सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे ने 10 जुलाई 2026 को अपनी 60वीं बैच की औपचारिक पासिंग आउट परेड के दौरान 141 चिकित्सा स्नातकों को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में कमीशन प्रदान किया।
- तीनों सेवाओं में शामिल हुए 141 चिकित्सा अधिकारी
- सर्ज वाइस एडमिरल अर्ति सारिन ने परेड का निरीक्षण किया
- लेफ्टिनेंट निखिल कुमार झा ने परेड का नेतृत्व किया
- परिवारों के योगदान और बलिदान को भी मिला सम्मान
- फ्लग ऑफिसर अनन्या फड़के को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक
- सेवा का नया अध्याय शुरू
- सैन्य चिकित्सा में एएफएमसी की विरासत
- स्वयं से पहले सेवा की परंपरा का निर्वाह
कप्तान देवाशीष शर्मा, कीर्ति चक्र परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में सधे हुए ड्रिल प्रदर्शन, उत्कृष्ट सैन्य आचरण और गर्व की भावना दिखाई दी। स्नातक कैडेट्स ने औपचारिक रूप से भारतीय सशस्त्र बलों में चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया।
नव-कमीशंड अधिकारी अब भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में सेवा देंगे। वे देश के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण परिचालन वातावरण में सैनिकों, नाविकों और वायु योद्धाओं को चिकित्सा सहायता प्रदान करेंगे।
तीनों सेवाओं में शामिल हुए 141 चिकित्सा अधिकारी
सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय के निदेशक और कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल पंकज पी राव के अनुसार, कुल 141 चिकित्सा स्नातकों को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में कमीशन दिया गया। इनमें 112 भारतीय सेना में, 12 भारतीय नौसेना में और 17 भारतीय वायु सेना में शामिल हुए।
यह कमीशनिंग वर्षों की कठिन चिकित्सा शिक्षा, नैदानिक प्रशिक्षण, शारीरिक तैयारी और सैन्य निर्देश का परिणाम रही। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक में उनकी लंबी यात्रा का समापन भी था।
अपने-अपने सेवाओं की वर्दी पहने इन अधिकारियों ने आत्मविश्वास और सटीकता के साथ सलामी मंच के सामने से मार्च किया। यह दृश्य चिकित्सा कैडेट्स से कमीशंड सैन्य चिकित्सकों में उनके औपचारिक परिवर्तन का प्रतीक बना।
सर्ज वाइस एडमिरल अर्ति सारिन ने परेड का निरीक्षण किया
समारोह की समीक्षा सर्ज वाइस एडमिरल अर्ति सारिन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, महानिदेशक सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं ने मुख्य अतिथि के रूप में की। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और नवकमीशंड अधिकारियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं सैन्य अभियानों, आपात स्थितियों, मानवीय मिशनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जानी जाती हैं।
नव-नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए डीजीएएफएमएस ने पेशेवर दक्षता, नैतिक चिकित्सा पद्धति, करुणा और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने युवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सैन्य चिकित्सा के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखें और शांति, सशस्त्र संघर्ष, मानवीय सहायता अभियानों या आपदा राहत कार्यों के दौरान हर परिस्थिति में राष्ट्र की सेवा के लिए तैयार रहें।
सर्ज वाइस एडमिरल अर्ति सारिन ने यह भी याद दिलाया कि सैन्य चिकित्सा में केवल मजबूत नैदानिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि साहस, नेतृत्व, अनुकूलनशीलता और संवेदना भी आवश्यक है।
लेफ्टिनेंट निखिल कुमार झा ने परेड का नेतृत्व किया
कमीशनिंग परेड का संचालन लेफ्टिनेंट निखिल कुमार झा ने किया, जिन्होंने 60वीं बैच का नेतृत्व विशिष्टता के साथ किया। परेड की पहचान सटीक वेशभूषा, समन्वित चाल और कड़ी सैन्य अनुशासन से रही।
नवकमीशंड अधिकारी गर्व, परंपरा और भावनाओं से भरे वातावरण में गठन बनाकर आगे बढ़े। सलामी मंच के सामने से गुजरते समय अभिभावकों, संकाय सदस्यों, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और आमंत्रित अतिथियों ने इन युवा चिकित्सकों के पहले औपचारिक कदम देखे।
समारोह ने एएफएमसी की उस विशिष्ट पहचान को भी सामने रखा, जहां चिकित्सा उत्कृष्टता को सशस्त्र बलों के अनुशासन, नेतृत्व और मूल्यों के साथ जोड़ा जाता है।
परिवारों के योगदान और बलिदान को भी मिला सम्मान
कमीशनिंग समारोह में स्नातक कैडेट्स के माता-पिता और परिवारों के महत्वपूर्ण योगदान को भी स्वीकार किया गया। उनके प्रोत्साहन, बलिदान और निरंतर समर्थन ने कैडेट्स को एएफएमसी के कठिन शैक्षणिक और सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।
परिवारों के लिए यह अवसर लंबे और चुनौतीपूर्ण सफर की उपलब्धि का प्रतीक था। उनके पुत्रों और पुत्रियों का सैन्य डॉक्टर के रूप में कमीशन होना गर्व और भावनाओं से भरा क्षण था।
