लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, उप सेना प्रमुख, ने कोरवा स्थित इंडो-रूसी राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का दौरा कर एके-203 असॉल्ट राइफल के 100 प्रतिशत स्वदेशी उत्पादन की दिशा में उसकी क्षमताओं का आकलन किया। यह दौरा निर्माण तंत्र, उत्पादन क्षमता और इकाई में अपनाई जा रही स्वदेशी प्रक्रियाओं पर केंद्रित रहा।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को आईआरआरपीएल के निर्माण तंत्र और उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी दी गई। इस जानकारी में एके-203 असॉल्ट राइफल के उत्पादन से जुड़ी इकाई की क्षमताओं और पूर्ण स्वदेशी उत्पादन की दिशा में चल रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया।
उप सेना प्रमुख ने इसके बाद कोरवा स्थित उत्पादन सुविधाओं का निरीक्षण किया और स्वदेशी निर्माण प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इस अवसर पर उत्पादन अवसंरचना और एके-203 असॉल्ट राइफल के लिए स्वदेशी निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का आकलन किया गया।
100 प्रतिशत स्वदेशी उत्पादन पर दिया जा रहा जोर घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करने की प्राथमिकता को दर्शाता है। आईआरआरपीएल में निर्माण तंत्र को एके-203 असॉल्ट राइफल के स्वदेशी उत्पादन के समर्थन के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के लिए आईआरआरपीएल टीम की पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता की सराहना की। उत्पादन सुविधाओं के साथ उनकी बातचीत और समीक्षा ने स्वदेशी निर्माण क्षमताओं को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।
यह दौरा भारतीय सेना के स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने, क्षमता विकास और अधिक आत्मनिर्भरता पर दिए जा रहे ध्यान को भी सामने लाता है। सेना ने आत्मनिर्भरता और क्षमता विकास को जय से विजय का एक प्रमुख स्तंभ माना है, जिसमें स्वदेशी रक्षा उत्पादन इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आईआरआरपीएल में स्वदेशी निर्माण पर दिया जा रहा ध्यान घरेलू रक्षा उत्पादन तंत्र को मजबूत करने और भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता तथा संचालनगत तत्परता के व्यापक उद्देश्य को समर्थन देने के लिए है। उप सेना प्रमुख का यह दौरा इन क्षमताओं और स्वदेशी निर्माण प्रक्रियाओं की प्रगति की समीक्षा का अवसर बना।
इस दौरे ने एके-203 असॉल्ट राइफल के 100 प्रतिशत स्वदेशी उत्पादन की दिशा में चल रहे प्रयासों तथा आत्मनिर्भरता, क्षमता विकास और संचालनगत तत्परता को आगे बढ़ाने में घरेलू निर्माण क्षमताओं की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया।