लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, केंद्रीय कमान, ने बरेली छावनी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर भारत के अंतर्गत आने वाली संरचनाओं और इकाइयों के अधिकारियों को संबोधित किया तथा जाट रेजिमेंटल केंद्र में सभी रैंकों के कर्मियों से बातचीत की।
अधिकारियों के साथ बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अपने अभियानगत अनुभव से जुड़े विचार साझा किए और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने ड्रोन युद्ध, साइबर अभियानों, प्रौद्योगिकी आत्मसात करने, सुदृढ़ रसद और अग्निवीरों के केंद्रित प्रशिक्षण के बढ़ते महत्व की ओर ध्यान दिलाया।
सेना कमांडर ने इस बात पर बल दिया कि युद्ध की प्रकृति में आ रहे बदलावों के प्रति सतर्क और त्वरित प्रतिक्रिया बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उभरती अभियानगत आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमताओं का विकास किया जाना चाहिए।
जाट रेजिमेंटल केंद्र में उन्होंने अग्निवीरों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की समीक्षा भी की। यह प्रशिक्षण कठोर बताया गया, जिसका उद्देश्य उन्हें सैनिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है।
यहाँ उन्होंने प्रशिक्षक दल से भी बातचीत की और प्रशिक्षण में उच्च मानक बनाए रखने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने अनुशासित, दक्ष और युद्ध के लिए तैयार सैनिक तैयार करने में उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
बरेली छावनी की यह यात्रा अभियानगत अनुभव, संरचनाओं और इकाइयों के साथ संवाद तथा जाट रेजिमेंटल केंद्र में प्रशिक्षण समीक्षा का संगम रही। इसमें युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन युद्ध, साइबर अभियान, प्रौद्योगिकी आत्मसात करने, सुदृढ़ रसद तथा केंद्रित प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया।
यात्रा के दौरान तैयारियों और व्यावसायिक दक्षता पर भी जोर रहा। जाट रेजिमेंटल केंद्र में मुख्य ध्यान कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से अनुशासित, दक्ष और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों के निर्माण पर केंद्रित रहा।