती हैं, तो वे आपराधिक दायरे में आ सकती हैं।