भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अभ्यास तरंग शक्ति के दौरान एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान तक भारतीय पहुंच पर लगी रोक को लेकर अमेरिकी वायु सेना के एक वरिष्ठ कमांडर पर हल्का-फुल्का कटाक्ष किया। उनके इस बयान ने रक्षा सहयोग और वॉशिंगटन की अपनी सबसे उन्नत सैन्य तकनीकों पर कड़ी नियंत्रण नीति के बीच के अंतर को सामने ला दिया।
12 अक्टूबर को दो सप्ताह लंबे बहुराष्ट्रीय अभ्यास के समापन से पहले सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना उस अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के करीब तक भी नहीं जा सकी, जबकि भारत के उस विमान को हासिल करने की संभावना पर चर्चा होती रही है। यह टिप्पणी जोधपुर में हुई 45 मिनट की ब्रीफिंग के दौरान आई, जिसमें दुनिया भर के वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी मौजूद थे।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, “मैं पीएसीएएफ कमांडर से कह रहा था कि आपके लोग हमें एफ-35 के पास भी नहीं आने देते और आप उसे हमें बेचने की बात करते हैं। अमेरिका की ओर से हमें एफ-35 खरीदने का कोई प्रस्ताव नहीं है।” उन्होंने यह बात इस सवाल के जवाब में कही कि क्या वॉशिंगटन ने औपचारिक रूप से भारत को यह विमान देने की पेशकश की है।
आईएएफ प्रमुख के बगल में संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रशांत वायु सेना के कमांडर जनरल केविन बी श्नाइडर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठे थे। सिंह ने बातचीत के दौरान इस मुद्दे को कई बार उठाया और अभ्यास के दौरान भारतीय पायलटों को विमान तक सीमित पहुंच मिलने की ओर ध्यान दिलाया।
पिछले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि वॉशिंगटन भारत को एफ-35 लड़ाकू विमान हासिल कराने का रास्ता तैयार कर रहा है। लेकिन सिंह के बयान से यह संकेत मिला कि सार्वजनिक चर्चा के बावजूद नई दिल्ली को कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया था।
संयुक्त अभ्यास और अमेरिकी उन्नत सैन्य तकनीक तक सीमित पहुंच के बीच दिखी विसंगति पर सवालों का जवाब देते हुए श्नाइडर ने कहा कि पहुंच सुरक्षा प्रोटोकॉल और वर्गीकरण संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर तय होती है।
उन्होंने कहा, “प्रोग्राम स्तर के सुरक्षा वर्गीकरण निर्देश होते हैं जो तय करते हैं कि हम क्या साझा कर सकते हैं, कब साझा करते हैं और उसे कैसे सुरक्षित रखते हैं।”
पीएसीएएफ कमांडर ने बताया कि संवेदनशील प्रणालियों तक पहुंच से जुड़े फैसले केवल उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं होते। उन्होंने कहा कि नीतियां बदल भी सकती हैं, लेकिन वर्गीकृत तकनीकों और क्षमताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई निर्णय केंद्रीय स्तर पर लिए जाते हैं।
बाद में सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां हल्के-फुल्के अंदाज में की गई थीं और उन्हें रक्षा साझेदारों के बीच दोस्ताना मजाक के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने दोनों वायु सेनाओं के संबंधों की तुलना विस्तारित परिवार से की, जहां सहयोग के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने की सीमाएं भी बनी रहती हैं।
उन्होंने कहा, “यह एक परिवार जैसा है, एक विस्तारित परिवार और विस्तारित पड़ोस जैसा। इसमें यह आपकी अपनी सीमाएं होती हैं कि आप क्या साझा करते हैं और क्या नहीं। यह हर जगह जारी रहता है।”
अपनी बात को आगे समझाते हुए आईएएफ प्रमुख ने कहा कि एफ-35 के और करीब जाने वाली उनकी टिप्पणी सहयोग को मजबूत करने के लिए एक दोस्ताना सुझाव थी। इस संवाद ने सैन्य सहभागिता बढ़ाने और उन्नत रक्षा तकनीकों की सुरक्षा बनाए रखने के बीच संतुलन को उजागर किया।
अभ्यास तरंग शक्ति भारत में किसी अभ्यास के दौरान एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों की पहली भागीदारी का अवसर था। संयुक्त राज्य अमेरिका ने जोधपुर में छह एफ-35 तैनात किए थे, जिससे भाग लेने वाली वायु सेनाओं को अभ्यास के दौरान उनकी मौजूदगी देखने का मौका मिला, हालांकि विमान तक पहुंच सीमित रही।
इस घटना ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास और खरीद को लेकर भारत के विकल्पों पर भी फिर से ध्यान खींचा। रूस अपने सु-57 विमान को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन भारत ने अभी तक इस विमान पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
नई दिल्ली अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम के तहत विकसित कर रही है। यह कार्यक्रम उन्नत युद्धक विमानन प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमता विकसित करने के लिए बनाया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “आगे देखते हुए, एएमसीए कार्यक्रम पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
एएमसीए पहल भारत के घरेलू विमानन और अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता को मजबूत करने तथा उन्नत लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के प्रयास को दर्शाती है। एफ-35 प्रकरण ने जहां संवेदनशील विदेशी प्लेटफार्मों तक पहुंच से जुड़ी सीमाओं को उजागर किया, वहीं भारत का स्वदेशी कार्यक्रम दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में स्टील्थ लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने के केंद्र में बना हुआ है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, जो 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, ने यह टिप्पणी ऐसे समय की जब बहुराष्ट्रीय अभ्यास में दुनिया भर की वायु सेनाएं एक साथ आई थीं। ब्रीफिंग में वायु सेना-नामित एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित भी वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थे।