सोलर डिफेन्स एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल), जो सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया की सहायक कंपनी है, ने भारतीय सेना को नागास्त्र-1आर लुटते गोला-बारूद की 450 इकाइयों की एक ही खेप में आपूर्ति पूरी कर दी है। कंपनी ने इसे अब तक किसी भी निर्माता की ओर से भारतीय सेना को दी गई लुटते गोला-बारूद की सबसे बड़ी एकल-खुराक आपूर्ति बताया है।
यह आदेश सेना की आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत दिया गया था। तकनीकी परीक्षण मार्च 2025 में महाराष्ट्र के मकलोह स्थित विशेष बल प्रशिक्षण विद्यालय में हुए, जिनमें चार कंपनियों ने भाग लिया। एसडीएएल के अनुसार, इन्हीं परीक्षणों में वही एकमात्र कंपनी थी जो सभी आवश्यक परिचालन मानकों पर खरी उतरी।
नागास्त्र-1आर को विशेष रूप से भारतीय सेना की अल्प दूरी की परिचालन जरूरतों के लिए तैयार किया गया है। इसमें कामिकाज़े हमले का विकल्प है, लेकिन यह मिशन के दौरान उसे रोककर गोला-बारूद को बाद में उपयोग के लिए वापस लाने की क्षमता भी रखता है।
यह प्रणाली अत्यधिक सटीक लक्ष्य भेदन के लिए बनाई गई है और इसका वृत्तीय त्रुटि संभाव्य लगभग दो मीटर बताया गया है। इसमें 360-डिग्री जिम्बल कैमरा लगाया गया है तथा रात के अभियानों के लिए तापीय कैमरा भी फिट किया जा सकता है। वीडियो और दूरमापन संकेतों की सुरक्षा के लिए इसमें स्वामित्व-आधारित एन्क्रिप्शन दिया गया है।
यह प्लेटफॉर्म 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर काम कर सकता है और दिन तथा रात, दोनों अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसे नरम-त्वचा लक्ष्यों के खिलाफ उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है।
प्रणाली के 80 प्रतिशत से अधिक घटक स्वदेशी हैं। इसमें पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपक प्रणाली है, जिससे यह एक किफायती सटीक-प्रहार समाधान बनती है। नागास्त्र परिवार के सामान्य प्रदर्शन मानकों में लगभग 15 किलोमीटर की मानव-नियंत्रण सीमा, 30 किलोमीटर तक की स्वायत्त सीमा, 60 मिनट तक की सहनशक्ति और 1 से 1.5 किलोग्राम श्रेणी का उच्च-विस्फोटक विखंडन वारहेड शामिल बताया गया है। हालांकि 1आर संस्करण के सटीक मानक सेना की आवश्यकताओं के अनुसार ही रखे गए हैं।
इस आपूर्ति से भारतीय सेना की अल्प दूरी की सटीक-प्रहार और लुटते गोला-बारूद क्षमता मजबूत होगी। ऐसे प्रणालियों की बढ़ती प्रासंगिकता समकालीन अभियानों में देखी गई है, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले नागास्त्र ड्रोनों के आतंकवादी लक्ष्यों के खिलाफ सफल उपयोग का उल्लेख कर चुके हैं और सोलर समूह से आगे और स्वदेशी विकास को लेकर भरोसा जता चुके हैं।
यह डिलीवरी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पर दिए जा रहे व्यापक जोर के अनुरूप है। इससे आयातित लुटते गोला-बारूद पर निर्भरता घटेगी और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
एसडीएएल ने बताया कि नागास्त्र श्रृंखला का विकास इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड के माध्यम से ज़ेड-मोशन ऑटोनॉमस सिस्टम्स के सहयोग से किया गया है। कंपनी के अनुसार यह प्रणाली सटीकता या गुणवत्ता से समझौता किए बिना किफायती विकल्प देती है।
कंपनी ने लुटते गोला-बारूद की तैनाती बढ़ाने और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग को गहरा करने की इच्छा भी जताई है। यह सबसे बड़ी एकल खेप भारतीय सेना की मानवरहित सटीक-प्रहार क्षमता के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।