जबलपुर स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट (MCMM) में श्रीलंकाई सेना के अधिकारियों के लिए आयोजित विशेष लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम 23 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। यह 28 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम समकालीन रसद और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन की प्रथाओं पर केंद्रित था।
MCMM ने इस कार्यक्रम को विशेष रूप से श्रीलंकाई सेना के लिए तैयार किया था। इसका उद्देश्य प्रतिभागी अधिकारियों को रसद और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से परिचित कराना और उन्हें व्यावसायिक अनुभव प्रदान करना था।
28 दिन के इस पाठ्यक्रम में सैन्य रसद के प्रबंधन से जुड़ी समकालीन प्रथाओं पर जोर दिया गया। व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों की रसद प्रबंधन से संबंधित समझ को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया।
सैन्य रसद परिचालन प्रभावशीलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके जरिए बलों और संरचनाओं तक आवश्यक संसाधन और सहायता समय पर पहुंचती है। इसी तरह, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन भी संसाधनों की समयबद्ध उपलब्धता और संचालन के लिए अहम है।
कार्यक्रम की विशेष संरचना ने MCMM को श्रीलंकाई सेना के अधिकारियों की व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने में सक्षम बनाया। ऐसे विशेष पाठ्यक्रम प्रतिभागी सेनाओं के बीच संवाद और सहयोग का अवसर भी उपलब्ध कराते हैं।
पाठ्यक्रम के समापन ने भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में व्यावसायिक सैन्य शिक्षा की भूमिका को भी रेखांकित किया। दोनों देशों के अधिकारियों की प्रशिक्षण सहभागिता ज्ञान के आदान-प्रदान और सैन्य संस्थानों के बीच आपसी परिचय को बढ़ाती है।
MCMM द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग में सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के महत्व को दर्शाता है। इस तरह के पाठ्यक्रम तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान देने के साथ-साथ मित्र देशों के अधिकारियों को भारतीय समकक्षों से संवाद का अवसर भी देते हैं।
यह 28 दिन का कार्यक्रम विशेष रसद शिक्षा के साथ व्यावसायिक सहभागिता और सैन्य सहयोग के व्यापक उद्देश्यों को भी जोड़ता है। समकालीन रसद और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन पर इसका फोकस सैन्य सहायता प्रणालियों के निरंतर विकास को दर्शाता है।
जबलपुर में इस पाठ्यक्रम का सफल समापन भारतीय और श्रीलंकाई सेनाओं के बीच एक और व्यावसायिक प्रशिक्षण सहभागिता के रूप में देखा गया। इसने विशेषज्ञता बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की महत्ता को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम 23 सितंबर को अपने मुख्य उद्देश्यों के साथ संपन्न हुआ, जिनमें समकालीन रसद प्रथाएं, व्यावसायिक विकास और भारत तथा श्रीलंका के बीच स्थायी संबंधों को मजबूत करना शामिल था।