पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक व्यक्ति को फर्जी तरीके से भारतीय सेना का वरिष्ठ अधिकारी बनकर रक्षा क्षेत्र की नौकरियों का लालच देकर पैसे वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई नाबाग्राम पुलिस और कोलकाता सेना खुफिया इकाई ने संयुक्त अभियान में की।
आरोपी की पहचान सागर्दिघी निवासी तरुण दास के रूप में हुई है। उसे रविवार देर रात, 11 अक्टूबर को नाबाग्राम थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। सोमवार को उसे लालबाग उप-मंडलीय अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने आगे की जांच के लिए 10 दिन की हिरासत मांगी।
पुलिस और सेना खुफिया सूत्रों के अनुसार दास नियमित रूप से स्वयं को भारतीय सेना के पैरास्पेशल फोर्स के लेफ्टिनेंट कर्नल और सैन्य खुफिया शाखा का वरिष्ठ अधिकारी बताता था।
वह पूरे सेना वर्दी में अलग-अलग इलाकों में घूमता था, उसके पास फर्जी पहचान पत्र और जाली दस्तावेज थे, और वह सफेद चार पहिया वाहन में यात्रा करता था, जिस पर आगे और पीछे “भारत सरकार” के स्टिकर लगे थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक वह वॉकी-टॉकी और अन्य उपकरणों के साथ लोगों पर दबाव बनाता और उनका भरोसा जीतता था, फिर भारतीय सशस्त्र बलों में नौकरी दिलाने के बदले बड़ी रकम की मांग करता था।
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने सरकारी स्टिकर लगा वाहन, तीन वॉकी-टॉकी, कई मोबाइल फोन, फर्जी पहचान पत्र, संदिग्ध दस्तावेज, नकदी और अन्य सामग्री बरामद की, जिनका इस्तेमाल कथित धोखाधड़ी में किया जा रहा था। बताया गया है कि पड़ोसियों को उसकी असली पहचान की जानकारी नहीं थी, और पुलिस अभी उसकी उम्र, पेशा और पृष्ठभूमि की पुष्टि कर रही है।
सेना खुफिया इकाई ने दास को कई दिनों तक निगरानी में रखा था, क्योंकि उसके संदिग्ध आवागमन को लेकर जानकारी मिली थी। रात में की गई समन्वित कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार जांच में कथित नौकरी घोटाले के दायरे, पीड़ितों की संख्या, वसूली गई कुल रकम और नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
संचार उपकरणों और नकली सरकारी सामान की बरामदगी के बाद संभावित सुरक्षा प्रभावों की भी जांच शुरू की गई है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस हिरासत में पूछताछ पूरी होने के बाद और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।