राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो, सशस्त्र सीमा बल, बिहार पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने बिहार के मधुबनी जिले में गुरुवार को 11 ठिकानों पर समन्वित छापेमारी की। यह कार्रवाई नकली भारतीय मुद्रा नोट और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह की जांच के तहत की गई।
यह कार्रवाई 60 वर्षीय हीरा महासेठ, जिन्हें लोग चाची या हीरा देवी महासेठ के नाम से भी जानते हैं, और उनके पति भरत महासेठ से जुड़े स्थानों पर केंद्रित थी। छापे मुख्य रूप से भारत-नेपाल सीमा के पास बसोपट्टी और जयनगर थाना क्षेत्रों के अंतर्गत दुहाबी बाजार में मारे गए। सुबह करीब 5 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक चली।
जांच दलों ने आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की तलाशी ली, जिनमें किराना दुकान, गोदाम, मशीनरी की दुकान, गैराज और स्पेयर पार्ट्स की दुकानें शामिल थीं। दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने के लिए यह तलाशी ली गई। बाद में अदालत के आदेश के अनुसार मुख्य किराना दुकान और गोदामों सहित सभी 11 परिसरों को सील कर दिया गया।
सुरक्षा कारणों से इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी गई और एक मोबाइल टावर-डंपिंग वाहन तैनात किया गया। छापेमारी के दौरान सशस्त्र सीमा बल ने सुरक्षा और रसद सहायता उपलब्ध कराई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अभियान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने पहले से ही अपने मोबाइल फोन शिविर में जमा करा दिए थे।
इस कार्रवाई में सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों, जिनमें उप कमांडेंट हरि नारायण जाट और सहायक कमांडेंट पारस राठी शामिल थे, ने भाग लिया। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की टीम का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक किसलय कुमार सिन्हा और निरीक्षक विकास कुमार कर रहे थे। इनके साथ नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो के उप पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश राय, बिहार पुलिस ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शिवम धाकड़, जयनगर उप पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार, विशेष कार्य बल के निरीक्षक अमित कुमार और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जांच पिछले डेढ़ महीने में हुई पहले की गिरफ्तारियों और तेज कार्रवाई के बाद आगे बढ़ी। भरत महासेठ और उनके सहयोगी शिव कुमार राउत, उर्फ मेहमान, को अगस्त 2026 की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था। उस समय विशेष कार्य बल और सशस्त्र सीमा बल या पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 50,150 रुपये अंकित मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए थे।
हीरा महासेठ को लगभग 14-15 सितंबर 2026 को नकली भारतीय मुद्रा नोट, शराब और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को सौंप दिया गया। उनके खिलाफ मादक द्रव्य और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम तथा शराब से जुड़े मामलों में कई प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार हीरा महासेठ मधुबनी से नेपाल के काठमांडू तक फैले नेटवर्क में एक प्रमुख व्यक्ति हैं। कृष्ण ठाकुर सहित कई अन्य लोगों के नाम भी इस गिरोह से जोड़े गए हैं। कुछ रिपोर्टों में परिवार पर लगभग छह महीने से निगरानी रखने और सीमा पार वित्तीय तथा परिचालन संबंधों की आशंका का भी उल्लेख है।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में नेपाल के उदयपुर जिले के गाईघाट में स्थित एक दुकान को भी संदेह के दायरे में बताया गया है, जिसे कथित तौर पर मुखौटा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, ताजा छापों में किसी बड़ी नकदी या मादक पदार्थ की बरामदगी सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई। जांच दल ने दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त कर उन्हें विश्लेषण के लिए पटना भेजा है।
यह कार्रवाई भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में केंद्रीय और सीमा एजेंसियों के लगातार प्रयासों को दर्शाती है। खुली सीमा होने के कारण यह इलाका ऐसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। जांच में अब नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, सहयोगियों और सीमा पार संबंधों की पड़ताल जारी है।
संबंधित बयानों में मधुबनी पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया है कि सीमा क्षेत्र में महासेठ परिवार की कई संपत्तियों का पता लगाया गया है। इस बीच, स्थानीय बिहार मीडिया और अन्य स्रोतों में स्थानों की संख्या और गिरफ्तारी की तारीखों को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, लेकिन मुख्य घटनाक्रम एक जैसे हैं।