पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने विशाखापत्तनम स्थित पनडुब्बी बचाव इकाई (पूर्व) में लॉन्च एंड रिकवरी सिस्टम यानी एलएआरएस परीक्षण मंच का उद्घाटन किया। यह भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बचाव अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
यह नई सुविधा एक अनूठा, स्वदेशी परीक्षण संयंत्र है, जिसे डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल यानी डीएसआरवी के लॉन्च एंड रिकवरी सिस्टम के तट-आधारित परीक्षण और रखरखाव के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए प्रणाली की जांच और देखरेख अब भूमि पर भी की जा सकेगी।
एलएआरएस पनडुब्बी बचाव अभियानों का एक अहम घटक है, क्योंकि यह मिशनों के दौरान डीएसआरवी की सुरक्षित तैनाती और उसकी वापसी को संभव बनाता है। नई परीक्षण सुविधा से पनडुब्बी बचाव इकाई को प्रणाली की नियमित जांच, रखरखाव और सत्यापन की अधिक क्षमता मिलेगी।
इससे महत्वपूर्ण उपकरणों की समय पर मरम्मत और परीक्षण आसान होगा, जिससे पनडुब्बी बचाव प्रणाली की विश्वसनीयता और उपलब्धता और बेहतर होने की उम्मीद है। इससे परिचालन तैनाती पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता भी कम होगी।
पूर्वी तटरेखा पर पनडुब्बी बचाव तैयारी बनाए रखने की नौसेना की क्षमता भी इस परीक्षण मंच से मजबूत होगी। समुद्री क्षेत्र में कार्यरत पनडुब्बियों को समर्थन देने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
इस पहल को भारतीय नौसेना की स्वदेशी और आंतरिक तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में एक और प्रयास माना गया है। इसका उद्देश्य परिचालन तत्परता बढ़ाना और विशेषीकृत उपकरणों का सतत रखरखाव सुनिश्चित करना है।
उद्घाटन के साथ ही नौसेना के पनडुब्बी बचाव तंत्र को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक और कदम जोड़ा गया है। इससे यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है कि आवश्यक होने पर अहम बचाव क्षमता तैनाती के लिए तैयार बनी रहे।