नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ केंद्र से स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स अभियान (एसपीएचईआर) को रवाना किया। यह आयोजन सेना सेवा कोर दिवस और 12वें सेना सेवा कोर पुनर्मिलन के अवसर पर किया गया।
यह महत्वाकांक्षी 4,850 किलोमीटर लंबा अभियान भारत के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय क्षेत्रों में विद्युत वाहनों की क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ भारतीय सेना में सतत गतिशीलता, प्रौद्योगिकीय नवाचार और कार्यात्मक अनुकूलनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
यह अभियान दुर्गम हिमालयी और उत्तर-पूर्वी भूभाग से होकर गुजरेगा। इसमें उत्तराखंड के माणा, सिक्किम के नाथू ला और अरुणाचल प्रदेश के बूम ला जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इस यात्रा में अत्यंत कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में विद्युत गतिशीलता समाधानों के प्रदर्शन, सहनशक्ति और विश्वसनीयता की परीक्षा होगी।
यह अभियान 16 नवंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के वॉलोंग युद्ध स्मारक पर समाप्त होगा, जो वॉलोंग दिवस के साथ मेल खाएगा। प्रतिभागी 1962 के भारत-चीन युद्ध में वॉलोंग की ऐतिहासिक लड़ाई के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
वॉलोंग की लड़ाई भारतीय सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है। इसे देश की पूर्वी सीमाओं की रक्षा के दौरान भारतीय सैनिकों द्वारा असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प के लिए याद किया जाता है।
“जय से विजय” की भावना को आत्मसात करते हुए यह अभियान आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को भी आगे बढ़ाता है। इसका उद्देश्य कठिन सैन्य परिवेश में विद्युत वाहनों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं की पड़ताल करना है।
यह पहल ऊँचाई वाले पर्वतीय दर्रों, दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों और कठिन सड़क नेटवर्क में विद्युत गतिशीलता के आकलन का अवसर देगी। इससे भारतीय सेना को उभरती परिवहन प्रौद्योगिकियों और उनके संभावित कार्यात्मक उपयोगों को समझने में सहायता मिलेगी।
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सप्तधारा दृष्टि के हरित गतिशीलता स्तंभ को भी सुदृढ़ करता है। इसमें पर्यावरणीय सततता, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर बल दिया गया है।
सेना सेवा कोर भारतीय सेना की कार्यात्मक क्षमता को रसद, परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं के माध्यम से बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एसपीएचईआर जैसी पहलें कोर के आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने और बदलती कार्यात्मक आवश्यकताओं के अनुसार स्वयं को ढालने के प्रयासों को दर्शाती हैं।
सैन्य विरासत, साहसिकता, प्रौद्योगिकीय प्रयोग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को जोड़ते हुए स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स अभियान भारतीय सेना की नवाचार और सतत गतिशीलता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। साथ ही यह देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के बलिदान को भी सम्मानित करता है।