मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस ब्रह्मपुत्र के आग लगने के बाद एक ओर पलट जाने के मामले में भारतीय नौसेना ने दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू की है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और उस दिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारी के खिलाफ यह कार्यवाही मुंबई में 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई। दोनों पर कर्तव्य निभाने में लापरवाही के आरोप हैं। कैप्टन रैंक के कमांडिंग ऑफिसर पर नौसैनिक पोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप भी है।
हादसा 21 जुलाई 2024 की शाम हुआ था। उस समय निर्देशित मिसाइलों से लैस फ्रिगेट आईएनएस ब्रह्मपुत्र मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत और नवीनीकरण के लिए खड़ा था। जहाज पर लगी आग को चालक दल, डॉकयार्ड के अग्निशमन कर्मियों और आसपास के जहाजों की मदद से 22 जुलाई की सुबह तक काबू कर लिया गया।
हालांकि, आग बुझाने में इस्तेमाल हुए भारी मात्रा में पानी से जहाज का संतुलन बिगड़ गया। 3,850 टन का यह फ्रिगेट बाईं ओर बुरी तरह झुक गया और अंततः बर्थ के किनारे एक ओर पलट गया।
अधिकांश कर्मी जहाज से उतरने के रास्ते यानी गैंगवे से बाहर निकले, जबकि कुछ ने पानी में कूदकर तैरते हुए अपनी जान बचाई। मरम्मत कार्य में शामिल लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह लापता हो गए थे। व्यापक गोताखोरी अभियान के बाद 24 जुलाई को उनका शव बरामद हुआ। नौसेना ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की थी।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र स्वदेशी निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट की ब्रह्मपुत्र श्रेणी का पहला जहाज है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने इसका निर्माण किया था और अप्रैल 2000 में इसे नौसेना में शामिल किया गया। करीब 125 मीटर लंबे और 16 मीटर चौड़े इस युद्धपोत पर 40 अधिकारियों सहित लगभग 370 कर्मियों की तैनाती रहती है।
हादसे की जांच रियर एडमिरल रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता वाले जांच बोर्ड ने की। तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एक रियर एडमिरल के नेतृत्व में विशेष कार्यबल भी बनाया था। इसे नौसेना की कमानों, प्रतिष्ठानों और इकाइयों में जहाजों की सुरक्षा तथा संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा का जिम्मा दिया गया। मरम्मत और रखरखाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कार्यबल की सिफारिशें संबंधित इकाइयों तक पहुंचाई गईं और लागू की गईं।

जहाज को दोबारा सीधा करने के अभियान में कई महीने लगे। वर्ष 2024 के अंत तक इसे सीधा करके ड्राई डॉक में पहुंचा दिया गया था। इसके बाद की मरम्मत पूरी हो चुकी है और फिलहाल जहाज के परीक्षण चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया है कि इसे अभी औपचारिक रूप से परिचालन सेवा में वापस नहीं लिया गया है। इसके 2027 में समुद्र में चलने योग्य होने की उम्मीद है।
कोर्ट मार्शल में दोषी पाए जाने पर अधिकारियों को फटकार, वरिष्ठता में कटौती से लेकर दो वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए कारणों का पता लगाना, जिम्मेदारी तय करना और सुरक्षा उपाय लागू करना जरूरी है।
अधिकारियों के किन खास कृत्यों या चूकों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। कोर्ट मार्शल में आग लगने, जहाज का संतुलन बिगड़ने और एक नौसैनिक की मृत्यु तक पहुंची घटनाओं के क्रम में दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच होने की उम्मीद है।
इसी मुंबई डॉकयार्ड में 2016 में आईएनएस बेतवा भी डॉक ब्लॉकों से फिसलकर पलट गया था। नौसेना ने जटिल युद्धपोतों की मरम्मत और नवीनीकरण के दौरान कड़ी निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है। आग बुझाने में इस्तेमाल पानी का सावधानी से प्रबंधन न किया जाए तो उससे जहाज का संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है।