चंडीगढ़: भारत के तीन जीवित परम वीर चक्र पुरस्कार विजेताओं में से दो, मानद कैप्टन बाना सिंह और मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के प्रति मजबूत समर्थन जताया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों से सार्थक संवाद करे।
द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दोनों अलंकृत युद्ध नायकों ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज संवाद से मजबूत होते हैं, टकराव से नहीं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे छात्रों की चिंताओं को सुनें और लाठीचार्ज जैसे कदमों से बचें, क्योंकि इससे तनाव और बढ़ सकता है।
मानद कैप्टन बाना सिंह ने कहा कि बल हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। सियाचिन के इस वीर ने 1987 में ऑपरेशन राजीव के दौरान असाधारण शौर्य के लिए परम वीर चक्र प्राप्त किया था। उन्होंने एक लोकप्रिय कहावत का हवाला देते हुए कहा, “आग लगने से बारिश नहीं होती और न ही पानी अपने आप आ जाता है।” उनके अनुसार, युवा छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें सुनना चाहिए, न कि हिंसा से सामना करना चाहिए।
77 वर्षीय पूर्व सैनिक ने चेतावनी दी कि सरकार को इस संकट को और गंभीर नहीं होने देना चाहिए। उनके मुताबिक, जो छात्र आज किताबें लेकर चलते हैं, वही कल भारत की जिम्मेदारियां संभालेंगे, इसलिए उनकी आवाज का सम्मान करना और उनकी चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से करना जरूरी है।
मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, जो कारगिल युद्ध में अपने पराक्रम के लिए “टाइगर ऑफ टाइगर हिल” के नाम से जाने जाते हैं और सबसे कम उम्र के परम वीर चक्र विजेता हैं, ने कहा कि पिछले चार वर्षों से बच्चों के साथ काम करने के कारण वे युवाओं की भावनाओं और निराशा को समझते हैं।
उन्होंने परिवार और शासन की तुलना करते हुए कहा कि जब घर में बच्चे नाराज होते हैं, तो पिता का दायित्व होता है कि वह बैठकर उनकी बात सुने और उनसे बातचीत करे। इसी तरह सरकारों को भी छात्रों से संवाद करना चाहिए, न कि बल प्रयोग के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
दोनों पूर्व सैनिकों ने कहा कि लोकतंत्र तब सबसे मजबूत होता है जब बातचीत, टकराव की जगह लेती है।
बाना सिंह ने कथित नीट प्रश्नपत्र लीक को केवल प्रशासनिक चूक से कहीं अधिक बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन लाखों छात्रों के मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाते हैं। उन्होंने सरकार से सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों के सवाल पर योगेंद्र सिंह यादव ने राजनीतिक टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन यह दोहराया कि सरकार की पहली प्रतिक्रिया संवाद होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्रों से अपील की कि उनका विरोध शांतिपूर्ण रहे।
सुनने के महत्व पर जोर देते हुए यादव ने कहा कि सच्चा साहस केवल बोलने में नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनने और देश के युवाओं पर भरोसा करने में भी है। उन्होंने जारी छात्र प्रदर्शनों को उस पीढ़ी का संकेत बताया जो भारत के भविष्य की गहराई से परवाह करती है।
यादव के अनुसार सड़कों पर दिख रही नाराजगी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी व्यापक ढांचागत समस्याओं का परिणाम है, जिनमें बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक, बेरोजगारी और ऐसा शैक्षणिक ढांचा शामिल है जो अक्सर डिग्रियों को तो महत्व देता है, लेकिन छात्रों को व्यावहारिक कौशल से पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ता।
उन्होंने अंत में भारत की युवा पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के युवा समस्या नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी आशा हैं।