पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र-घोषित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के बहावलपुर मुख्यालय को, भारत के ऑपरेशन सिंदूर में क्षतिग्रस्त होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद, फिर से बड़े पैमाने पर पुनर्निर्मित और बहाल किए जाने की बात सामने आई है। यह जानकारी खुफिया आकलनों और रिपोर्टों में उद्धृत तस्वीरों के आधार पर दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निशाना बनाए गए स्थानों में शामिल मरकज सुभानअल्लाह परिसर में व्यापक पुनर्निर्माण हुआ है। तस्वीरों में संकेत मिलता है कि गुम्बदों और केंद्रीय सभागार सहित क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत कर दी गई है और सटीक हमलों से प्रभावित हिस्सों को भी बहाल कर दिया गया है।
केंद्रीय सभागार में भी बड़े स्तर पर नवीनीकरण किए जाने की बात कही गई है। इसमें नया प्लास्टर, पेंट और संगमरमर का फर्श शामिल बताया गया है। परिसर से जुड़े आसपास के ढांचों को भी पहले हुई तबाही के बाद फिर से बनाया गया है।
रिपोर्ट में उद्धृत खुफिया सूत्रों के अनुसार, जेईएम को पुनर्निर्माण के लिए बड़ी धनराशि दी गई। लगभग 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये किस्तों में भेजे जाने की बात कही गई है, जबकि करीब 11 करोड़ पाकिस्तानी रुपये मुख्य सभागार के नवीनीकरण के लिए निर्धारित बताए गए हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहावलपुर के बाहरी इलाके में स्थित मरकज सुभानअल्लाह परिसर को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और विश्लेषक लंबे समय से जेईएम गतिविधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र मानते रहे हैं।
यह बहाली ऐसे समय सामने आई है जब ऑपरेशन सिंदूर को एक वर्ष से अधिक बीत चुका है। भारत ने यह अभियान अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया था। इस दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान-occupied जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
रिपोर्ट में सामने आई यह पुनर्निर्माण प्रक्रिया भारत में इस चिंता को फिर से बढ़ा रही है कि पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बावजूद आतंकी ढांचा अब भी मौजूद है। भारत लंबे समय से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है।
जेईएम का नाम भारत पर हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया है, जिनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है। संगठन और उसका नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी उपायों के दायरे में हैं।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि जेईएम के संस्थापक मसूद अजहर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण काफी हद तक अलग-थलग रहे हैं, जबकि बहावलपुर सुविधा का संचालन संगठन के वरिष्ठ सदस्य संभाल रहे हैं।
इस सुविधा की कथित बहाली भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच सामने आई है और इससे नई दिल्ली की यह चिंता और गहरी हुई है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से संचालित आतंकवादी ढांचे को स्थायी रूप से समाप्त करने में विफल रहा है।
यदि इसकी पुष्टि होती है, तो इस परिसर का पुनर्निर्माण भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक और विवाद का विषय बन सकता है। इससे यह भारतीय तर्क भी और मजबूत हो सकता है कि आतंकवाद-रोधी प्रतिबद्धताओं के साथ सत्यापन योग्य और निरंतर कार्रवाई भी जरूरी है।