मेजर जनरल एम. ए. शेख, एसएम, चीफ ऑफ स्टाफ, सुदर्शन चक्र कोर ने 26 सितंबर, 2026 को सिकंदराबाद स्थित मिलिटरी कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई) का दौरा किया।
दौरे के दौरान मेजर जनरल एम. ए. शेख ने एमसीईएमई के विभिन्न संकायों, उत्कृष्टता केंद्रों और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। इस यात्रा से उन्हें संस्थान की उन्नत प्रशिक्षण पद्धतियों, स्वदेशी क्षमता विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग की जानकारी मिली।
अपने भ्रमण में उन्होंने ड्रोनालय, यंत्रालय और रचनालय सहित एमसीईएमई की कई सुविधाओं का दौरा किया। इन क्षेत्रों में ड्रोन, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, योजक विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों से जुड़े कार्यों की जानकारी भी उन्हें दी गई।
दौरे के दौरान प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों में ड्रोन, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, योजक विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत संचार प्रौद्योगिकियाँ शामिल थीं। संस्थान के उत्कृष्टता केंद्रों और प्रयोगशालाओं ने प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और स्वदेशी क्षमता विकास की गतिविधियों का परिचय कराया।
इस यात्रा में एमसीईएमई के तकनीकी उत्कृष्टता, नवाचार और सैन्य क्षमता विकास के केंद्र के रूप में निरंतर रूपांतरण को भी रेखांकित किया गया। इसके संकाय, उत्कृष्टता केंद्र और प्रयोगशालाएँ उन्नत प्रशिक्षण पद्धतियों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर केंद्रित हैं।
मेजर जनरल एम. ए. शेख ने दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल नीरज वरशनेय, एवीएसएम, वीएसएम, कमांडेंट एमसीईएमई और कर्नल कमांडेंट, कोर ऑफ ईएमई से भी मुलाकात की।
बातचीत के दौरान उन्होंने तकनीकी रूप से दक्ष सैन्य नेताओं को तैयार करने के लिए एमसीईएमई की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने नवाचार, अनुसंधान और उन्नत व्यावसायिक सैन्य शिक्षा के माध्यम से भारतीय सेना की संचालनात्मक तत्परता बढ़ाने के संस्थान के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
दौरे में एमसीईएमई की स्वदेशी क्षमताओं के विकास और उन्नत व्यावसायिक सैन्य शिक्षा प्रदान करने में भूमिका को भी रेखांकित किया गया। इसके उत्कृष्टता केंद्र और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण और क्षमता विकास में सहायक हैं।
यह यात्रा इन क्षेत्रों की समीक्षा और एमसीईएमई के नेतृत्व से संवाद का अवसर बनी। अंत में संस्थान के नवाचार, अनुसंधान, स्वदेशी क्षमता विकास और उन्नत व्यावसायिक सैन्य शिक्षा के प्रयासों की सराहना की गई, जिसका उद्देश्य भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और संचालनात्मक तत्परता को मजबूत करना है।