मध्य प्रदेश के महू में सैन्य दूरसंचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय के तीन भारतीय सेना अधिकारियों की टीम ने भारतीय सेना टेरियर साइबरक्वेस्ट 2026 के एआई कवच खंड में पहला स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 800 से अधिक टीमों ने भाग लिया था और इसका केंद्रबिंदु साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियां थीं।
विजेता टीम में कैप्टन आदर्श राजपूत, कैप्टन अभिषेक कुमार सिंह और कैप्टन कुनाल वरश्नेय शामिल थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना और साइबरपीस फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में एमसीटीई का प्रतिनिधित्व किया।
टीम ने 36 घंटे के तीव्र ग्रैंड फिनाले में सर्वोच्च स्कोर हासिल करते हुए यह उपलब्धि दर्ज की। उनके प्रदर्शन में तकनीकी दक्षता, समस्या-समाधान की क्षमता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों में उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग की झलक दिखाई दी।
भारतीय सेना टेरियर साइबरक्वेस्ट 2026 ने प्रतिभागियों के लिए साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अग्रिम रक्षा प्रौद्योगिकियों में अपनी क्षमताएं दिखाने का राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया। प्रतियोगिता का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना और आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए उपयोगी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना था।
एआई कवच खंड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उसके साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अनुप्रयोगों पर विशेष जोर दिया गया। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसका महत्व बढ़ता जा रहा है क्योंकि सैन्य संगठन तेजी से डिजिटल प्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपना रहे हैं।
एमसीटीई टीम की यह सफलता उस संस्थान की भूमिका को भी रेखांकित करती है, जो साइबर युद्ध और डिजिटल रक्षा की उभरती चुनौतियों का सामना करने में सक्षम तकनीकी रूप से दक्ष सैन्य कार्मिक तैयार करता है।
महू स्थित यह सैन्य दूरसंचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय भारतीय सेना के सिग्नल कोर का एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है। यह सैन्य संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
टीम की सफलता सेना प्रशिक्षण कमान यानी आर्टरैक की उन प्रशिक्षण पहलों से भी मेल खाती है, जिनमें विशिष्ट और उभरती प्रौद्योगिकियों को भारतीय सेना में समाहित करने पर बल दिया जाता है।
जैसे-जैसे साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध आधुनिक सैन्य अभियानों के अधिक महत्वपूर्ण घटक बन रहे हैं, सेना अपने कर्मियों में विशेष तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने पर लगातार ध्यान दे रही है।
टेरियर साइबरक्वेस्ट 2026 में पहला स्थान भारतीय सेना के उस सतत प्रयास को दर्शाता है, जिसके तहत तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना, साइबर क्षमताओं को मजबूत करना और भविष्य के युद्ध की चुनौतियों के लिए अपने कार्मिकों को तैयार करना शामिल है।