जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में उड़ी सेक्टर में ड्यूटी के दौरान नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया का हृदयाघात से निधन हो गया। 11 गढ़वाल राइफल्स में तैनात 41 वर्षीय गड़िया का निधन बुधवार, 28 अक्टूबर को हुआ। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को हरिद्वार में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल विकासखंड स्थित हरमल गांव के रहने वाले गड़िया वर्ष 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 24 साल तक भारतीय सेना में सेवा दी। उनकी तैनाती उड़ी सेक्टर में थी, जिसमें बोनियार क्षेत्र के लच्छीपोरा और एफएससी रामपुर जैसे इलाके शामिल हैं।
शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया था कि वह अचेत अवस्था में मिले थे। इसके बाद पोस्टमार्टम सहित आवश्यक चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। उत्तराखंड के अधिकारियों और मीडिया की बाद की रिपोर्टों में ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया। सेना ने गुरुवार को परिवार को सूचना दी। अंतिम संस्कार से पहले उनका पार्थिव शरीर देहरादून के तुनवाला स्थित पारिवारिक आवास लाया गया।
गड़िया का परिवार लंबे समय से सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता देव सिंह गड़िया और दो बड़े भाई नरेंद्र सिंह तथा प्रवीण सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में उनकी मां नारायणी देवी, पत्नी जानकी देवी, सात वर्षीय बेटी शान्वी और चार वर्षीय बेटा श्रेयांश हैं।
परिवार और गांव के परिचितों ने उन्हें मिलनसार और सरल स्वभाव का बताया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने हाल ही में परिजनों से बातचीत में साथ दीपावली मनाने और 21 नवंबर को होने वाली भतीजी की शादी में शामिल होने की योजना बताई थी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। अपने शोक संदेश में उन्होंने उड़ी सेक्टर में तैनात हरमल गांव के नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया के निधन को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
उनके निधन से हरमल गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक है। सेना ने परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।