लुधियाना में पंजाब पुलिस ने 20 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों को भारतीय सेना के वाहनों की आवाजाही की सीसीटीवी फुटेज लाइव और लगातार उपलब्ध कराने का आरोप है। यह सड़क लुधियाना–फिरोजपुर मार्ग है, जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बडोवाल छावनी की ओर जाती है।
गिरफ्तार युवक की पहचान गुरदासपुर जिले के फतेहगढ़ चूड़ियां निवासी रछपाल सिंह, जिसे रचपाल सिंह भी बताया गया है, के रूप में हुई है। जांच के अनुसार उसने न्यू सुंदर नगर में एक दुकान किराये पर ली थी और जूते की दुकान के रूप में उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। यह दुकान निजी अस्पताल के सामने और बडोवाल छावनी से करीब छह किलोमीटर दूर थी।
पुलिस का कहना है कि दुकान नियमित रूप से नहीं खोली जाती थी। बाहर की ओर चार प्रतिबंधित चीनी सीसीटीवी कैमरे मुख्य सड़क की दिशा में लगाए गए थे। इन कैमरों के दायरे से गुजरने वाले सैन्य वाहन फिरोजपुर और पश्चिमी सीमा की ओर जाते समय दिखाई देते थे।
उप पुलिस आयुक्त (जांच) हरपाल सिंह ने बताया कि गिरफ्तारी एक विशेष सूचना के आधार पर हुई। अधिकारी के अनुसार, आरोपी जूते की दुकान चलाता था, लेकिन दुकान नियमित रूप से नहीं खोलता था। दुकान के बाहर लगाए गए कैमरे लुधियाना–फिरोजपुर सड़क की दिशा में थे, जिससे संदेह पैदा हुआ।
जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों को मोबाइल अनुप्रयोगों के जरिए लाइव पहुंच दी गई थी। रछपाल ने उपयोगकर्ता पहचान और पासवर्ड साझा किए थे, जिसके बाद 24 घंटे फुटेज उपलब्ध रहती थी। पुलिस के अनुसार यह गतिविधि करीब दो महीने तक चली।
पैसे, हैंडलर और नशा-तस्करी का संबंध
पूछताछ में यह भी संकेत मिला है कि रछपाल को किश्तों में 2.5 लाख से 3 लाख रुपये नकद मिले। इसके अलावा दुकान के किराये के लिए हर महीने 40,000 रुपये दिए जाते थे। पुलिस को संदेह है कि यह भुगतान सीमा पार नशा-तस्करों के जरिए भेजा गया।
पुलिस का कहना है कि जिस मध्यस्थ के जरिए उसकी पहली बार हैंडलरों से संपर्क हुआ, उसे पहचान लिया गया है। जांच यह भी देख रही है कि यह संपर्क सोशल मीडिया के जरिए हुआ, किसी पहले से मौजूद आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से या किसी अन्य भर्ती करने वाले के जरिए।
साराभा नगर थाने में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धाराओं 3, 4, 5 और 9 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। चार कैमरे और उनकी मेमोरी कार्ड बरामद की गई हैं।
स्थान का महत्व
बडोवाल छावनी कोई साधारण सड़क किनारे स्थित सैन्य ठिकाना नहीं है। यहां 17 फील्ड एम्युनिशन डिपो और एक वायु रक्षा इकाई है, जो पास स्थित हलवारा वायुसेना स्टेशन और लुधियाना को सुरक्षा प्रदान करती है। यह डिपो फिरोजपुर सीमा क्षेत्र की सहायता के लिए स्थापित किया गया था, जो पाकिस्तान सीमा के निकट है।
लुधियाना–फिरोजपुर मार्ग सैन्य काफिलों के लिए स्वाभाविक आवागमन गलियारा है। इस मार्ग पर वाहनों के प्रकार, उनकी संख्या, समय और दिशा की लगातार जानकारी किसी विदेशी खुफिया सेवा को मिलना सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
पंजाब में दोहराता पैटर्न
यह मामला अलग-थलग नहीं है। पुलिस और राष्ट्रीय मीडिया ने इसे पंजाब में हाल के महीनों में पकड़े गए ऐसे ही मामलों की एक श्रृंखला का हिस्सा बताया है। कपूरथला में सिम-आधारित चीनी कैमरे से सैन्य गतिविधि की लाइव फुटेज भेजे जाने के बाद गिरफ्तारियां हुई थीं।
पठानकोट में पठानकोट–जम्मू मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के एक हिस्से पर इंटरनेट से जुड़े कैमरे के जरिए सेना और अर्धसैनिक आवाजाही की फुटेज साझा करने के आरोप में एक निवासी को गिरफ्तार किया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार उसे 40,000 रुपये और दुबई में मौजूद संपर्क से निर्देश मिले थे।
इससे पहले 2026 में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और पंजाब इकाइयों ने एक बड़े आईएसआई-समर्थित मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जिसमें कुछ युवा, जिनकी भर्ती इंस्टाग्राम के जरिए की गई थी, ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू में सेना, वायु सेना और बीएसएफ ठिकानों के पास सौर ऊर्जा और 4जी सीसीटीवी कैमरे लगाए थे।
प्रतिबंधित कैमरों की समस्या
सरकार ने सुरक्षा कारणों से कुछ इंटरनेट-सक्षम चीनी सीसीटीवी प्रणालियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। अधिकारियों के अनुसार इन उपकरणों के विदेशी सर्वर तक भारतीय एजेंसियों की पहुंच आसानी से नहीं हो पाती, जबकि उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड मिलने पर कोई भी विदेश से फुटेज देख सकता है।
इसके बावजूद पुलिस का कहना है कि ऐसे कैमरे दिल्ली के रास्ते लुधियाना जैसे शहरों में तस्करी के जरिए पहुंचाए जा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर बेचे जा रहे हैं। कम कीमत, आसान रिमोट पहुंच और कमजोर अंतिम स्तर की निगरानी इस तरह के मॉड्यूलों के लिए अवसर पैदा करती है।
जांच में क्या अभी तय होना बाकी है
पुलिस ने पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं और अदालत के दस्तावेजों में आईएसआई से सीधा संबंध भी अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। हालांकि कई रिपोर्टों में इस मामले को उसी रूप में बताया गया है।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि फुटेज कितने समय तक चली और उसमें कौन-कौन सी गतिविधियां कैद हुईं। यह भी देखा जा रहा है कि रछपाल अकेला था या उसके साथ कोई स्थानीय मददगार, जैसे मकान मालिक, बिजली मिस्त्री या कैमरे लगाने और बनाए रखने वाला व्यक्ति, शामिल था।
पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या फिरोजपुर मार्ग पर अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के कैमरे लगे हैं और भुगतान सीमा पार कैसे भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि लुधियाना पुलिस और खुफिया इकाइयां इस मामले को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मुकदमे के साथ-साथ प्रति-खुफिया सुराग के रूप में भी देख रही हैं।
आरोपी अभी हिरासत में है। आगे की गिरफ्तारियां इस बात पर निर्भर करेंगी कि कैमरों, मोबाइल फोन और धन-प्रवाह से जुड़ा डिजिटल सुराग क्या सामने लाता है।