एयर मार्शल तेजपाल सिंह, उप वायुसेना प्रमुख, ने भारतीय वायु सेना में नए हथियारों और तकनीकों को तेज़ी से शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई नया हथियार पाँच या सात वर्ष की एकीकरण प्रक्रिया में नहीं फँसना चाहिए और सॉफ्टवेयर तथा एल्गोरिदम को विकास से नियंत्रित परिचालन प्रयोग तक अधिक तेज़ी से पहुँचना चाहिए।
एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में अपने विशेष संबोधन ‘फिफ्थ जेनरेशन एंड बियॉन्ड’ के दौरान एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना को तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करते हुए साथ ही पाँचवीं पीढ़ी और उससे आगे के युद्धक्षेत्र की क्षमताओं के लिए आवश्यक ढाँचा भी तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि तत्काल कार्य यह समझना है कि कौन-सी क्षमताएँ पहले से उपलब्ध हैं, किन चीज़ों की तुरंत आवश्यकता है और साथ-साथ भविष्य के लिए ढाँचा कैसे खड़ा किया जाए। उनके अनुसार, आज उपलब्ध क्षमता पर रुककर यह इंतज़ार नहीं किया जा सकता कि 20 साल बाद कोई आदर्श भविष्य सामने आए।
एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने कहा कि एक पीढ़ी के विमान से दूसरी पीढ़ी में तुरंत जाना संभव नहीं हो सकता, लेकिन युद्धक ढाँचे में पीढ़ीगत परिवर्तन की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने स्वायत्तता, वितरित संवेदन, मजबूत संचार व्यवस्था और खुले मिशन प्रणालियों को ऐसे क्षेत्र बताया जिन्हें पाँचवीं पीढ़ी के विमानों के आने से पहले विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की भारतीय वायु सेना अनिवार्य रूप से पाँचवीं पीढ़ी की शक्ति होगी। इसलिए ज़ोर ऐसी संरचना और क्षमताएँ बनाने पर होना चाहिए जो भविष्य की लड़ाई की आवश्यकताओं को सहारा दे सकें।
उप वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि तकनीकी समानता लक्ष्य नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार लक्ष्य यह होना चाहिए कि तकनीकी विविधता के बावजूद परिचालन में एकरूपता बनी रहे। उन्होंने कहा कि तात्कालिकता और परिवर्तन को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि हर मंच का पाँचवीं पीढ़ी का होना ज़रूरी नहीं है। वायु सेना, उसके कर्मियों और उद्योग को भविष्य के अनुरूप बनना होगा। उन्होंने कहा कि वायु योद्धाओं को किसी एक विशेष प्रणाली या विमान के लिए ही तैयार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रौद्योगिकी, आँकड़ों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संयुक्त अभियानों की समझ भी होनी चाहिए।
एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने संचालकों और उपयोगकर्ताओं तथा उद्योग के बीच संबंधों में बदलाव की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि संचालक, डिज़ाइनर, सॉफ्टवेयर अभियंता, परीक्षण संस्थान और निर्माता पूरे जीवनचक्र में अधिक निकटता से काम करें।
उन्होंने कहा कि हर प्रयोग को खरीद प्रक्रिया में बदलने की ज़रूरत नहीं होती। प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि किसी विचार का परीक्षण किया जाए, यदि वह काम न करे तो उसमें संशोधन किया जाए और फिर दोबारा परीक्षण किया जाए। उन्होंने विफलता को अनुकूलनशील युद्धक प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
एयर मार्शल ने नए प्रौद्योगिकीय तंत्रों को परिचालन प्रणालियों में जोड़ने में लगने वाले समय को कम करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि नया हथियार पाँच या सात वर्ष की एकीकरण प्रक्रिया नहीं बनना चाहिए, सॉफ्टवेयर अद्यतन नौ महीने के उन्नयन का इंतज़ार नहीं करे और नया एल्गोरिदम प्रयोगशाला से नियंत्रित परिचालन प्रयोग तक तेज़ी से पहुँच सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सफल प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसे बनाया जा सके और बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। उनके संबोधन का केंद्र भारतीय वायु सेना की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करते हुए पाँचवीं पीढ़ी और उससे आगे की क्षमताओं की ओर संक्रमण था।
एनडीटीवी डिफेंस समिट में दिए गए इस संबोधन में उन्होंने विभिन्न पीढ़ियों के मंचों और तकनीकों को एक साथ जोड़ने में सक्षम युद्धक ढाँचा विकसित करने पर बल दिया। इस संक्रमण के हिस्से के रूप में स्वायत्तता, वितरित संवेदन, मजबूत संचार व्यवस्था और खुले मिशन प्रणालियों को महत्वपूर्ण क्षमता बताया गया।
साथ ही उन्होंने पूरे जीवनचक्र में संचालकों, डिज़ाइनरों, सॉफ्टवेयर अभियंताओं, परीक्षण संस्थानों और निर्माताओं के बीच तेज़ और घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि हथियारों, सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम को विकास तथा प्रयोगशाला से नियंत्रित परिचालन प्रयोग तक अधिक तेज़ी से पहुँचना चाहिए।
उनके अनुसार ‘फिफ्थ जेनरेशन एंड बियॉन्ड’ विषयक यह संबोधन तत्काल परिचालन आवश्यकताओं और भविष्य के युद्धक ढाँचे के विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने पर केंद्रित था। इसमें कर्मियों और उद्योग को उस युद्धक्षेत्र के लिए तैयार करने की बात भी शामिल थी, जो प्रौद्योगिकी, आँकड़ों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से लगातार अधिक प्रभावित होता जा रहा है।
एयर मार्शल तेजपाल सिंह की टिप्पणियों ने इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय वायु सेना को अपनी मंच-व्यवस्था, कर्मियों और युद्ध प्रणालियों में भविष्य के अनुरूपता विकसित करनी होगी, जबकि तकनीकी विविधता के बावजूद परिचालन एकरूपता बनाए रखनी होगी।