भारतीय क्रिकेटर प्रेमा रावत, जो महिला एशिया कप जीतने वाली टीम की सदस्य रही हैं और महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलती हैं, का भारतीय वायु सेना से विशेष संबंध है। क्रिकेट की उनकी यात्रा एयर फ़ोर्स स्टेशन बरेली के खेल मैदान से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने खेल में अपने शुरुआती कदम रखे और आगे चलकर भारतीय टीम तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुँचीं।
दाएं हाथ की बल्लेबाज और दाएं हाथ की लेग-ब्रेक गेंदबाज रावत उत्तराखंड से आती हैं। उन्होंने क्रिकेट को पूरी तरह अपनाने से पहले कई खेलों में अपनी क्षमता विकसित की। शुरुआती खेल जीवन में उन्होंने हॉकी भी खेली, लेकिन बाद में क्रिकेट को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया।
रावत का भारतीय वायु सेना से जुड़ाव उनके पिता केदार सिंह रावत के माध्यम से है, जो वायु सेना में सेवारत हैं। एयर फ़ोर्स स्टेशन बरेली का खेल मैदान उनके शुरुआती क्रिकेट सफर का अहम स्थान बना, जहाँ उन्होंने अपनी प्रतिभा को आकार देना शुरू किया।
इन्हीं शुरुआती दिनों से आगे बढ़ते हुए रावत ने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और बल्लेबाजी के साथ दाएं हाथ की लेग स्पिन को मिलाकर एक होनहार ऑलराउंडर के रूप में उभरीं। वह वर्तमान में घरेलू क्रिकेट में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करती हैं और भारत की प्रमुख महिला टी20 प्रतियोगिता में भी अपनी छाप छोड़ चुकी हैं।
2025 महिला प्रीमियर लीग सत्र से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने रावत को ₹1.2 करोड़ में खरीदा। फ्रेंचाइजी द्वारा उनका चयन उनके पेशेवर करियर का बड़ा पड़ाव बना और उन्हें डब्ल्यूपीएल में शीर्ष घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिला।
इसके बाद रावत ने भारत ए के रास्ते पर आगे प्रगति की। अगस्त 2025 में श्रेयंका पाटिल और प्रिया मिश्रा की चोट के बाद उन्हें तीनों प्रारूपों में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारत ए महिला टीम में शामिल किया गया। भारत ए के लिए उनके प्रदर्शन में महिला एशिया कप राइजिंग स्टार्स अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान शामिल रहा, जहाँ उन्होंने भारत की विजयी मुहिम के दौरान पाँच मैचों में आठ विकेट लिए।
उनकी प्रगति अंततः वरिष्ठ भारतीय टीम तक पहुँची। जून 2026 में श्रेयंका पाटिल की चोट के कारण उन्हें 2026 आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के शेष मैचों के लिए भारत की टीम में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने महिला ट्वेंटी20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण किया, जो घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक उनकी यात्रा का एक और चरण था।
रावत की उन्नति महिला क्रिकेट संरचना के कई स्तरों से होकर गुज़री है। एयर फ़ोर्स स्टेशन बरेली में क्रिकेट खेलने के शुरुआती दिनों से लेकर उत्तराखंड, भारत ए, डब्ल्यूपीएल और वरिष्ठ भारतीय टीम तक उनका सफर इसी क्रम में आगे बढ़ा।
महिला एशिया कप जीतने वाली टीम में उनकी मौजूदगी ने इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ी। वायु सेना की खेल सुविधा में क्रिकेट की नींव रखने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके सफर को सेवा के खेल परिवेश से एक अलग पहचान देता है।
भारतीय वायु सेना ने इस संबंध को रावत की उपलब्धियों को मान्यता देते हुए रेखांकित किया। उन्हें क्रिकेट में उनके प्रदर्शन के लिए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, वायु सेना प्रमुख, ने सम्मानित किया।
यह सम्मान रावत की यात्रा के दो पक्षों को एक साथ लेकर आया। एक ओर उनका भारतीय वायु सेना से पारिवारिक जुड़ाव, दूसरी ओर वह खेल प्रगति जो वायु सेना के खेल मैदान से शुरू हुई थी। इससे सेवा प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खेल सुविधाओं और अवसरों की युवा प्रतिभा को आगे बढ़ाने में भूमिका भी उजागर हुई।
सशस्त्र बलों की व्यापक संस्कृति में खेल हमेशा एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ये शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धी जज़्बे को प्रोत्साहित करते हैं। देशभर के वायु सेना स्टेशनों में खेल सुविधाएँ मौजूद हैं, जो कार्मिकों के साथ-साथ उपयुक्त परिस्थितियों में उनके व्यापक समुदाय के सदस्यों को भी विभिन्न खेलों में भाग लेने का अवसर देती हैं।
रावत की कहानी दिखाती है कि एक शुरुआती खेल अवसर किस तरह बड़े सफर की नींव बन सकता है। एयर फ़ोर्स स्टेशन बरेली में क्रिकेट खेलने से लेकर उत्तराखंड क्रिकेट, भारत ए और डब्ल्यूपीएल होते हुए वह अंतरराष्ट्रीय मान्यता तक पहुँचीं।
उनकी ₹1.2 करोड़ की डब्ल्यूपीएल खरीद, भारत ए में प्रदर्शन, एशिया कप राइजिंग स्टार्स अभियान, वरिष्ठ भारत चयन और अंतरराष्ट्रीय पदार्पण इस विकास यात्रा के क्रमिक पड़ाव हैं। लेग-स्पिनर के रूप में उनकी भूमिका उनके क्रिकेटी व्यक्तित्व को एक विशेष आयाम भी देती है।
भारतीय वायु सेना के लिए रावत का सम्मान करना उसके व्यापक समुदाय से जुड़ी खेल उत्कृष्टता की मान्यता भी है। उनकी उपलब्धि यह उदाहरण प्रस्तुत करती है कि समर्पण और निरंतर प्रतिस्पर्धी अनुभव के माध्यम से खेल की आकांक्षाएँ कैसे आकार ले सकती हैं।
बरेली के वायु सेना खेल मैदानों से लेकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम और अंतरराष्ट्रीय मंच तक प्रेमा रावत की यात्रा भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धी महिला क्रिकेट संरचना में एक युवा खिलाड़ी की प्रगति को दर्शाती है। उनका सफर आज भी उसी वायु सेना परिवेश से गहराई से जुड़ा है, जहाँ से उनकी क्रिकेट यात्रा ने पहली बार आकार लेना शुरू किया था।