इस अवसर ने केवल स्नातकों की उपलब्धियों का ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों, प्रशिक्षकों, संकाय सदस्यों और मार्गदर्शकों के सामूहिक प्रयास का भी उत्सव मनाया।
फ्लग ऑफिसर अनन्या फड़के को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक
कमीशनिंग परेड के बाद एएफएमसी ने शैक्षणिक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया, जिसमें अकादमिक, नेतृत्व, खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।
सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण स्नातक चिकित्सा अधिकारी के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रपति स्वर्ण पदक फ्लग ऑफिसर अनन्या फड़के को प्रदान किया गया। उन्हें एएफएमसी में प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के लिए कालींगा ट्रॉफी भी मिली।
विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठता दिखाने वाले कई अन्य छात्रों को भी पदक, ट्रॉफी और पुरस्कार प्रदान किए गए। ये सम्मान इस बात को रेखांकित करते हैं कि एएफएमसी ऐसे बहुआयामी सैन्य चिकित्सा अधिकारियों को तैयार करने पर जोर देता है, जिनमें नैदानिक दक्षता के साथ नेतृत्व, अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और सेवा-भावना भी हो।
सेवा का नया अध्याय शुरू
नवकमीशंड अधिकारी अब देशभर के विभिन्न सैन्य अस्पतालों, चिकित्सा इकाइयों, क्षेत्रीय संरचनाओं, नौसैनिक प्रतिष्ठानों और वायु सेना स्टेशनों में जाएंगे। अपने करियर के दौरान उन्हें उच्च पर्वतीय क्षेत्रों, रेगिस्तानों, दूरस्थ द्वीपों, समुद्री वातावरण, अग्रिम सैन्य चौकियों और सक्रिय परिचालन क्षेत्रों में भी सेवा देने के लिए बुलाया जा सकता है।
उनकी जिम्मेदारियां सामान्य उपचार तक सीमित नहीं होंगी। वे आपातकालीन देखभाल, आघात प्रबंधन, निवारक चिकित्सा, विमानन और समुद्री चिकित्सा, हताहत निकासी तथा प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान स्वास्थ्य सहायता में भी शामिल रहेंगे।
सैन्य चिकित्सा अधिकारियों को अक्सर ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में काम करना पड़ता है, जहां संसाधन सीमित हो सकते हैं और त्वरित चिकित्सकीय निर्णय परिचालन क्षमता तथा जीवन रक्षा पर सीधा प्रभाव डालते हैं। एएफएमसी का प्रशिक्षण उन्हें पेशेवर चिकित्सा ज्ञान के साथ सैन्य सेवा के लिए आवश्यक सहनशक्ति और नेतृत्व से भी लैस करता है।
सैन्य चिकित्सा में एएफएमसी की विरासत
सैन्य चिकित्सा शिक्षा के एक प्रमुख संस्थान के रूप में स्थापित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की प्रशिक्षण व्यवस्था की आधारशिला बना हुआ है। दशकों से इस संस्थान ने ऐसे डॉक्टर तैयार किए हैं जिन्होंने युद्धों, आतंकवाद-रोधी अभियानों, शांति स्थापना मिशनों, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों और मानवीय सहायता अभियानों में विशिष्ट सेवा दी है।
इसके पूर्व छात्र देश के कई कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता दे चुके हैं, जिनमें उच्च पर्वतीय परिचालन क्षेत्र, दूरस्थ सीमाई इलाके और समुद्री तैनाती शामिल हैं। एएफएमसी को विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा को सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन, नेतृत्व और सेवा-पूर्व स्वार्थ से जोड़ने के लिए व्यापक मान्यता प्राप्त है।
संस्थान का पाठ्यक्रम चिकित्सा पेशेवरों को केवल सामान्य अस्पताल अभ्यास के लिए ही नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों में सेवा दे रहे कर्मियों की विशिष्ट चिकित्सा चुनौतियों के लिए भी तैयार करता है।
स्वयं से पहले सेवा की परंपरा का निर्वाह
60वीं बैच का कमीशनिंग एएफएमसी की उस गौरवशाली परंपरा की निरंतरता है, जिसमें सक्षम, संवेदनशील और पेशेवर रूप से समर्पित सैन्य चिकित्सक तैयार किए जाते हैं। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में सेवा शुरू करते हुए ये अधिकारी पीढ़ियों से बने उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे सशस्त्र बलों के चिकित्सा कर्मियों ने सम्मान और समर्पण के साथ निभाया है।
उनकी नियुक्ति के साथ देश के सैन्य कर्मियों के स्वास्थ्य और परिचालन तत्परता की रक्षा की जिम्मेदारी भी जुड़ती है, वह भी अक्सर परिवारों से दूर और कठिन परिस्थितियों में। 141 नवकमीशंड चिकित्सा अधिकारी अब सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सर्वोत्तम परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
एएफएमसी में प्राप्त ज्ञान, सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकसित मूल्य और परिवारों व मार्गदर्शकों के समर्थन के साथ ये युवा अधिकारी उपचार, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा को समर्पित एक विशिष्ट यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं।