राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु को शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए सर्वश्रेष्ठ NDA परिणाम के लिए प्रतिष्ठित थल सेनाध्यक्ष (COAS) ट्रॉफी से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश के लिए अपने कैडेटों को तैयार करने में संस्थान के प्रदर्शन को मान्यता देता है।
यह ट्रॉफी नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में उप थल सेनाध्यक्ष (सूचना प्रणाली और प्रशिक्षण) द्वारा प्रदान की गई। इस मान्यता ने रक्षा परीक्षाओं और सशस्त्र बलों में प्रवेश से जुड़ी कठिन चयन प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने में बेंगलुरु स्थित इस सैन्य विद्यालय के योगदान को रेखांकित किया।
सर्वश्रेष्ठ NDA परिणाम के लिए COAS ट्रॉफी विशेष रूप से विद्यालय के सफल NDA अभ्यर्थियों को तैयार करने के प्रदर्शन पर केंद्रित है। यह उपलब्धि सैन्य-उन्मुख आवासीय शिक्षण संस्थानों के महत्व को भी दर्शाती है, जो सशस्त्र बलों में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक आधार तैयार करते हैं।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु, जिसे पहले बैंगलोर मिलिट्री स्कूल के नाम से जाना जाता था, भारत के पांच राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों में से एक है। इसकी स्थापना 1 अगस्त 1946 को किंग जॉर्ज VI रॉयल इंडियन मिलिट्री कॉलेज, बेंगलुरु के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद यह संस्थान सैन्य विद्यालयों के उस नेटवर्क का हिस्सा बना, जिसकी स्थापना अनुशासन, नेतृत्व और सेवा-भावना को प्रोत्साहित करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए की गई थी।
यह विद्यालय एक सैन्य आवासीय विद्यालय के रूप में संचालित होता है और माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षा प्रदान करता है। इसका शैक्षणिक कार्यक्रम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है, जबकि संस्थागत वातावरण में शारीरिक प्रशिक्षण, खेल, सह-पाठ्य गतिविधियाँ और नेतृत्व विकास शामिल हैं।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की तैयारी ऐतिहासिक रूप से इस सैन्य विद्यालय की शैक्षणिक दिशा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी रक्षा सेवा के लिए आवश्यक शैक्षणिक तैयारी के साथ-साथ शारीरिक और व्यक्तिगत विकास भी प्राप्त कर सकते हैं।
नवीनतम COAS ट्रॉफी शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान इस व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण के परिणाम को मान्यता देती है। यद्यपि यह पुरस्कार विशेष रूप से NDA परिणामों से संबंधित है, फिर भी यह उपलब्धि सैन्य सेवा में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को संवारने में विद्यालय की बड़ी भूमिका की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु का ध्येय वाक्य “शीलं परम भूषणम्” यानी “चरित्र सर्वोच्च गुण है” संस्थान के चरित्र और व्यक्तिगत विकास पर जोर को दर्शाता है। सैन्य विद्यालय शैक्षणिक शिक्षा को अनुशासन, जिम्मेदारी, टीमवर्क और नेतृत्व जैसे गुणों के साथ जोड़ने का प्रयास करते हैं।
विद्यालय का परिसर और आवासीय वातावरण विद्यार्थियों को कक्षा के बाहर भी संरचित गतिविधियों में भाग लेने के अवसर देता है। खेल और शारीरिक शिक्षा इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, टेनिस, बैडमिंटन, तैराकी, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो और टेबल टेनिस जैसी विधाओं के लिए सुविधाएँ और प्रशिक्षण उपलब्ध हैं।
ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही टीमवर्क, प्रतिस्पर्धा, शारीरिक क्षमता और नेतृत्व का अनुभव दे सकती हैं। ये गुण सैन्य जीवन की व्यापक आवश्यकताओं से भी जुड़े हैं, हालांकि NDA चयन प्रक्रिया में सफलता लिखित परीक्षा, सेवा चयन बोर्ड की परीक्षा और चिकित्सा मानकों सहित कई चरणों पर निर्भर करती है।
विद्यालय ने ऐसे पूर्व छात्रों को भी तैयार किया है, जिन्होंने आगे चलकर विभिन्न क्षेत्रों में सेवा दी। इसके पूर्व छात्र, जिन्हें जॉर्जियन कहा जाता है, में सैन्य अधिकारी, सिविल सेवा, व्यवसाय, खेल और मनोरंजन जगत की हस्तियां शामिल हैं।
