भारत और फिलीपींस करीब 80 करोड़ डॉलर के एक नए ब्रह्मोस मिसाइल सौदे के करीब हैं। रॉयटर्स से 5 नवंबर 2026 को बात करने वाले, मामले की सीधी जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के अनुसार, फिलीपींस लगभग पांच ब्रह्मोस सिस्टम खरीद सकता है, जिनमें करीब 60 मिसाइलें शामिल होंगी। हालांकि, दोनों सरकारों ने अभी इस संभावित सौदे की अंतिम शर्तों या समयसीमा की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।
यह खरीद जनवरी 2022 में हुए 37.5 करोड़ डॉलर, यानी 18.9 अरब फिलीपीनी पेसो के पहले समझौते से काफी बड़ी होगी। उस समझौते के तहत फिलीपीनी मरीन कोर के लिए तट से दागी जाने वाली जहाज-रोधी मिसाइलों की तीन बैटरियां खरीदी गई थीं।
एक भारतीय सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि मनीला ने करीब पांच और ब्रह्मोस सिस्टम खरीदने में रुचि दिखाई है और अब वह भारत को बेहद भरोसेमंद साझेदार मानता है। इस बीच, भारत पहले समझौते के तहत आपूर्ति पूरी करने के करीब है। पहली बैटरी अप्रैल 2024 में हवाई मार्ग से और दूसरी अप्रैल 2025 में समुद्री मार्ग से पहुंचाई गई थी। तीसरी बैटरी की आपूर्ति जल्द होने की उम्मीद है, जिसके साथ यह समझौता पूरा हो जाएगा।
फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आर्सेनियो एंडोलोंग ने रॉयटर्स से पुष्टि की कि राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने और ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की इच्छा जताई है। उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। अलग से, रक्षा सचिव गिल्बर्टो टियोडोरो ने 5 नवंबर 2026 को दिल्ली डिफेंस डायलॉग में ऑनलाइन संबोधन के दौरान कहा कि फिलीपींस अपनी सेवा में ब्रह्मोस इकाइयों की संख्या बढ़ाना चाहता है।
टियोडोरो के मुताबिक, फिलीपींस अपनी जरूरतों के अनुरूप सिस्टम में बदलाव के लिए भारतीय अधिकारियों को पहले ही एक ‘इच्छा सूची’ सौंप चुका है। इसमें देश की सड़कों और पुलों की स्थिति के साथ-साथ अलग-अलग द्वीपों पर तैनाती और रसद पहुंचाने की चुनौतियों को ध्यान में रखा गया है।
प्रस्तावित खरीद फिलीपींस के व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच वह अपनी तटीय सुरक्षा मजबूत कर रहा है। चीन के साथ समुद्री क्षेत्रों पर परस्पर दावों की पृष्ठभूमि में मनीला संभावित विरोधी की पहुंच और आवाजाही सीमित करने तथा समुद्र में नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता बढ़ाना चाहता है।
ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित किया है। यह दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है। इसके विभिन्न संस्करण जमीन, समुद्र और हवा से दागे जा सकते हैं। इसकी उड़ान गति लगभग मैक 2.8 से 3 है और यह 200 से 300 किलोग्राम का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है।
फिलीपींस को तट से दागा जाने वाला जहाज-रोधी संस्करण दिया गया है। इसका निर्यात विन्यास मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था के दिशानिर्देशों के अनुरूप है। मूल निर्यात संस्करण की मारक दूरी आमतौर पर करीब 290 किलोमीटर बताई जाती है।
फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी खरीदार था। इस आकार का एक और ऑर्डर मिलने पर भारत के रक्षा निर्यात और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ेगा। रॉयटर्स के अनुसार, संभावित सौदे की मात्रा और कीमत की जानकारी सबसे पहले उसी ने दी है।