भारतीय सेना ने 12 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी की मौजूदगी में जवानों के लिए ‘भारत चावल’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य सैनिकों को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता को बेहतर करना है, जबकि भारतीय खाद्य निगम के साथ किए गए समझौता ज्ञापन से आपात परिस्थितियों में सेना को चिन्हित एफसीआई ढांचे का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी।
इस व्यवस्था के तहत उच्च गुणवत्ता वाला चावल सीधे आर्मी सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा, जिनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे दूरस्थ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल हैं। इससे स्थानीय एफसीआई इकाइयों से चावल लेने की मौजूदा प्रक्रिया खत्म होगी और राशन वितरण अधिक सुगम होगा। साथ ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात कर्मियों पर पड़ने वाला रसद बोझ भी कम होगा।
लॉन्च कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने भारत चावल को किसानों और सैनिकों को जोड़ने वाला विश्वास का सेतु बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना को ठोस रूप देती है और दिखाती है कि किसानों की मेहनत कैसे सशस्त्र बलों की ताकत और तत्परता में योगदान करती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उच्च गुणवत्ता वाला चावल निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पैकेजिंग को उपयोग के लिहाज से अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। उनके अनुसार यह पहल भले छोटी दिखे, लेकिन दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में राशन पहुंचाने वाले सैनिकों को इससे बड़ी कार्यात्मक राहत मिलेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य तत्परता केवल हथियारों और उपकरणों पर नहीं, बल्कि विशेष रूप से कठिन वातावरण में तैनात सैनिकों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, मनोबल और सहनशक्ति पर भी निर्भर करती है। उन्होंने जवानों के कल्याण को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया और कहा कि पौष्टिक भोजन, विश्वसनीय उपकरण और व्यापक प्रशिक्षण उनकी चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाते हैं।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में रसद के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। राजनाथ सिंह के अनुसार सैन्य प्रभावशीलता अब केवल लड़ाकू प्लेटफार्मों और तकनीक पर नहीं, बल्कि आपूर्ति शृंखला, भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, गोदाम अवसंरचना और आवश्यक सामग्री की समय पर पुनःपूर्ति पर भी निर्भर करती है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने यह स्पष्ट किया कि अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों और लंबे समय तक चलने वाले अभियानों को सहारा देने के लिए मजबूत रसद व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी समय बहुत कम हो सकता है और शून्य-चेतावनी वाली स्थितियां भी सामने आ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग वाले संघर्षों में रसद शृंखलाओं और आपूर्ति नेटवर्क की परीक्षा होगी, इसलिए रसद में लचीलापन विकसित करना जरूरी है। उनके अनुसार एफसीआई के साथ यह समझौता ज्ञापन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौते के तहत भारतीय सेना को देश भर में एफसीआई के भंडारगृह, भंडारण सुविधाओं, आधुनिक साइलो, सामग्री-हैंडलिंग उपकरण और प्रशिक्षित मानवबल का उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। इसका उद्देश्य आपातकाल में आपूर्ति की उपलब्धता और उसकी तैनाती को बेहतर बनाना तथा मौजूदा नागरिक अवसंरचना को सैन्य रसद योजना से जोड़ना है।
राजनाथ सिंह ने इस समझौते को द्वि-उपयोगी दृष्टिकोण का उदाहरण बताया, जिसमें राष्ट्रीय अवसंरचना नागरिक और रक्षा, दोनों जरूरतों के काम आती है। उन्होंने कहा कि जैसे लड़ाकू विमान एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हैं और सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाए गए सड़क व पुल स्थानीय लोगों के भी काम आते हैं, वैसे ही जरूरत पड़ने पर एफसीआई के गोदाम भी सेना की आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनेंगे।
उन्होंने कहा कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और राष्ट्रीय मजबूती बढ़ेगी। उनके अनुसार मौजूदा अवसंरचना को परिचालन योजना से जोड़ने पर समय की बचत होती है और संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल संभव होता है। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि परिचालन तत्परता के लिए बल-गुणक और समग्र सरकार तथा समग्र राष्ट्र के दृष्टिकोण का हिस्सा बताया।
