बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले भारतीय सेना के जवान शत्रुघ्न यादव की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। वे पिछले सप्ताह हुए एक कथित हमले में गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस घटना के बाद गांवों में विरोध शुरू हो गया और लोगों ने मामले में नामजद आरोपियों पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
शत्रुघ्न यादव रामगढ़ थाना क्षेत्र के साहुका गांव के निवासी थे। उनका इलाज लखनऊ के एक सैन्य अस्पताल में चल रहा था, जहां 16 सितंबर की रात उन्होंने दम तोड़ दिया। वे असम में तैनाती से छुट्टी पर आए हुए थे। पुलिस और परिवार के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर की सुबह उन्हें जमीन के लेन-देन से जुड़े वित्तीय विवाद के सिलसिले में रामगढ़ बुलाया गया था। परिजनों का आरोप है कि जमीन की बिक्री से करीब 16 लाख रुपये बकाया थे।
आरोप है कि उन्हें एक स्कॉर्पियो वाहन में बंद कर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। इस हमले में उनके शरीर का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा झुलस गया था। पहले उन्हें वाराणसी के एक आघात केंद्र में ले जाया गया, बाद में चिकित्सकों ने उन्हें लखनऊ के सेना अस्पताल रेफर कर दिया। करीब एक सप्ताह इलाज के बाद उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी में ही उन्होंने बयान दर्ज कराया था, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस ने सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से तीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि चार अभी फरार हैं। ग्रामीणों द्वारा मामले की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के बाद स्थानीय थानाध्यक्ष की भूमिका की जांच का भी आश्वासन दिया गया है। कैमूर के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी रहेगी। मोहनिया की उप-विभागीय दंडाधिकारी रत्ना प्रियदर्शिनी ने बताया कि नामजद आरोपियों में से तीन पहले से हिरासत में हैं और बाकी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
जवान की मौत की खबर से साहुका और आसपास के इलाकों में भारी आक्रोश फैल गया। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण रामगढ़ पहुंचे, दुर्गा चौक पर करीब पांच घंटे तक सड़क जाम की और थाने के पास जुटे। उनकी मांग थी कि आरोपियों को सख्त सजा दी जाए और पुलिस की भूमिका की भी जांच हो। मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया और यातायात बहाल हो गया।
पुलिस जांच में जमीन से जुड़े वित्तीय विवाद की परिस्थितियों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जवान का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव लाए जाने की संभावना है। स्थानीय लोगों ने सेवारत जवान पर हुए कथित हमले को बेहद चौंकाने वाला बताया है। अधिकारियों ने लोगों से जांच में बाधा न डालने की अपील की है।