भारतीय सेना के तीन इंजीनियरों — लेफ्टिनेंट कर्नल सत्यदेव सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल रंजीत ए मेनन और लेफ्टिनेंट कर्नल एचवी भल्ला — को तेलंगाना राज्य सरकार की सेवा में प्रतिनियुक्त किया गया है। ये अधिकारी सिंचाई विभाग के साथ श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग तथा मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला बैराज की मरम्मत और पुनर्वास कार्यों में काम करेंगे।
प्रतिनियुक्ति व्यवस्था के तहत इन तीनों अधिकारियों में से एक एसएलबीसी सुरंग के दो खुदाई मोर्चों पर संचालन की निगरानी करेगा। इसमें सुरंग के भीतर खुदाई के मुखों के पास होने वाले काम की देखरेख भी शामिल होगी। बाकी दो अधिकारियों को मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला बैराज की मरम्मत और पुनर्वास से जुड़े कार्य सौंपे जाएंगे।
राज्य सरकार ने एसएलबीसी सुरंग परियोजना और कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना के तीन बैराजों के पुनर्वास के क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की इंजीनियर्स कोर के अतिरिक्त अधिकारियों को शामिल करने का निर्णय लिया है।
यह प्रतिनियुक्ति 27 जून, 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी द्वारा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दिए गए अनुरोध के बाद हुई। इसके बाद सैन्य सचिव मनवेंद्र सिंह ने तेलंगाना में सिंचाई संबंधी कार्यों के लिए तीन सेना अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए।
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने भी दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास पर थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ से मुलाकात कर राज्य के लिए अनुभवी सेना इंजीनियरों की प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया था। इस बैठक में उन्होंने एसएलबीसी सुरंग की तकनीकी जटिलता और महत्व के साथ-साथ तीनों कलेश्वरम बैराजों की मरम्मत और पुनर्वास की जरूरतों को भी बताया।
बैठक के बाद सेना मुख्यालय ने विचार के लिए तीनों अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को भेजे, जिसके बाद उन्हें सिंचाई कार्यों के लिए प्रतिनियुक्त किया गया।
एसएलबीसी सुरंग तेलंगाना के सिंचाई कार्यों का एक प्रमुख हिस्सा है। परियोजना की सुरंग-1 43.93 किलोमीटर लंबी है, जो श्रीशैलम जलाशय के बाएं तट से शुरू होती है। तेलंगाना सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लगभग 44 किलोमीटर लंबी इस सुरंग में करीब 35 किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
राज्य सरकार ने एसएलबीसी सुरंग के शेष कार्य को पूरा करने के लिए जून 2028 की समयसीमा तय की है। चल रहे क्रियान्वयन में उन्नत भू-भौतिकीय जांच, सुदृढ़ वेंटिलेशन और सुरक्षा प्रणालियां, निरंतर अभिलेखन और क्षेत्रीय स्तर की निगरानी शामिल है।
नव-प्रतिनियुक्त सेना इंजीनियरों में से एक विशेष रूप से सुरंग के दो खुदाई मोर्चों पर संचालन की निगरानी करेगा। इसमें खुदाई के मुखों के पास सुरंग के भीतर होने वाली गतिविधियां भी शामिल होंगी। यह जिम्मेदारी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण बचे हुए हिस्सों के काम में अतिरिक्त इंजीनियरिंग निगरानी देने के लिए दी गई है।
इन तीनों अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति तेलंगाना सरकार के उस अनुभव से भी जुड़ी है, जिसमें कर्नल परिक्षित मेहरा पिछले लगभग दो वर्षों से राज्य में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। कर्नल मेहरा एसएलबीसी सुरंग के साथ-साथ मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला के मरम्मत एवं पुनर्वास नियोजन से भी जुड़े रहे हैं।
सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी के अनुसार, कर्नल मेहरा का तकनीकी ज्ञान, क्षेत्रीय स्तर पर सहभागिता और जटिल संचालन के समन्वय की क्षमता सिंचाई विभाग के लिए उपयोगी रही है। इसके बाद राज्य सरकार ने अतिरिक्त अनुभवी सेना इंजीनियरों की प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया।
सरकार तीनों कलेश्वरम बैराजों के पुनर्वास कार्य को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ा रही है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा सुझाई गई मिट्टी, कंक्रीट और नींव की जांचें लगभग पूरी हो चुकी हैं। आईआईटी बॉम्बे और एएफआरवाई इंडिया इन निष्कर्षों की समीक्षा कर रहे हैं और बैराजों पर आवश्यक संरचनात्मक हस्तक्षेप के लिए अंतिम डिजाइन तैयार कर रहे हैं।
इस तरह तीनों सेना इंजीनियर दो बड़े कार्यक्षेत्रों में तैनात रहेंगे — एसएलबीसी सुरंग की खुदाई गतिविधियों की निगरानी और मेडीगड्डा, अन्नाराम तथा सुंदिल्ला से जुड़े मरम्मत एवं पुनर्वास कार्य।
तेलंगाना सरकार ने कहा है कि उसका लक्ष्य एसएलबीसी सुरंग को तय समयसीमा के भीतर पूरा करना और तीनों कलेश्वरम बैराजों को सुरक्षित तथा कार्यक्षम स्थिति में बहाल करना है। साथ ही राज्य ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्य की गति श्रमिकों की सुरक्षा, इंजीनियरिंग मानकों या संरचनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता की कीमत पर नहीं बढ़ाई जाएगी।
अतिरिक्त सेना इंजीनियरों की मांग का निर्णय कर्नल परिक्षित मेहरा के साथ राज्य के अनुभव से भी प्रभावित रहा। सरकार का कहना है कि उनके योगदान ने यह भरोसा मजबूत किया कि अनुभवी सैन्य इंजीनियर तकनीकी रूप से जटिल ढांचागत परियोजनाओं में विशेष विशेषज्ञता दे सकते हैं।
इस प्रतिनियुक्ति के माध्यम से सेना की इंजीनियर्स कोर की पेशेवर विशेषज्ञता तेलंगाना में चल रहे सिंचाई और ढांचागत कार्यों से जुड़ गई है। अब ये तीनों अधिकारी सुरंग खुदाई की निगरानी से लेकर प्रमुख सिंचाई संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्वास तक, विभिन्न क्षेत्रों में राज्य सरकार की मदद करेंगे।
यह कदम तेलंगाना सरकार और भारतीय सेना के बीच जटिल ढांचागत कार्यों के लिए विशेष इंजीनियरिंग विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के संस्थागत सहयोग को भी दर्शाता है। नव-प्रतिनियुक्त अधिकारी अब एसएलबीसी और कलेश्वरम से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन और निगरानी में योगदान देंगे।