केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हैदराबाद के पूर्व आयकर आयुक्त (छूट) और उनकी पत्नी, जो केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की पूर्व उप महानिरीक्षक रह चुकी हैं, के खिलाफ कथित 1.11 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।
यह प्राथमिकी 10 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा-III ने दर्ज की। प्राथमिकी के अनुसार, पूर्व आयकर आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने 1 अप्रैल 2022 से 10 मई 2025 तक की जांच अवधि के दौरान अपने ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की।
सीबीआई ने कथित आय से अधिक संपत्ति की राशि 1,11,77,889 रुपये आंकी है, जो उनकी ज्ञात आय से 57.10 प्रतिशत अधिक बताई गई है। उनकी पत्नी, जो सीआईएसएफ में डीआईजी के पद पर रह चुकी हैं, पर भी इन संपत्तियों के अर्जन में मदद करने का आरोप लगाया गया है।
प्राथमिकी के अनुसार, जांच अवधि में अधिकारी की ज्ञात आय 1,95,74,358 रुपये थी, जबकि अवधि के दौरान मानी गई कुल संपत्ति और व्यय 3,07,52,247 रुपये रहा। जांच अवधि के अंत में अधिकारी और उनके परिवार के पास दर्ज संपत्तियों का मूल्य 4,31,60,820 रुपये बताया गया है।
संबंधित अवधि में यह भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी हैदराबाद में आयकर आयुक्त (छूट) के रूप में तैनात थे और प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, हैदराबाद के कार्यालय के अधीन दो इकाइयों के लिए आयकर आयुक्त (अपील) का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे थे।
यह नया मामला मई 2025 में दर्ज की गई सीबीआई की एक पूर्व जांच के बाद सामने आया है, जिसमें आरोप था कि अधिकारी ने कुछ करदाताओं के पक्ष में कर अपीलों का निपटारा करने के बदले अनुचित लाभ प्राप्त किए।
उस जांच के दौरान सीबीआई ने कई स्थानों पर तलाशी ली थी, जिनमें अधिकारी और उनकी पत्नी से जुड़े आवासीय परिसर भी शामिल थे। जांचकर्ताओं ने कथित रूप से अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित चल और अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए थे।
एजेंसी ने दिल्ली के एक आवासीय परिसर से 54 लाख रुपये नकद और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए थे।
पिछले मामले में, लंबित कर अपीलों में अनुकूल फैसलों के लिए रिश्वत की मांग और स्वीकार करने के आरोपों से जुड़े प्रकरण में भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी को अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार भी किया गया था। मुंबई, हैदराबाद, खम्मम, विशाखापत्तनम और नई दिल्ली सहित 18 स्थानों पर तलाशी ली गई थी।
सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया है। पूर्व सीआईएसएफ डीआईजी को भी कथित सहायता के प्रावधानों के तहत आरोपी बनाया गया है।
आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और केवल प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करता। आगे की कार्रवाई सीबीआई जांच के निष्कर्षों और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।