राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की के-९ इकाई के विशेषज्ञ विस्फोटक-खोजी श्वान डॉनी को नवंबर 2025 में लाल किला विस्फोट के बाद आतंकवाद-रोधी अभियानों में निभाई गई भूमिका के लिए थलसेना प्रमुख प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया है।
यह प्रशंसा पत्र स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर प्रदान किया गया। डॉनी को उच्च जोखिम वाले अभियानों में असाधारण प्रदर्शन, साहस और जन-सुरक्षा में योगदान के लिए यह मान्यता दी गई।
डॉनी को 10 नवंबर 2025 को लाल किले पर तैनात किया गया था, जब वहां वीबीआईईडी विस्फोट हुआ था। इस हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी और 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। मलबे और बढ़े हुए सुरक्षा खतरे के बीच उसे विस्फोट स्थल की जांच कर विस्फोटक अवशेषों का पता लगाने का काम सौंपा गया।
अधिकारियों के अनुसार, के-९ ने विस्फोटक अवशेषों की मौजूदगी का पता लगाया और इसकी पुष्टि की, जिससे फॉरेंसिक और सुरक्षा दल को क्षेत्र को सुरक्षित करने तथा आगे की जांच करने में मदद मिली। उसकी पहचान क्षमता ने संवेदनशील अपराध स्थल पर संभावित द्वितीयक खतरों की पहचान में भी सहायता की।
इसके बाद 12 नवंबर 2025 को डॉनी को फरीदाबाद के खंडावली में तैनात किया गया, जहां सुरक्षा दल एक ऐसे वाहन की जांच कर रहे थे, जिसके विस्फोटकों की ढुलाई से जुड़े होने का संदेह था और जिसका संबंध लाल किला हमले से बताया गया।
इस अभियान के दौरान डॉनी ने वाहन में फिर विस्फोटक अवशेषों का पता लगाया। इससे जांचकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी मिली और सुरक्षा एजेंसियों को आगे हमलों की आशंका टालने में मदद मिली।
अधिकारियों ने अत्यधिक दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में डॉनी की प्रभावी कार्यक्षमता को रेखांकित किया। समय पर की गई उसकी कार्रवाई को संभावित खतरों की पहचान करने और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक बताया गया।
थलसेना प्रमुख प्रशंसा पत्र राष्ट्र सेवा में असाधारण समर्पण, पेशेवर दक्षता और साहस के सम्मान में दिया जाता है। डॉनी को मिला यह सम्मान विस्फोटक खोज, आतंकवाद-रोधी अभियानों और विस्फोट के बाद सुरक्षा प्रक्रियाओं में विशेषज्ञ के-९ दलों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।
यह पुरस्कार प्रशिक्षित सेवा पशुओं के योगदान को भी सामने लाता है, जो सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर कुछ सबसे संवेदनशील और खतरनाक परिचालन परिस्थितियों में काम करते हैं।
लाल किला विस्फोट के बाद डॉनी का प्रदर्शन विशेषज्ञ के-९ इकाइयों की अहम क्षमताओं का उदाहरण बनकर सामने आया है, विशेषकर उन जटिल सुरक्षा अभियानों में जहां विस्फोटकों की त्वरित पहचान आगे जानमाल की हानि रोकने में मदद कर सकती है।