इसके उल्लेखनीय पूर्व छात्रों में कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया, जिन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, पूर्व नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल सतीशकुमार नामदेव घोरमड़े, और वोडाफोन समूह के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण सारिन शामिल हैं। विद्यालय के पूर्व छात्र नेटवर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कई अन्य प्रमुख नाम भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों का संस्थागत इतिहास भारत के उस प्रयास से गहराई से जुड़ा है, जिसके तहत ऐसे शैक्षणिक संस्थान विकसित किए गए जो विद्यार्थियों को अकादमिक तैयारी के साथ अनुशासित वातावरण का अनुभव भी दे सकें। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय और सैनिक विद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे संस्थानों ने सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश करने वाले अभ्यर्थियों के समूह में योगदान दिया है।
पुणे के पास खड़कवासला स्थित NDA, तीनों सेनाओं के लिए चुने गए कैडेटों का पूर्व-कमीशन प्रशिक्षण संस्थान है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षिक और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना होता है, जिसके बाद आगे की चयन प्रक्रिया होती है।
ऐसे विद्यालयों के लिए, जैसे राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु, NDA की तैयारी केवल कक्षा के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान, शारीरिक फिटनेस, आत्मविश्वास, संचार कौशल, नेतृत्व गुण और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों में प्रदर्शन करने की क्षमता का संयोजन चाहिए।
2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए मिली COAS ट्रॉफी बेंगलुरु विद्यालय के इस क्षेत्र में प्रदर्शन की संस्थागत मान्यता है। यह उन शिक्षकों, सैन्य कर्मचारियों, प्रशिक्षकों और विद्यालय नेतृत्व की भूमिका पर भी ध्यान दिलाती है, जो रक्षा-उन्मुख करियर की ओर बढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं।
यह पुरस्कार नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में प्रदान किया गया, जो फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नाम पर है और भारत की रक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए जाना जाता है। इस प्रस्तुति ने विद्यालय की NDA-संबंधी उपलब्धि को औपचारिक मंच पर सम्मानित किया।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु के विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि संस्थान के शैक्षणिक वर्ष के प्रदर्शन की मान्यता है। विद्यालय प्रशासन के लिए यह शैक्षणिक मानकों को बनाए रखते हुए सैन्य-विद्यालय परंपरा से जुड़े शारीरिक, नेतृत्व और चरित्रगत गुणों के विकास को जारी रखने के महत्व को पुष्ट करती है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारत का रक्षा-शिक्षा तंत्र अधिकारी-प्रवेश मार्गों के लिए युवाओं को तैयार करने पर लगातार जोर दे रहा है। राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय जैसे संस्थान विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण देते हैं, जहाँ शैक्षणिक शिक्षा और व्यवस्थित सह-पाठ्य विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
अतः शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए सर्वश्रेष्ठ NDA परिणाम का पुरस्कार केवल एक शैक्षणिक सम्मान नहीं है। यह भारत में कमीशन प्राप्त सैन्य सेवा के प्रमुख मार्गों में से एक के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने पर बेंगलुरु संस्थान के निरंतर ध्यान को दर्शाता है, साथ ही चरित्र, अनुशासन और नेतृत्व पर उसके लंबे समय से चले आ रहे जोर को भी आगे बढ़ाता है।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु को COAS ट्रॉफी मिलने के साथ यह मान्यता उस संस्थान के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है, जिसकी सैन्य-शिक्षा विरासत कई दशकों पुरानी है। NDA मार्ग में इसका प्रदर्शन उन युवा भारतीयों को तैयार करने में सैन्य विद्यालयों की निरंतर भूमिका को रेखांकित करता है, जो सशस्त्र बलों और राष्ट्रीय जीवन के अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व की जिम्मेदारियाँ निभाना चाहते हैं।