रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई। बैठक 3 नवंबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित की गई। इसमें युद्ध के बदलते स्वरूप और तेजी से विकसित हो रही तकनीकों के अनुरूप सैन्य क्षमताएं बढ़ाने पर जोर दिया गया।
चर्चा के छह प्रमुख विषय रहे—क्षमता विकास और सैन्य आधुनिकीकरण, तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और तालमेल, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, उभरती और युद्ध का स्वरूप बदलने वाली तकनीकें, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग। युद्धक क्षमता और अभियान संबंधी तैयारी बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी के सैन्य प्लेटफॉर्म, हथियार प्रणालियों और तकनीकों को तेजी से शामिल करने की जरूरत पर बल दिया गया।
बैठक में तीनों सेनाओं की संयुक्त अभियान योजना और अलग-अलग युद्ध क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं के समन्वित इस्तेमाल पर चर्चा हुई। अनुसंधान और नवाचार को जल्द सैन्य उपयोग में लाने के लिए सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताएं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा उन्नत संचार तकनीकें चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल रहीं। इन तकनीकों के जरिए सशस्त्र बलों को भविष्य के संघर्षों और अधिक जटिल अभियान परिस्थितियों के लिए तैयार करने पर विचार किया गया।
समिति को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकी रूप से सक्षम सेना बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो मौजूदा और उभरती चुनौतियों का सामना कर सके। उन्होंने सरकार की पहल को तीन प्रमुख पहलुओं में रखा—बजट और आत्मनिर्भरता के साथ पूंजीगत खरीद, तकनीक तथा सैन्य कर्मियों की क्षमता।
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026–27 का रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान शामिल है। उन्होंने पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ धन के प्रभावी उपयोग और तीनों सेनाओं की अत्यावश्यक जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
स्वदेशी रक्षा विनिर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014–15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025–26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा निर्यात भी 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम के स्तर से बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उन्होंने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता घटाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने उन्नत हथियारों, मिसाइलों और प्रणालियों के विकास में डीआरडीओ की पहल का भी उल्लेख किया। रक्षा मंत्री के अनुसार, सरकार निजी उद्योग को प्रतिस्पर्धा के समान अवसर दे रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से लेकर बड़े उद्योगों तक की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने रक्षा क्षमता बढ़ाने में पूरे देश की सहभागिता से जोड़ा।

सैन्य कर्मियों की भूमिका पर राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य शक्ति केवल तकनीक और वित्तीय संसाधनों से तय नहीं होती; जवानों और अधिकारियों की क्षमता, प्रशिक्षण तथा तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप के अनुरूप तीनों सेनाओं को अपनी संरचनाओं और सैन्य फॉर्मेशनों में लगातार सुधार करना होगा।
इसी संदर्भ में उन्होंने भारतीय सेना की नई संरचनाओं में शामिल असानी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये मौजूदा अभियान संबंधी जरूरतों को पूरा करने और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में प्रभावी साबित हो रही हैं।
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है। इसमें अभियान संबंधी तैयारी बेहतर करना, उन्नत तकनीक अपनाना और दीर्घकालिक स्वदेशी क्षमताएं विकसित करना भी शामिल है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और घरेलू तकनीकी क्षमता को जरूरी बताया।

बैठक में अनुसंधान एवं विकास में निरंतर निवेश, घरेलू उद्योग की अधिक भागीदारी, स्वदेशी नवाचार और संबंधित संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों ने विधायी, रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों से जुड़े अपने सुझाव रखे।
समिति ने जरूरी क्षमताओं को प्राथमिकता देने, खरीद और विकास प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा तय लक्ष्यों के मुकाबले प्रगति की समय-समय पर समीक्षा पर जोर दिया। आधुनिकीकरण को योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत रेखांकित की गई, ताकि उसका ठोस लाभ सैन्य अभियानों में मिले। इसका उद्देश्य ऐसी सेना तैयार करना है, जो तकनीकी बढ़त, तेजी से कार्रवाई की क्षमता और आत्मनिर्भरता के साथ पारंपरिक युद्ध, उससे इतर सुरक्षा खतरों तथा कई क्षेत्रों में एक साथ उभरती चुनौतियों का सामना कर सके।
बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा अन्य वरिष्ठ असैन्य और सैन्य अधिकारी शामिल हुए।