नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने विमान अपहरण की आशंका से निपटने के लिए एक मॉक ड्रिल की। इस अभ्यास का उद्देश्य संचालन संबंधी तैयारियों, प्रतिक्रिया समय और सामरिक तत्परता का आकलन करना था।
यह अभ्यास इस बात की जांच के लिए आयोजित किया गया कि सुरक्षा कर्मी विमानन सुरक्षा से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। साथ ही, अलग-अलग प्रतिक्रिया दलों के बीच समन्वय की क्षमता भी परखी गई।
मॉक ड्रिल के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के कर्मियों ने ऐसे कृत्रिम आपात हालात में हिस्सा लिया, जिन्हें संभावित अपहरण की घटनाओं से निपटने की तैयारी जांचने के लिए बनाया गया था। अभ्यास में संचालन दक्षता, सामरिक प्रतिक्रिया क्षमता और उच्च जोखिम वाली स्थिति में टीमों के बीच तालमेल पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस अभ्यास से मौजूदा सुरक्षा प्रतिक्रिया तंत्र का भी मूल्यांकन किया गया और विमानन आपात स्थितियों के दौरान प्रभावी संवाद तथा समन्वित कार्रवाई के महत्व को दोहराया गया।
भारत के प्रमुख हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की भूमिका यात्रियों, हवाई अड्डा अवसंरचना और विमानन संचालन को संभावित सुरक्षा खतरों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हवाई सुरक्षा मानकों को ऊंचा बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अभ्यास और तैयारियों की कवायद बल की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इससे कर्मियों को बदलते खतरों का सामना करने के लिए तैयार बनाए रखने में मदद मिलती है।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किया गया यह ताजा अभ्यास विमानन सुरक्षा को मजबूत करने, निरंतर प्रशिक्षण को बनाए रखने और संभावित आपात स्थितियों में त्वरित तथा समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के संकल्प को और मजबूत करता है।