सिकंदराबाद छावनी के बोलारम स्थित मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से हथियार और गोला-बारूद की चोरी की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब चार सेवारत सेना कर्मियों की संदिग्ध भूमिका की जांच कर रही है, क्योंकि मुख्य आरोपी ने दावा किया है कि उसने चोरी से पहले उनसे परिचालन संबंधी जानकारी हासिल की थी।
पूर्व हवलदार उप्पुथोल्ला मल्लेश, 37, जो मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में 16 वर्ष तक तैनात रहा, को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। बाद की हिरासत में पूछताछ के दौरान उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसका नियमित संपर्क कोटे, मैगजीन और गार्ड ड्यूटी पर तैनात चार पूर्व सहयोगियों से था।
मल्लेश के अनुसार, उन्हीं संपर्कों ने उसे बताया था कि वहां लगे सीसीटीवी कैमरे हर रात 8 बजे बंद कर दिए जाते हैं और रविवार को पहरेदारी अपेक्षाकृत कम रहती है। इसी आधार पर उसने रविवार, 30 अगस्त की रात चोरी की योजना बनाई और लगभग 11 बजे शस्त्रागार पहुंच गया।
मलकाजगिरी पुलिस ने 22 सितंबर को चंचलगुड़ा जेल से मल्लेश को 10 दिन की पुलिस हिरासत में लिया। अब जांचकर्ता रेजिमेंट के सेवारत सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन चार कर्मियों ने केवल जानकारी ही दी थी या सक्रिय सहायता भी की थी। एक जांच अधिकारी के अनुसार, आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मल्लेश की हिरासत 1 अक्टूबर को समाप्त होनी है।
चोरी का पता 31 अगस्त की सुबह चला, जब कोटे और बटालियन मैगजीन के ताले टूटे हुए मिले। गायब सामान में चार एके-203 असॉल्ट राइफल, एक आईएनएसएएस राइफल, सात पिस्तौल, मैगजीन, एक निष्क्रिय नाइट-विजन उपकरण और 1,800 से अधिक कारतूस शामिल थे।
मल्लेश की गिरफ्तारी के बाद पूरा सामान बरामद कर लिया गया। अधिकांश हथियार और गोला-बारूद नागरकुर्नूल जिले के अचमपेट में उसके पिता के परिसर में बने एक गड्ढे से मिले। एक 9 मिमी पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस वाली एक मैगजीन अलग से जवाहरनगर के पास उसके किराए के घर में रखी गई थी, ताकि उन्हें संभावित खरीदारों को दिखाया जा सके।
पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य और अनुशासनहीनता के आधार पर 30 जून को उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध सेवा से हटाया गया था। वह तीन और वर्ष सेवा में रहना चाहता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, सेवा से हटाए जाने के बाद वह नाराज हो गया और उसने वरिष्ठ अधिकारियों को परेशानी में डालने तथा हथियार बेचकर अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, उसने सोशल मीडिया पर असामाजिक तत्वों में हथियारों की मांग भी खोजी थी। चोरी के लिए उसने याप्राल के एक सड़क किनारे विक्रेता से 150 रुपये में लोहे की छड़ खरीदी और उसी से ताले तोड़े। फिर उसने शस्त्रागार के पास मिले खाली बोरों में सामान भरने में 90 मिनट से अधिक समय लगाया।
उसने दावा किया कि भारी सामान हटाने के लिए उसने स्कूटर से दो बार चक्कर लगाए। पुलिस का कहना है कि इस बयान से भी यह संदेह और मजबूत हुआ है कि उसे किसी की मदद मिली थी।
यह मामला मलकाजगिरी पुलिस, हैदराबाद टास्क फोर्स, सैन्य खुफिया, राज्य खुफिया और अन्य एजेंसियों की संयुक्त जांच में है। जांच के पहले चरण में भी उस रात ड्यूटी पर तैनात कर्मियों, तथा एक लांस नायक और एक हवलदार की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
सेना ने सुरक्षा में हुई चूक, खासकर रात में कैमरों के बंद रहने, शस्त्रागार के रिकॉर्ड, और संतरी द्वारा सेंध का पता न लगा पाने की जांच के लिए अलग से कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। अभी तक किसी आतंकवादी, जासूसी या संगठित अपराध से जुड़ाव की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस अब मल्लेश के संभावित खरीदारों से संपर्क और उसके बयानों में नामित चार सेवारत कर्मियों की वास्तविक भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अंदरूनी मदद की संभावना को लेकर जांच अभी जारी है।