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सरकार हथियारों, तकनीक, वर्दी, उपकरण और प्रशिक्षण में आत्मनिर्भरता व आधुनिकीकरण के माध्यम से सैनिकों के कल्याण को सुधारने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि नवाचार और समन्वय गुणवत्ता वाली आपूर्ति सुनिश्चित करने, रसद नेटवर्क मजबूत करने, अग्रिम क्षेत्रों तक आपूर्ति बेहतर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नागरिक अवसंरचना के अधिक प्रभावी उपयोग में आवश्यक हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों को यह विश्वास होना चाहिए कि पूरा राष्ट्र उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि जवानों को समर्थन देने की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ किसानों, सहकारी क्षेत्र, नागरिक प्रशासन और पूरे देश की है।
कार्यक्रम में प्रल्हाद जोशी ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि देश की रक्षा करने वाले कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना उनके मंत्रालय के लिए गर्व और दायित्व का विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे सैनिकों की जरूरतें प्राथमिकता में रहनी चाहिए।
इस समारोह में सेना प्रमुख जनरल दिराज सेठ, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा, रक्षा मंत्रालय, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, एफसीआई, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड और सहकारी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
भारत चावल की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था
सामग्री महानिदेशालय, आपूर्ति एवं परिवहन की अगुवाई में विकसित भारत चावल सैनिकों से मिले निरंतर सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है और इसका लक्ष्य जवानों को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता सुधारना है। यह चावल निर्धारित रक्षा मानकों के अनुसार पिसा जाएगा और 2026–27 वित्त वर्ष के दौरान एनएएफईडी के माध्यम से आपूर्ति किया जाएगा।
इस उत्पाद की आवश्यक गुणवत्ता जांच की जाएगी और इसमें बाहरी पदार्थ तथा मिश्रण नहीं होंगे। इसमें टूटे, क्षतिग्रस्त और बदरंग दानों की मात्रा भी न्यूनतम रखी जाएगी। इसे 10 किलोग्राम और 30 किलोग्राम की थैलियों में खरीदा जाएगा ताकि खासकर अग्रिम चौकियों पर, जहां सामान ढोना कठिन होता है, हैंडलिंग और परिवहन आसान हो सके।
यह पहल भारतीय सेना, एफसीआई, एनएएफईडी और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच लगभग 18 महीनों के समन्वय के बाद सामने आई है। इसका उद्देश्य सैनिकों तक मानकीकृत, गुणवत्तापूर्ण चावल अधिक प्रत्यक्ष और अधिक दक्ष आपूर्ति व्यवस्था के जरिए पहुंचाना है।
एफसीआई समझौते से परिचालन तैयारी को मजबूती
यह समझौता ज्ञापन आपात परिस्थितियों में सेना को चिन्हित एफसीआई भंडारगृहों, श्रम संसाधनों और सामग्री-हैंडलिंग उपकरणों का उपयोग करने के लिए औपचारिक ढांचा प्रदान करता है। इसमें ऑपरेशन सिंदूर सहित परिचालन अनुभवों को आधार बनाया गया है, जिसने अचानक जरूरतों पर प्रतिक्रिया देने और लंबे सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली रसद व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित किया था।
सेना की आपूर्ति और परिवहन इकाइयों तथा एफसीआई के क्षेत्रीय और मंडलीय कार्यालयों के बीच गठन स्तर पर समन्वय किया जाएगा। इस व्यवस्था को परिचालन रसद योजनाओं में भी शामिल किया जाएगा। यह समझौता ज्ञापन पांच वर्ष तक वैध रहेगा और आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा।
इस समझौते से रासन, भंडार और उपकरणों के लिए अतिरिक्त भंडारण, तेजी से तैनाती, फैलाव और परिचालन क्षेत्रों के निकट अग्रिम स्थिति में रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। मौजूदा राष्ट्रीय अवसंरचना का उपयोग करते हुए यह व्यवस्था सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं की त्वरित प्रतिक्रिया और मजबूती बढ़ाने के साथ उपलब्ध संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग का लक्ष्य रखती है।
यह पहल पीएम गति शक्ति की परिकल्पना के अनुरूप है और राष्ट्रीय तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए समग्र सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
सेना ने पिछले कुछ वर्षों में राशन की गुणवत्ता और मात्रा बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें अग्निवीर नवसैनिकों को अतिरिक्त राशन देना और तीनों सेनाओं में राशन मानकों में अधिक समानता बढ़ाना शामिल है। जैविक राशन शुरू करने का प्रस्ताव भी है।
कुल मिलाकर भारत चावल और एफसीआई के साथ समझौता सैनिक कल्याण सुधारने तथा भारतीय सेना को सहारा देने वाले रसद नेटवर्क को मजबूत करने के पूरक प्रयास हैं। जहां चावल की पहल भोजन आपूर्ति की गुणवत्ता और वितरण पर केंद्रित है, वहीं समझौता ज्ञापन आपात परिस्थितियों में सैन्य जरूरतों के लिए नागरिक भंडारण और हैंडलिंग क्षमता के उपयोग का ढांचा देता है।