भारत वर्तमान में अपने शीर्ष नौकरशाही सेवाओं में गंभीर कमी का सामना कर रहा है, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 1,300 से अधिक और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की 505 पद खाली पड़े हैं। इस खुलासे ने देशभर में प्रशासनिक दक्षता और आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन के बारे में चिंता बढ़ा दी है।
मंत्रालय का बयान
यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (व्यक्तिगत, सार्वजनिक शिकायतें और पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में साझा की। आंकड़ों के अनुसार, 6,877 IAS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले, केवल 5,577 वर्तमान में पद पर हैं, जिससे लगभग 19 प्रतिशत की पद रिक्तता दर उत्पन्न हो रही है। उसी प्रकार, IPS में 5,099 की अधिकृत संख्या के खिलाफ 4,594 अधिकारी कार्यरत हैं, जिससे लगभग 9.9 प्रतिशत पद खाली रह गए हैं।
पदों की कुल रिक्तता
ये आंकड़े फरवरी 2026 में राज्या सभा में प्रस्तुत पूर्व के आंकड़ों के अनुरूप हैं, जिसमें ऑल इंडिया सेवाओं के तहत भारतीय वन सेवा (IFoS) सहित कुल 2,834 पदों की रिक्तता की सूचना दी गई थी। IFoS को सबसे अधिक कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें 1,000 से अधिक पद खाली हैं, जो इसकी स्वीकृत संख्या का लगभग एक-तिहाई है।
भर्ती की प्रक्रिया
इन सेवाओं के लिए भर्ती союз लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से की जाती है। सरकार ने 2012 से IAS में वार्षिक लगभग 180 उम्मीदवारों का चयन करना जारी रखा है, जिसमें मानक विकलांगता के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। 2026 के लिए, विभिन्न सेवाओं में लगभग 933 पदों की घोषणा की गई है, जिसमें IAS के लिए लगभग 180 और IPS के लिए 150 से 200 पद शामिल हैं, जो कि पिछली रिक्तियों को भरने के प्रयास का हिस्सा हैं।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पदों को भरने की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से धीमी है, जैसे कि सेवानिवृत्ति, राज्यों के बीच कैडर असंतुलन, और लंबी परीक्षा व प्रशिक्षण प्रक्रिया। विशेष रूप से पुराने बैचों से होने वाली सेवानिवृत्तियों की संख्या में लगातार वृद्धि ने स्वीकृत और वास्तविक संख्या के बीच के अंतर को और बढ़ा दिया है।
IAS अधिकारियों की कमी, जो जिला प्रशासन, नीति निर्धारण, और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, छोटे और पूर्वोत्तर राज्यों में शासन पर अतिरिक्त दबाव डालने की उम्मीद है। इसी प्रकार, IPS अधिकारियों की कमी से कानून-व्यवस्था प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी अभियानों में नेतृत्व पर प्रभाव पड़ सकता है, खासकर बड़े राज्यों में जहां कैडर की अधिक आवश्यकता होती है।
संसदीय समितियों की सिफारिशें
संसदीय समितियों ने भी इस मुद्दे को उजागर किया है, और जल्दी कैडर समीक्षा, कठिन पदों के लिए बेहतर प्रोत्साहन, और वार्षिक भर्ती में संभावित वृद्धि जैसे उपायों की सिफारिश की है ताकि संरचनात्मक कमी को दूर किया जा सके। जबकि सरकार ने बढ़ती प्रशासनिक मांगों को पूरा करने के लिए समय के साथ स्वीकृत संख्या बढ़ाई है, इन पदों को भरना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
भविष्य की उम्मीदें
अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति का निरंतर अवलोकन किया जा रहा है और सिविल सेवा परीक्षा से आने वाले बैचों से धीरे-धीरे इस अंतर को पाटा जाएगा। जैसे-जैसे शासन पर मांगें बढ़ती हैं, ये रिक्तियों को भरना भारत के प्रशासनिक और आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।