भारतीय सेना ने अपनी लंबे समय से चली आ रही सोशल मीडिया नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जो आधुनिक सूचना युद्ध की वास्तविकताओं और डिजिटल प्लेटफार्मों की व्यापक भूमिका को दर्शाता है। यह संशोधित नीति 25 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगी, जिसके तहत सेवा में सक्रिय कर्मियों को Instagram और अन्य कुछ विशेष ऐप्स तक केवल “दृश्य-केवल” या निष्क्रिय मोड में पहुँचने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम सेना मुख्यालय द्वारा Directorate General of Military Intelligence (DGMI) के माध्यम से जारी किया गया है, जो पहले की सभी तरह की प्रतिबंधात्मक नीतियों से हटकर एक नई दिशा में कदम बढ़ाता है, जबकि ऑपरेशनल सुरक्षा (OPSEC) के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: प्रतिबंधों से मापी गई पहुँच तक
भारतीय सेना का सोशल मीडिया के साथ संबंध सतर्क रहा है, जो कई सुरक्षा घटनाओं और भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित हुआ है। जुलाई 2020 में, चीन के साथ बढ़ते सीमा विवाद और डेटा गोपनीयता की चिंताओं के बीच, सेना ने सभी अधिकारियों और सैनिकों के लिए Facebook और Instagram जैसे प्लेटफार्मों पर खातों को हटाने का आदेश दिया था। इस आदेश में 89 मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गया, जिनमें से 59 का संबंध चीन से था—इनमें TikTok, WeChat और PUBG Mobile जैसे लोकप्रिय ऐप्स शामिल थे। इन पर प्रतिबंध का कारण जासूसी, डेटा लीक और मैलवेयर के जोखिमों को बताया गया था। अनुपालन न करने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
समय के साथ, सुरक्षा खतरों के बढ़ने के कारण इन प्रतिबंधों की समय-समय पर समीक्षा की गई और उन्हें और कड़ा किया गया। कई मामलों में सैनिकों ने अनजाने में ऑपरेशनल विवरण साझा किए, जिससे संभावित सुरक्षा से समझौते का जोखिम बढ़ा। डिजिटल साक्षरता में वृद्धि और वास्तविक समय की जानकारी की आवश्यकता को देखते हुए, सेना ने नियंत्रित पहुँच के महत्व को पहचाना है।
संशोधित नीति के मुख्य विवरण
नई नीति में “निष्क्रिय भागीदारी” पर जोर दिया गया है। यहाँ इसके प्रमुख प्रावधानों का विवरण दिया गया है:
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Instagram पहुँच: कर्मियों को केवल सामग्री को देखने और निगरानी के लिए Instagram का उपयोग करने की अनुमति है। इस लक्ष्य में “जानकारी की जागरूकता” शामिल है। हालांकि, नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि “Instagram पर कोई टिप्पणी या विचार संप्रेषित नहीं किए जाएंगे।” किसी भी प्रकार की बातचीत—जैसे कि पोस्ट करना, टिप्पणी करना, लाइक करना, शेयर करना, या डायरेक्ट मैसेजिंग—कड़ाई से प्रतिबंधित है। यह “दृश्य-केवल” मोड सुनिश्चित करता है कि सैनिक बिना किसी डिजिटल फुटप्रिंट के अवलोकन कर सकें।
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अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म: YouTube, X (पूर्व में Twitter), और Quora पर аналогिक नियम लागू होते हैं, जहाँ ज्ञान अर्जित करने के लिए निष्क्रिय उपभोग की अनुमति है।
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संदेश और संचार ऐप: WhatsApp, Telegram, Signal, और Skype का इस्तेमाल केवल ज्ञात और सत्यापित संपर्कों के साथ अनक्लासिफाइड सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए किया जा सकता है।
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पेशेवर नेटवर्क: LinkedIn का उपयोग पेशेवर उद्देश्यों के लिए अधिकृत है, जैसे कि रिज्यूमे अपलोड करना या संभावित नियोक्ताओं/कर्मियों की रिसर्च करना।
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प्रतिबंधित गतिविधियाँ और उपकरण: पहले से प्रचलित 89 ऐप्स पर प्रतिबंध जारी रहेगा, जिनमें Facebook और TikTok जैसे उच्च जोखिम वाले ऐप्स शामिल हैं।
इस संरचित दृष्टिकोण से 1.3 मिलियन सक्रिय कर्मियों के लिए नीति की स्पष्टता सुनिश्चित होती है, जिसमें DGMI कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।
संशोधन के पीछे के कारण
इस निर्णय का मुख्य कारण कनेक्टिविटी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। ऐसे समय में जब सोशल मीडिया कहानियों को प्रेरित करता है और दुष्प्रचार तेजी से फैलता है, सेना इसे एक निगरानी उपकरण के रूप में देखती है।
हालांकि, यह नीति बिना विवाद के नहीं है। कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यहां तक कि दृश्य-केवल पहुँच भी उपकरणों को मैलवेयर या ट्रैकिंग के जोखिम में डाल सकती है।
इसी तरह, इस नीति का असर कर्मियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा। यह नीति सैनिकों को बाहरी दुनिया में झलक दिखाएगी, जिससे उनकी आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ सकती है।
इस प्रकार, भारतीय सेना की नीति संशोधन डिजिटल युग की मांगों का संतुलित जवाब है। Instagram और अन्य प्लेटफार्मों पर निष्क्रिय पहुँच की अनुमति देकर, यह सूचित कर्मियों को बढ़ावा देती है जबकि राष्ट्र की सुरक्षा की रक्षा भी करती है।