पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को राज्य पुलिस, अग्निशमन और आपात सेवा, वन विभाग तथा नागरिक सुरक्षा यानी आपदा प्रबंधन विभागों में सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की। यह निर्णय केंद्र की अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले कर्मियों के सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और परिचालन अनुभव का लाभ लेने के उद्देश्य से लिया गया है।
यह घोषणा गार्डन रीच में आयोजित कार्यक्रम के बाद की गई, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड की पांच ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला रखी। अधिकारी ने रक्षा मंत्री को आरक्षण के बारे में जानकारी दी और बताया कि सिंह को यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि अग्निवीरों के लिए पुलिस, अग्निशमन, वन और नागरिक सुरक्षा में 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षण की प्रमुख बातें
यह 20 प्रतिशत कोटा उन चार अहम विभागों पर लागू होगा, जो कानून-व्यवस्था, आपात प्रतिक्रिया, वन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना, नौसेना और वायु सेना में अग्निवीरों को मिलने वाला कठोर प्रशिक्षण सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, आपात स्थितियों से निपटने और आपदाओं के समय त्वरित कार्रवाई में उपयोगी साबित होगा।
यह कदम पश्चिम बंगाल को उन कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ जोड़ता है, जहां पूर्व अग्निवीरों के लिए इसी तरह के क्षैतिज आरक्षण पहले से लागू किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों ने समान पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है, जबकि कुछ राज्यों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। पश्चिम बंगाल के वर्ष 2026 के बजट में भी एक लाख सरकारी रिक्तियां भरने की योजना के तहत अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का संकेत दिया गया था।
‘अर्जुन वाहिनी’: नई आपदा प्रतिक्रिया बल
आरक्षण के साथ-साथ राज्य सरकार 200 सदस्यीय विशेष आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा बल ‘अर्जुन बहिनी’ या ‘अर्जुन वाहिनी’ भी बना रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तर्ज पर तैयार की जा रही इस इकाई को आधुनिक तकनीक, वाहनों और उपकरणों से लैस किया जाएगा, ताकि त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव कार्य किए जा सकें।
इस बल के सितंबर 2026 में कार्यशील होने की योजना है और मुख्यमंत्री इसके उद्घाटन की तैयारी में हैं। चूंकि अग्निवीरों का पहला बैच जनवरी 2027 के आसपास ही चार वर्ष की सेवा पूरी करेगा, इसलिए शुरुआती टुकड़ी में सैनिक बोर्ड के माध्यम से चुने गए 200 पूर्व सैनिक शामिल किए गए हैं। क्षेत्रीय जोखिम के अनुसार तैनाती की योजना बनाई गई है।
इनमें 100 कर्मियों को कोलकाता में शहरी आपात स्थितियों और इमारत ढहने जैसी घटनाओं के लिए, 50 कर्मियों को पहाड़ी क्षेत्रों में मुख्य रूप से दार्जिलिंग इलाके में भूस्खलन से निपटने के लिए, और 50 कर्मियों को सागर-काकद्वीप तटीय क्षेत्र में चक्रवात और बाढ़ की प्रतिक्रिया के लिए तैनात किया जाएगा।
अधिकारी ने अर्जुन वाहिनी के गठन को जून 2026 में तारातला गोदाम ढहने की घटना से सीधे जोड़ा। कोलकाता के तारातला क्षेत्र में निर्माणाधीन गोदाम की छत 24 जून को गिर गई थी, जिसमें कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए थे। मृतकों की संख्या 16 तक पहुंच गई और कई लोग घायल हुए। बचाव कार्यों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारतीय सेना, कोलकाता पुलिस, अग्निशमन सेवा और अन्य एजेंसियां शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के साथ-साथ 2020 के अम्फान चक्रवात के अनुभवों ने बड़े और निर्माण गतिविधियों से भरे शहर के लिए बेहतर सुसज्जित, तेज प्रतिक्रिया देने वाले राज्य स्तरीय आपदा बल की जरूरत को रेखांकित किया।
