रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को भारतीय वायु सेना के लिए समर्पित संचार उपग्रह क्षमता और भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो की खरीद के लिए लगभग 4,106 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।
नई दिल्ली में हुए इन समझौतों पर रक्षा विभाग के अधिग्रहण महानिदेशक और अतिरिक्त सचिव श्री ए. अंबरासु की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। दोनों करार सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत घरेलू रक्षा निर्माण और स्वावलंबन को आगे बढ़ाते हैं।
भारतीय वायु सेना के लिए जीसैट-7सी संचार उपग्रह
मंत्रालय ने जीसैट-7सी उपग्रह क्षमता के लिए न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड, बेंगलुरु को 2,563 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया है। यह भारतीय अंतरिक्ष विभाग का वाणिज्यिक अंग है। यह उपग्रह भारत में ही अभिकल्पित, विकसित और निर्मित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना की परिसंपत्तियों के लिए सुरक्षित, सक्षम और निर्बाध संचार क्षमता को बढ़ाना है, जिससे परिचालन प्रभावशीलता मजबूत होगी।
जीसैट-7सी, भारतीय वायु सेना का दूसरा समर्पित संचार उपग्रह होगा। इससे पहले जीसैट-7ए दिसंबर 2018 में प्रक्षेपित किया गया था। नया उपग्रह वायुसेना अड्डों, जमीनी राडारों, वायुजनित पूर्व चेतावनी मंचों और अन्य परिसंपत्तियों के बीच संपर्क को समर्थन देगा, जिसमें दृष्टि-सीमा से परे संचालन भी शामिल है।
भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो
दूसरा अनुबंध भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, हैदराबाद के साथ 1,543 करोड़ रुपये में वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो की आपूर्ति के लिए किया गया। वरुणास्त्र एक स्वदेशी, जलपोत से प्रक्षेपित पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की नौसैनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला ने विकसित किया है। इसकी उन्नत युद्धाभ्यास क्षमता इसे लंबी दूरी पर दुश्मन पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम बनाती है, जिससे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता बढ़ती है।
निर्माता विनिर्देशों के अनुसार वरुणास्त्र की लंबाई 7.780 मीटर, व्यास 533.4 मिमी और युद्ध भार लगभग 1,850 किलोग्राम है, जबकि अभ्यास संस्करण का भार लगभग 1,605 किलोग्राम है। यह चांदी-ऑक्साइड जिंक बैटरियों और विपरीत दिशा में घूमने वाले प्रोपेलरों से विद्युत चालित है तथा इसकी गति 27 और 40 समुद्री मील के रूप में चुनी जा सकती है। यह 8 मीटर से 600 मीटर की गहराई में काम करता है और इसकी सीमा लगभग 40 किलोमीटर है। इसे पहली बार 2016 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और इसे उथले तथा गहरे पानी, दोनों में पनडुब्बियों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है, जिनमें ध्वनिक प्रतिरोधक उपायों वाले वातावरण भी शामिल हैं।
भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने कहा है कि यह आदेश 42 महीनों में पूरा किया जाएगा। कंपनी पहले भी पूर्व अनुबंधों के तहत नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो का उत्पादन और आपूर्ति कर चुकी है।
रणनीतिक महत्व
ये दोनों अनुबंध अलग-अलग परिचालन जरूरतों को पूरा करते हैं। एक ओर भारतीय वायु सेना के लिए अंतरिक्ष-आधारित सुरक्षित संचार उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं दूसरी ओर भारतीय नौसेना की जल-तल युद्ध क्षमता सुदृढ़ होगी। साथ ही, इनमें अंतरिक्ष क्षेत्र में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और नौसैनिक हथियार क्षेत्र में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड तथा नौसैनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला की भागीदारी से स्वदेशी महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को भी बल मिलता है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इससे पहले नवंबर 2021 में जीसैट-7सी कार्यक्रम के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी थी। मौजूदा अनुबंध मूल्य समर्पित संचार उपग्रह क्षमता के लिए अंतिम बातचीत के बाद तय लागत को दर्शाता है।
ये खरीदें अंतरिक्ष और समुद्र-तल क्षेत्रों में संप्रभु सैन्य क्षमताओं के निर्माण की चल रही प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रणालियों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना भी है।