लेफ्टिनेंट जनरल सुशील चंदर महंत ने भारतीय सेना के एकीकृत प्रशिक्षण महानिदेशक का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय (सेना) में यह जिम्मेदारी संभाली।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कटराईं गांव के निवासी लेफ्टिनेंट जनरल महंत, सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा के पहले पूर्व छात्र हैं जो लेफ्टिनेंट जनरल के रैंक तक पहुंचे हैं।
उन्होंने शुरुआती पढ़ाई राजकीय हाई स्कूल, कटराईं से की और इसके बाद सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा में शिक्षा प्राप्त की। जनवरी 1988 में वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हुए। दिसंबर 1991 में भारतीय सैन्य अकादमी से उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला। वह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, नई दिल्ली के भी पूर्व छात्र हैं।
अपने सैन्य करियर में उन्होंने मुख्य रूप से रसद और आयुध सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कमान एवं स्टाफ पदों पर काम किया है। वह 11 फील्ड ऑर्डनेंस डिपो के कमांडिंग ऑफिसर और एक स्ट्राइक कोर में ब्रिगेडियर ऑर्डनेंस रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने चीन से लगी उत्तरी सीमा की जिम्मेदारी संभालने वाली एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेना कमान में मेजर जनरल ऑर्डनेंस सर्विसेज के पद पर भी सेवा दी है।
लेफ्टिनेंट जनरल महंत ने सेना के तीन पाठ्यक्रमों में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने गुलमर्ग में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध का प्रशिक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। स्कूल के दिनों से ही साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले महंत को कयाकिंग, कैनोइंग, स्कीइंग और अन्य जलक्रीड़ाएं पसंद हैं।
एकीकृत प्रशिक्षण महानिदेशक के तौर पर वह सेना की प्रशिक्षण व्यवस्था के प्रमुख पहलुओं की देखरेख करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में प्रशिक्षण का स्तर बेहतर करना, प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमताएं मजबूत करना, शारीरिक फिटनेस बढ़ाना और खेलों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य सैनिकों को भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों के लिए तैयार करना है।