राष्ट्रीय कैडेट कोर के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विरेंद्र वत्स, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम ने महाराष्ट्र निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक के साथ पुणे स्थित समूह मुख्यालय एनसीसी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण पहलों, आधारभूत ढांचे, विस्तार योजनाओं और एनसीसी के भविष्य के लिए तैयार कार्यक्रमों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान डीजी एनसीसी ने अधिकारियों, प्रशिक्षकों और कैडेटों से बातचीत की। उन्होंने महाराष्ट्र एनसीसी निदेशालय की ओर से चलाई जा रही विभिन्न पहलों की जानकारी ली और गठन के प्रदर्शन की सराहना की। साथ ही कैडेटों की उपलब्धियों की भी प्रशंसा की।
बातचीत के दौरान एक प्रमुख उपलब्धि यह रही कि महाराष्ट्र निदेशालय की बालिका कैडेटों को लगातार तीन वर्षों तक अखिल भारतीय सर्वश्रेष्ठ कैडेट के रूप में मान्यता मिली। डीजी एनसीसी ने इसे एनसीसी में बालिका कैडेटों के प्रदर्शन और योगदान का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
लेफ्टिनेंट जनरल वत्स को साइबर डिफेंडर प्रशिक्षण और एनसीसी प्रशिक्षण में ड्रोन प्रौद्योगिकी के समावेशन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी गई। उन्हें एनसीसी के विस्तार से जुड़ी चुनौतियों से भी अवगत कराया गया।
डीजी एनसीसी ने एनसीसी पाठ्यक्रम में दे-नोवो दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कैडेट प्रशिक्षण में भविष्य के लिए तैयार कौशल शामिल करने को महत्वपूर्ण बताया। बातचीत में नारी शक्ति, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी और आपदा प्रबंधन को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया।
उन्होंने कौशल विकास और युवाओं के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण के महत्व पर भी जोर दिया। इन विषयों को विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप युवा पीढ़ी को प्रासंगिक कौशल और क्षमताओं से तैयार करने के व्यापक उद्देश्य से जोड़ा गया।
इस दौरे में महाराष्ट्र में एनसीसी के प्रशिक्षण ढांचे और विस्तार योजनाओं की समीक्षा का अवसर भी मिला। डीजी एनसीसी ने अधिकारियों और कैडेटों से बातचीत के दौरान गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और भविष्य के लिए तैयार कौशल के महत्व को रेखांकित किया।
पुणे में एनसीसी परिवार के साथ लेफ्टिनेंट जनरल वत्स की बातचीत ने प्रशिक्षण के आधुनिकीकरण, प्रासंगिक कौशल के विकास और उभरती आवश्यकताओं के लिए कैडेटों को तैयार करने वाली पहलों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।
दौरे के अंत में भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, कौशल विकास और युवाओं के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रयासों पर बल दिया गया। इस बातचीत और मार्गदर्शन से महाराष्ट्र एनसीसी परिवार को नया प्रोत्साहन मिला।