चेन्नई/नई दिल्ली, 15 अक्तूबर 2026: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने चेन्नई में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय के उप निदेशक के रूप में तैनात भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी को दिल्ली के एक अधिवक्ता और उसके एक रिश्तेदार के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई देवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं की जांच में कथित रूप से 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में की गई है।
गिरफ्तार लोक सेवक की पहचान हरिश कुमार तंवर के रूप में हुई है, जो 2017 बैच के भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी हैं और आयकर संवर्ग से हैं। वह गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय के चेन्नई दफ्तर में उप निदेशक के पद पर तैनात थे और देवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड मामले की जांच में जांच अधिकारी थे। अन्य आरोपियों में दिल्ली के अधिवक्ता भारत शर्मा और अधिवक्ता का रिश्तेदार आर्यन शर्मा शामिल हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, यह मामला 12 अक्तूबर 2026 को गोपाल शिवराम दलवी की ओर से दी गई लिखित शिकायत के बाद दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तंवर, भारत शर्मा और अन्य लोगों ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की जांच में उसे लाभ पहुंचाने के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की थी। साथ ही, रकम न देने पर गिरफ्तारी और अभियोजन की धमकी दी गई थी।
एजेंसी ने 12 और 13 अक्तूबर को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में आरोपों की पुष्टि की। सत्यापन के दौरान बताया गया कि भारत शर्मा ने शिकायतकर्ता को कुल मांगी गई राशि के हिस्से के रूप में 20 लाख रुपये देने के लिए कहा था, जो गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय के अधिकारी की ओर से थे।
इसके बाद एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा 7ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की। बाद में जाल बिछाया गया। अधिवक्ता द्वारा शिकायतकर्ता से 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह रकम कथित रूप से तंवर की ओर से और उनके लिए ली गई थी।
लोक सेवक और अधिवक्ता के परिसरों पर तलाशी भी ली गई, जहां से मामले से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। जांच अभी जारी है।
सूत्रों के अनुसार, आयकर संवर्ग के ही एक वरिष्ठ भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी, जो गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय में तैनात हैं, को भी इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अपने संदेह के दायरे में लिया है और उनसे पूछताछ की गई है। उनके रोल की जांच की प्रक्रिया भी चल रही है।
यह मामला देवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड की मूल धोखाधड़ी से नहीं, बल्कि चल रही गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की जांच को प्रभावित करने के कथित प्रयास से जुड़ा है। वर्ष 2019 से इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय सहित कई एजेंसियां जांच कर रही हैं।
मामले में लगभग 34,000 करोड़ रुपये के ऋणों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख है। पूर्व प्रवर्तक कपिल वाधवान और धीरज वाधवान पर बैंक धन को शेल इकाइयों और अन्य तरीकों से मोड़ने के आरोप हैं। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, जो कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन काम करता है, इस प्रकरण के कॉरपोरेट धोखाधड़ी पक्ष की जांच कर रहा है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने कहा है कि कथित साजिश की पूरी सीमा और किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।