लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, एवीएसएम, वीएसएम, सेना कमांडर, दक्षिणी कमान ने रेजिमेंट के कर्नल के रूप में पूर्वी लद्दाख में तैनात भारतीय सेना की बख़्तरबंद रेजिमेंटों का दौरा किया।
दौरे के दौरान सेना कमांडर ने कठिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में कार्यरत बख़्तरबंद रेजिमेंटों के पेशेवर मानकों, परिचालन तैयारी और विकसित होती क्षमताओं की समीक्षा की।
उन्होंने कठिन भूभाग और जलवायु परिस्थितियों में उच्च स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखने की संरचनाओं की क्षमता का भी आकलन किया। समीक्षा में क्षमता बढ़ाने और युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुसार ढलने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
दौरे का एक प्रमुख बिंदु बख़्तरबंद रेजिमेंटों में प्रौद्योगिकी का समावेश रहा। सेना कमांडर ने आधुनिक तकनीकों को अपनाने और युद्धक्षेत्र की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप परिचालन क्षमता बढ़ाने पर दिए जा रहे जोर की सराहना की।
पूर्वी लद्दाख का ऊंचाई वाला वातावरण विशेष परिचालन चुनौतियां प्रस्तुत करता है, जिसके लिए निरंतर तैयारी, धैर्य, गतिशीलता और अनुकूलनशीलता की आवश्यकता होती है। इस दौरे ने यह परखने का अवसर दिया कि बख़्तरबंद रेजिमेंट इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी प्रभावशीलता कैसे बनाए रख रही हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने दौरे के दौरान अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और सैनिकों से भी बातचीत की। उनकी यह बातचीत आत्मीयता और प्रोत्साहन से भरी रही, साथ ही इसने पेशेवर रवैये, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण के महत्व को भी रेखांकित किया।
सेना कमांडर ने सभी रैंकों को उच्च परिचालन तत्परता बनाए रखने और क्षमता वृद्धि तथा प्रौद्योगिकी आत्मसात करने पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए प्रेरित किया।
रेजिमेंट के कर्नल के रूप में उनकी बातचीत ने बख़्तरबंद कोर की गौरवशाली परंपराओं, मूल्यों और विरासत को संरक्षित करने के महत्व को भी उजागर किया, जबकि भविष्य के युद्ध की आवश्यकताओं के लिए तैयारी जारी है।
इस दौरे ने भारतीय सेना के उस फोकस को भी पुष्ट किया, जिसके तहत वह परिचालन अनुभव, प्रौद्योगिकीय प्रगति और पेशेवर उत्कृष्टता को जोड़कर अपनी बख़्तरबंद संरचनाओं को चुनौतीपूर्ण परिचालन वातावरण में चुस्त, सक्षम और मिशन-तैयार बनाए रखना चाहती है।