नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 10 से 13 अगस्त 2026 तक मॉरीशस की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना तथा रक्षा संबंधों को गहरा करना है।
यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण समुद्री साझेदार के रूप में मॉरीशस के साथ भारत की निरंतर सहभागिता का हिस्सा है। इस दौरान एडमिरल स्वामीनाथन मॉरीशस सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण तथा सैन्य सहयोग जैसे पारस्परिक हित के विषयों पर चर्चा करेंगे।
इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्तरवार परिचालन संबंधों को और बेहतर बनाना तथा भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करना है। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री साझेदारियों को मजबूत करने और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति भारत के महत्व को भी दर्शाती है।
भारत और मॉरीशस के बीच विश्वास, ऐतिहासिक संबंधों और साझा समुद्री हितों पर आधारित एक करीबी और स्थायी समुद्री संबंध है। भारतीय नौसेना नियमित रूप से मॉरीशस राष्ट्रीय तटरक्षक बल के साथ प्रशिक्षण आदान-प्रदान, परिचालन संपर्क, संयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र निगरानी अभियानों, बंदरगाह यात्राओं और जल सर्वेक्षण सहयोग के माध्यम से जुड़ती रही है।
दोनों देश समुद्री सहयोग और सुरक्षा को बढ़ाने पर केंद्रित विभिन्न बहुपक्षीय समुद्री पहलों और क्षेत्रीय मंचों में भी भाग लेते हैं। मॉरीशस भारतीय नौसेना की कई प्रमुख पहलों में नियमित रूप से शामिल रहा है, जिनमें इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम, मिलान, अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा, गोवा समुद्री संगोष्ठी, आईओएस सागर और अभ्यास आईकेईएमई शामिल हैं।
ये सहभागिताएं महासागर की साझा दृष्टि को दर्शाती हैं, जिसका अर्थ है विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति। यह दृष्टि हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग, सुरक्षा और विकास को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
नौसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा भारत द्वारा इस लंबे समय से चली आ रही मित्रता को दी गई प्राथमिकता को रेखांकित करती है। यह दोनों देशों की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
सुदृढ़ नौसैनिक सहयोग, क्षमता निर्माण पहलों और बेहतर परिचालन समन्वय के माध्यम से भारत और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षित, स्थिर और सहयोगी समुद्री वातावरण बनाए रखने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।