नौसेना कमांडरों का सम्मेलन 2026 का दूसरा संस्करण 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में शुरू हुआ। इसका उद्घाटन भाषण नौसेना प्रमुख ने दिया।
उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने मौजूदा समुद्री सुरक्षा परिदृश्य और भारतीय नौसेना की परिचालन स्थिति की समीक्षा की। सम्मेलन में समुद्री क्षेत्र में सामने आ रही वर्तमान और उभरती चुनौतियों के संदर्भ में सुरक्षा वातावरण और नौसेना की तैयारियों का आकलन किया गया।
नौसेना प्रमुख ने उच्च स्तर की युद्ध तत्परता, फुर्ती और त्वरित प्रतिक्रिया बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है, इसलिए भारतीय नौसेना को बदलती परिचालन परिस्थितियों के प्रति लगातार सक्षम रहना होगा।
उन्होंने प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने और क्षमता विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। यह जोर नौसेना के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य समकालीन और उभरती चुनौतियों से निपटना तथा समुद्री क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत करना है।
यह सम्मेलन नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व को मौजूदा समुद्री सुरक्षा स्थिति और सेवा की परिचालन स्थिति की समीक्षा के लिए एक मंच प्रदान करता है। इसमें होने वाली चर्चाओं का केंद्र तैयारियों को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय नौसेना समुद्री चुनौतियों का सामना फुर्ती और त्वरित प्रतिक्रिया के साथ कर सके।
युद्ध तत्परता पर दिया गया जोर यह भी दर्शाता है कि नौसेना को निरंतर उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखनी होगी। तत्परता के साथ-साथ फुर्ती, त्वरित प्रतिक्रिया, प्रौद्योगिकी का तेजी से समावेश और क्षमता विकास को भी प्रमुख आवश्यकता बताया गया।
नौसेना कमांडरों का सम्मेलन 2026 नौसेना भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और इसका दूसरा संस्करण 29 सितंबर को शुरू हुआ। उद्घाटन भाषण में समुद्री सुरक्षा वातावरण, परिचालन स्थिति, युद्ध तत्परता और प्रौद्योगिकी के तेज़ समावेश पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समुद्री क्षेत्र में समकालीन और उभरती चुनौतियों पर केंद्रित यह सम्मेलन परिचालन तैयारियों और क्षमता विकास को चर्चाओं के केंद्र में रखता है। प्रौद्योगिकी को अपनाने पर दिया गया जोर इस बात के लिए है कि नौसेना बदलते समुद्री वातावरण के अनुरूप आवश्यक क्षमताएँ विकसित करती रहे।
नौसेना प्रमुख के संबोधन ने भारतीय नौसेना में उच्च स्तर की युद्ध तत्परता बनाए रखने के साथ-साथ फुर्ती, त्वरित प्रतिक्रिया, प्रौद्योगिकी समावेश और क्षमता विकास को मजबूत करने के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।