उपलब्ध होने पर अग्निवीरों को इस बल में शामिल किया जाएगा। सरकार ने पूर्व सैनिकों के रोजगार को लेकर सैनिक बोर्ड के साथ व्यापक सहयोग भी शुरू किया है।
स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी की पुनर्बहाली
संबंधित घोषणा में अधिकारी ने राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में राष्ट्रीय कैडेट कोर को फिर से शुरू करने और उसका विस्तार करने की योजना भी जताई। यह पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के रुख से अलग है, जिसने कई संस्थानों में एनसीसी नामांकन बंद कर दिया था और उसकी जगह ‘जय हिंद बाहिनी’ शुरू की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र उस एनसीसी प्रशिक्षण से वंचित रह गए, जो अनुशासन और देशभक्ति विकसित करता है। उन्होंने यह मुद्दा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उठाया, जिन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज मौजूदा प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि वे इस विषय पर रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखेंगे। एनसीसी प्रमाणपत्र को राज्य पुलिस, अग्निशमन सेवाओं और अन्य वर्दीधारी पदों की भर्ती में अतिरिक्त योग्यता के रूप में भी देखा जा रहा है, साथ ही यह युवाओं को सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक सेवाओं की तैयारी में मदद करेगा।
अग्निपथ योजना की पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को सेना, नौसेना और वायु सेना में अग्निवीर के रूप में चार वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता है। प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत कर्मियों को नियमित संवर्ग में बनाए रखा जा सकता है। शेष कर्मियों को सेवा निधि पैकेज के साथ बाहर किया जाता है और उनसे नागरिक अवसर तलाशने की अपेक्षा की जाती है।
कई राज्य सरकारों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने पुलिस, अग्निशमन, वन, जेल और अन्य सुरक्षा-संबंधी भूमिकाओं में उनके समायोजन के लिए कोटा, आयु में छूट और कुछ शारीरिक या लिखित परीक्षाओं से छूट जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। बीएसएफ और एसएसबी जैसे केंद्रीय बलों ने कुछ मामलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए सिपाही पदों की 50 प्रतिशत रिक्तियां आरक्षित की हैं।
प्रभाव और संदर्भ
पश्चिम बंगाल की यह घोषणा शुरुआती चरण में उपलब्ध होने वाले अग्निवीरों के पहले समूह के लिए राज्य सरकार की नौकरियों का एक स्पष्ट रास्ता बनाती है, जहां उनके प्रशिक्षण को महत्व दिया जाएगा। इससे शहरी, पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता भी मजबूत होगी। साथ ही एनसीसी को पुनर्जीवित करने की पहल सैन्य और नागरिक सुरक्षा भूमिकाओं के लिए अनुशासित युवाओं की एक नई श्रृंखला तैयार करने का प्रयास है।
इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अग्निपथ योजना और केंद्र की उस सलाह की आलोचना की थी, जिसमें राज्यों से सेवानिवृत्त अग्निवीरों की भर्ती को प्राथमिकता देने को कहा गया था। राज्य की मौजूदा भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार ने अलग रुख अपनाते हुए आरक्षण और अर्जुन वाहिनी को प्रशिक्षित जनशक्ति के उपयोग और स्थानीय आपदा-प्रतिक्रिया की कमी को दूर करने की व्यावहारिक पहल बताया है।
20 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक अधिसूचना, जिसमें यह क्षैतिज होगा या नहीं, किन पदों पर लागू होगा, आयु में छूट क्या होगी और परीक्षाओं से कोई छूट मिलेगी या नहीं, बाद में जारी किए जाने की उम्मीद है। अर्जुन वाहिनी को तत्काल परिचालन कदम के रूप में तैयार किया जा रहा है, जबकि अग्निवीरों की तैनाती बाद के चरणों में की जाएगी।