देहरादून के बटालियन अंडर ऑफिसर स्पर्श छेत्री के लिए ओलिव ग्रीन पहनना सिर्फ एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि सैन्य सेवा की चौथी पीढ़ी की पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाना है। उनके परदादा ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी, इसके बाद उनके दादा और पिता पैदल सेना के अधिकारी रहे, जबकि उनकी माता ने सेना शैक्षिक कोर में सेवा की।
ऐसे वातावरण में पले-बढ़े स्पर्श बचपन से ही सैन्य सेवा से जुड़े अनुशासन, साहस, कर्तव्य और प्रतिबद्धता जैसे मूल्यों के संपर्क में रहे। उनके घर में वर्दी कोई अनजाना प्रतीक नहीं थी, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा थी। भारतीय सेना में जाना उनके लिए उसी विरासत को आगे बढ़ाने और देश सेवा की अपनी प्रतिबद्धता को साकार करने जैसा था।
मजबूत सैन्य पृष्ठभूमि होने के बावजूद स्पर्श ने पहले प्रौद्योगिकी क्षेत्र में करियर चुना। उन्होंने थापर विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक किया और आधुनिक अर्थव्यवस्था के तेजी से बदलते क्षेत्रों में से एक में अपनी पेशेवर नींव तैयार की। बाद में उन्होंने एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनी में वरिष्ठ डाटा विश्लेषक के रूप में सफल कॉर्पोरेट करियर बनाया।
यह पद एक समृद्ध कॉर्पोरेट करियर से जुड़ी स्थिरता और अवसर प्रदान करता था। फिर भी सफलता मिलने के बावजूद स्पर्श उस सैन्य मार्ग की ओर आकर्षित रहे, जिसने पीढ़ियों से उनके परिवार को आकार दिया था। कॉर्पोरेट क्षेत्र की एक आशाजनक नौकरी छोड़ने का उनका निर्णय दिखाता है कि वर्दी में सेवा करने की उनकी इच्छा पेशेवर सुविधा से नहीं, बल्कि उद्देश्य से प्रेरित थी।
भारतीय सेना चुनने का अर्थ उनके लिए एक आरामदायक और स्थापित करियर छोड़कर जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा से परिभाषित पेशे में कदम रखना था। स्पर्श के लिए यह निर्णय अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपनी पहचान एक अधिकारी के रूप में बनाने का अवसर था।
सेना की ओर उनके सफर की एक विशेष पहचान उनका उत्कृष्ट खेल रिकॉर्ड भी रहा। एक बहुमुखी सर्वांगीण खिलाड़ी के रूप में उन्होंने कई खेल विधाओं में सफलता हासिल की। वे राष्ट्रीय स्तर के अश्वारोहण पदक विजेता रहे और बैडमिंटन तथा तैराकी में जिला स्तर पर भी पदक जीते।
उनकी खेल उपलब्धियां सैन्य प्रशिक्षण के लिए उपयोगी गुणों को दर्शाती हैं, जिनमें शारीरिक फिटनेस, प्रतिस्पर्धी भावना, अनुशासन और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता शामिल है। विभिन्न खेलों में भागीदारी के लिए अनुकूलनशीलता और शारीरिक तथा मानसिक कौशल को लगातार विकसित करने की क्षमता भी आवश्यक होती है।
स्पर्श की उपलब्धियों का दायरा खेलों तक सीमित नहीं रहा। उन्हें सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज के रूप में भी मान्यता मिली, जो एक महत्वपूर्ण सैन्य कौशल में उनकी दक्षता को दर्शाता है। एनसीसी अंडर ऑफिसर के रूप में उनका पूर्व अनुभव सैन्य अनुशासन, नेतृत्व और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से उनके परिचय को और मजबूत करता है।
एनसीसी का अनुभव, खेलों में उत्कृष्टता, तकनीकी शिक्षा और सैन्य सेवा से जुड़ा परिवार—इन सबने मिलकर स्पर्श को अधिकारी बनने की दिशा में एक विविध आधार दिया। उनके जीवन के हर पहलू ने नेतृत्व गुणों के विकास में योगदान दिया, जो बाद में गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में उनके प्रशिक्षण के दौरान दिखाई दिए।
ओटीए गया में स्पर्श ने कई महत्वपूर्ण कैडेट नियुक्तियां संभालीं, जिनमें बटालियन अंडर ऑफिसर की जिम्मेदारी भी शामिल थी। ऐसी नियुक्तियां अधिकारी कैडेटों पर महत्वपूर्ण दायित्व डालती हैं और नेतृत्व, अनुशासन, टीमवर्क तथा साथी कैडेटों के साथ समन्वय करने की क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर देती हैं।
बटालियन अंडर ऑफिसर के रूप में उनकी नियुक्ति उनके नेतृत्व कौशल पर जताए गए विश्वास को भी दर्शाती है। एनसीसी के माध्यम से नेतृत्व का अनुभव और प्रतिस्पर्धी खेलों से अनुशासन प्राप्त कर स्पर्श अकादमी के कठिन वातावरण में इन गुणों को साथ लेकर आए।
