उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेन्स मैन्युफैक्चरर्स यानी एसआईडीएम के वार्षिक सेमिनार के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर उद्योग जगत के नेता, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, स्टार्टअप और नवप्रवर्तक उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में, जिसका शीर्षक “नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 से प्राप्त अनुभव और आगे की राह” था, सेना कमांडर ने भारत के रक्षा उद्योग की तेज़ प्रगति की सराहना की। उन्होंने सशस्त्र बलों और घरेलू उद्योग के बीच सहयोग को और मज़बूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने उद्योग भागीदारों से केवल प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता की भूमिका तक सीमित न रहने और एक आत्मनिर्भर तथा विश्वसनीय रक्षा तंत्र के निर्माण में प्रमुख सहयोगी बनने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विकास के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि उद्योग क्षेत्र को देश की रक्षा आवश्यकताओं के समर्थन में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनके अनुसार, यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में क्षमताओं के विकास और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
सेमिनार में उद्योग जगत के नेता, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवप्रवर्तकों की भागीदारी ने सैन्य और व्यापक रक्षा विनिर्माण एवं नवाचार तंत्र के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराया। इसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़ी प्रौद्योगिकियों और क्षमताओं के विकास पर काम करने वाले हितधारक शामिल हुए।
सेना कमांडर ने नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 के अनुभवों को रक्षा उद्योग सहयोग की आगे की दिशा से जोड़ा। उन्होंने क्षेत्र की तेज़ वृद्धि की सराहना करते हुए गहरे साझेदारी संबंधों की आवश्यकता पर बल दिया।
आत्मनिर्भरता पर दिया गया उनका जोर भारत की अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित करने और उन्हें समर्थन देने की व्यापक सोच को दर्शाता है। संबोधन में स्थापित निर्माताओं, एमएसएमई और उभरते नवप्रवर्तकों के साथ सशस्त्र बलों के सतत जुड़ाव की आवश्यकता भी सामने आई।
एसआईडीएम के वार्षिक सेमिनार में दिया गया यह संबोधन स्वदेशी रक्षा विकास को आगे बढ़ाने में सैन्य-उद्योग सहयोग के महत्व को फिर से रेखांकित करता है। साथ ही, इसने भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के अनुरूप एक आत्मनिर्भर और विश्वसनीय रक्षा तंत्र के निर्माण में साझेदारी की भूमिका को भी स्पष्ट किया।