काठमांडू, 13 अक्टूबर 2026: भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीरेश प्रताप सिंह कौशिक, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, वाईएसएम, एसएम ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारत के दूतावास के रक्षा प्रकोष्ठ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत की तथा रक्षा सहयोग और नेपाल में रह रहे भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
अपने दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक ने काठमांडू स्थित भारत के दूतावास में कार्यवाहक प्रभारी से भी मुलाकात की। बातचीत में भारत और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंध और घनिष्ठ सैन्य संपर्क का संकेत मिला।
इस मुलाकात ने भारत और नेपाल की सशस्त्र सेनाओं के बीच जारी सैन्य संपर्क और सहयोग पर चर्चा का अवसर भी प्रदान किया। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, पेशेवर आदान-प्रदान और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित ऐतिहासिक रिश्ते के रूप में देखे जाते हैं।
दौरे के हिस्से के रूप में एडजुटेंट जनरल ने काठमांडू में कल्याण शाखा और पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना की बहु-विशेषज्ञता औषधालय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से बातचीत की और उनके कल्याण तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी ली।
लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक ने भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के लिए सार्थक कल्याण और स्वास्थ्य पहलों को लागू करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की निष्ठापूर्ण सेवा के सम्मान में पूर्व सैनिकों को उपयुक्त सहयोग, चिकित्सीय सहायता और कल्याण सेवाएं मिलनी चाहिए।
यह दौरा भारतीय सेना की अपने पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिनमें भारत से बाहर रहने वाले पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। नेपाल में यह संबंध गोरखा सैनिकों की सेवा के माध्यम से भारतीय सेना से लंबे समय से जुड़ा रहा है।
भारत और नेपाल के बीच एक विशिष्ट सैन्य संबंध बना हुआ है, जिसमें नियमित उच्चस्तरीय यात्राएं, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और रक्षा संबंधी विषयों पर सहयोग शामिल है। पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का कल्याण इस संबंध का एक महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है।
काठमांडू में लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक की गतिविधियों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को मजबूत करने और प्रभावी कल्याण तथा स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से पूर्व सैनिकों को निरंतर संस्थागत समर्थन सुनिश्चित करने, इन दोनों लक्ष्यों को सामने रखा।