उनकी यात्रा इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उन्होंने दो सफल करियर विकल्पों में से सोच-समझकर चुनाव किया। एक ओर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वरिष्ठ डाटा विश्लेषक का सफल करियर था, दूसरी ओर सैन्य सेवा का अनिश्चित और कठिन मार्ग। स्पर्श ने दूसरा रास्ता चुना, क्योंकि उनके भीतर सेवा का गहरा उद्देश्य था और वे अपने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते थे।
उनकी चार पीढ़ियों की विरासत भी उतनी ही विशिष्ट है। परदादा की ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा इस परिवार के सैन्य संबंधों का सबसे पुराना ज्ञात अध्याय है, जबकि दादा और पिता ने पैदल सेना के अधिकारी के रूप में परंपरा को आगे बढ़ाया। माता ने सेना शैक्षिक कोर में सेवा देकर सशस्त्र बलों से परिवार के जुड़ाव को और मजबूत किया।
स्पर्श के लिए यह विरासत केवल पारिवारिक उपलब्धि नहीं है। इसके साथ सैन्य सेवा से जुड़े मूल्यों को बनाए रखने और अपने आचरण व नेतृत्व के माध्यम से उन्हें दिखाने की अपेक्षा भी जुड़ी है। ओटीए गया में उनकी यात्रा उसी निरंतर कहानी का नवीनतम अध्याय है।
उनका अनुभव यह भी दिखाता है कि सैन्य नेतृत्व विविध पेशेवर और व्यक्तिगत पृष्ठभूमियों से ताकत ले सकता है। कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा और डाटा विश्लेषक का अनुभव तकनीकी दृष्टिकोण प्रदान करता है, जबकि खेल उपलब्धियां शारीरिक सहनशीलता और प्रतिस्पर्धी अनुशासन जोड़ती हैं। एनसीसी के सैन्य संपर्क और सेवा-परंपरा वाले परिवार के साथ मिलकर ये अनुभव नेतृत्व की एक व्यापक नींव बनाते हैं।
तेजी से प्रौद्योगिकी-आधारित होते जा रहे युद्धक्षेत्र में तकनीकी दक्षता और सैन्य नेतृत्व एक-दूसरे से अधिक जुड़ते जा रहे हैं। कंप्यूटर विज्ञान और डाटा विश्लेषण की पृष्ठभूमि स्पर्श को प्रौद्योगिकी और विश्लेषणात्मक सोच की समझ देती है, जबकि सैन्य प्रशिक्षण की ओर उनका संक्रमण इन क्षमताओं को संचालनगत जिम्मेदारी और सेवा के ढांचे में रखता है।
उनकी खेल उपलब्धियां भी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करने और उत्कृष्टता हासिल करने की इच्छा को दर्शाती हैं। राष्ट्रीय स्तर के अश्वारोहण से लेकर जिला स्तर की बैडमिंटन और तैराकी तक, स्पर्श ने लगातार एक से अधिक विधाओं में श्रेष्ठता का प्रयास किया है।
बटालियन अंडर ऑफिसर स्पर्श छेत्री की कहानी अंततः विरासत, चयन और व्यक्तिगत उपलब्धि के संगम को दर्शाती है। उन्हें सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा विरासत में मिली, लेकिन उसे आगे बढ़ाने का निर्णय उन्होंने स्वयं लिया। उन्होंने एक सफल नागरिक करियर बनाया, फिर भी उसे छोड़कर बड़े उद्देश्य की राह चुनी। ओटीए गया में उन्होंने अपने पूर्व अनुभवों को नेतृत्व की जिम्मेदारियों में बदला, जो उनकी बटालियन अंडर ऑफिसर की नियुक्ति में परिणत हुआ।
परदादा की सैन्य सेवा से लेकर दादा और पिता के पैदल सेना करियर और माता के सेना शैक्षिक कोर के योगदान तक, चार पीढ़ियों की सेवा ने अब स्पर्श की यात्रा को आकार दिया है। सेना में शामिल होने का उनका निर्णय सुनिश्चित करता है कि वर्दी से परिवार का जुड़ाव एक और पीढ़ी तक जारी रहे।
उनकी यात्रा उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो कई करियर विकल्पों के बीच निर्णय लेने की स्थिति में हों। यह दिखाती है कि सफलता केवल पेशेवर आराम या वित्तीय अवसर से तय नहीं होती, बल्कि उस उद्देश्य से भी तय होती है, जिसे व्यक्ति चुनता है।
बटालियन अंडर ऑफिसर स्पर्श छेत्री के लिए वह उद्देश्य ओलिव ग्रीन है। चार पीढ़ियों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, प्रौद्योगिकी, खेल, नेतृत्व और सैन्य प्रशिक्षण के माध्यम से अपना रास्ता बनाते हुए वे उन नए अधिकारी अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो विरासत में मिले मूल्यों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा—दोनों को साथ लेकर चलते हैं।
उनकी कहानी अंततः निरंतरता और चयन की कहानी है—एक गौरवशाली सैन्य परंपरा, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंची, जिसे व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प ने और मजबूत किया, और जो देश सेवा की सचेत प्रतिबद्धता के रूप में व्यक्त हुई।