महानिदेशालय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं ने सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ), नई दिल्ली की रोगविज्ञानी कर्नल शिवानी सांगवान को लद्दाख में 10 से 11 सितंबर 2026 के बीच आयोजित सिल्क रूट अल्ट्रा मैराथन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने पर बधाई दी है।
कर्नल सांगवान ने यह कठिन अल्ट्रा मैराथन 21 घंटे, 44 मिनट और 8 सेकंड में पूरी की। उन्होंने लगभग 2,700 मीटर की ऊंचाई वृद्धि वाले इस चुनौतीपूर्ण मार्ग को पार किया और महिला प्रतिभागियों में नौवां स्थान हासिल किया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि वे इस कठिन प्रतियोगिता की फिनिश लाइन पार करने वाली सशस्त्र बलों की पहली महिला अधिकारी बनीं। यह उपलब्धि सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, जो अपने पेशेवर दायित्वों के साथ-साथ कठिन सहनशक्ति और साहसिक गतिविधियों में भी हिस्सा ले रही हैं।
लद्दाख के उच्च हिमालयी वातावरण में आयोजित इस अल्ट्रा मैराथन को पूरा करना आसान नहीं था। लंबी दूरी की दौड़ के साथ ऊंचाई के दबाव को झेलते हुए इसे समाप्त करना शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और निरंतर संकल्प की मांग करता है।
सेना अस्पताल (आर एंड आर) में रोगविज्ञानी के रूप में कर्नल सांगवान की भूमिका उन्हें सशस्त्र बलों की चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा बनाती है, जहां चिकित्सा अधिकारी सेवा कर रहे कर्मियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतों में योगदान देते हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि सैन्य चिकित्सा कर्मी अपनी विशेष पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ कठिन शारीरिक चुनौतियों को भी स्वीकार कर सकते हैं।
महानिदेशालय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं द्वारा उनकी उपलब्धि को सराहा जाना इस बात को भी रेखांकित करता है कि सशस्त्र बलों में फिटनेस, सहनशीलता और उत्कृष्टता को विशेष महत्व दिया जाता है। सहनशक्ति और साहसिक आयोजनों में भागीदारी लंबे समय तक एकाग्रता, मानसिक मजबूती, संकल्प और लगातार शारीरिक दबाव के बीच आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करने में सहायक मानी जाती है।
21 घंटे, 44 मिनट और 8 सेकंड में इस प्रतियोगिता को पूरा करना केवल खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में से एक में सहनशक्ति का प्रदर्शन भी था। लंबे समय तक शारीरिक परिश्रम और बड़ी ऊंचाई की वृद्धि के कारण यह उपलब्धि विशेष रूप से कठिन मानी गई।
महिलाओं में नौवां स्थान हासिल करने के साथ-साथ सशस्त्र बलों की पहली महिला अधिकारी के रूप में फिनिश लाइन पार करना इस उपलब्धि को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की अल्ट्रा सहनशक्ति प्रतियोगिताओं में भागीदारी का एक उल्लेखनीय पड़ाव है।
कर्नल शिवानी सांगवान की यह उपलब्धि सशस्त्र बलों के व्यापक विकास को भी दर्शाती है, जहां पेशेवर उत्कृष्टता के साथ-साथ खेल, साहसिक और सहनशक्ति गतिविधियों में भागीदारी को भी महत्व दिया जा रहा है। ऐसे प्रयास अनुशासन और समर्पण के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए शारीरिक और मानसिक सीमाओं को आगे बढ़ाने की संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं।
महानिदेशालय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं की ओर से उनकी उपलब्धि की सराहना केवल सिल्क रूट अल्ट्रा मैराथन के परिणाम के लिए नहीं, बल्कि इस कठिन चुनौती को पूरा करने में दिखाई गई दृढ़ता और संकल्प के लिए भी है। उनकी यह सफलता सैन्य सेवा से जुड़ी सहनशीलता, साहस और उत्कृष्टता की भावना का उदाहरण मानी जा रही है।
लद्दाख में उनका सफल समापन सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और देश भर में उच्च सहनशक्ति वाले खेलों और साहसिक चुनौतियों में सैन्य कर्मियों की बढ़ती भागीदारी के रिकॉर्ड में एक और उपलब्धि जोड़ता है।